असम के डिब्रूगढ़ ने रचा इतिहास, लगातार दो साल तक हर बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआ असम के डिब्रूगढ़ जिले में लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष 100 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं, जहां अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच हुए सभी 5,848 प्रसव चिकित्सा केंद्रों में संपन्न हुए। असम के पूर्वी हिस्से में स्थित डिब्रूगढ़ जिले ने मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है। जिले ने लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में शून्य घरेलू प्रसव का रिकॉर्ड बनाए रखते हुए शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया है। अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 की अवधि के दौरान दर्ज किए गए सभी 5,848 नवजातों का जन्म चिकित्सा केंद्रों में हुआ, जिससे किसी भी घर पर प्रसव का मामला सामने नहीं आया। स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के आंकड़ों में निरंतर उछाल जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पूर्व वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भी क्षेत्र में 21,895 बच्चों का जन्म पूरी तरह से स्वास्थ्य केंद्रों में ही संपन्न हुआ था। वहीं चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई 2026 के चार महीनों में 5,848 प्रसव दर्ज किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में दर्ज 5,379 प्रसवों की तुलना में 469 अधिक है, जो 8.72 प्रतिशत की सीधी वृद्धि को दर्शाता है। यदि पिछले छह वर्षों के समग्र आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिले ने स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 1,33,256 सफल प्रसव दर्ज किए हैं। वर्ष 2020-21 में यह संख्या 23,252 रही, जिसके बाद 2021-22 में 21,662, 2022-23 में 22,600, 2023-24 में 21,509, 2024-25 में 22,338 तथा 2025-26 में 21,895 प्रसव अस्पताल परिसरों में कराए गए थे। सफलता के पीछे की रणनीति और जमीनी प्रयास मुख्यमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को X पर लिखा कि इस उपलब्धि ने पूरे जिले में सुरक्षित प्रसव और गुणवत्तापूर्ण मातृ देखभाल को मजबूत किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय चिकित्सा ढांचे के विस्तार, गर्भावस्था की सटीक निगरानी और समाज में बढ़ती जागरूकता को दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, निरंतर फॉलो-अप जांच, उच्च जोखिम वाले गर्भधारण की पहचान और नियमित परामर्श सत्रों ने इस सफलता में केंद्रीय भूमिका निभाई है। इस अभियान को सफल बनाने में डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ 108 एम्बुलेंस नेटवर्क की त्वरित परिवहन सेवा ने अहम योगदान दिया। विशेष रूप से चाय बागानों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं को ऐन वक्त पर अस्पताल पहुंचाने में इन जीवनरक्षक वाहनों ने निर्णायक मदद पहुंचाई। संस्थागत देखभाल के प्रति बढ़ता भरोसा स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि घर पर प्रसव पूरी तरह समाप्त होना सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर आम जनता के गहरे होते विश्वास का प्रमाण है। विभाग ने आगे भी शून्य घरेलू प्रसव की स्थिति बनाए रखने और प्रत्येक मां व नवजात शिशु को गुणवत्तापूर्ण जीवन सुरक्षा प्रदान करने के संकल्प को दोहराया है। इसका आप पर असर संस्थागत प्रसव शत-प्रतिशत होने से क्षेत्र में जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में सीधी मदद मिलती है। • डिब्रूगढ़ में: चाय बागानों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों को प्रसव पीड़ा के समय तुरंत 108 एम्बुलेंस और अस्पताल की निशुल्क सुविधा मिल रही है। इससे जटिल गर्भधारण के मामलों में समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित हो रहा है। • असम राज्य में: अन्य जिलों के लिए डिब्रूगढ़ का यह मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने का व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करता है। इससे राज्य भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे के उन्नयन को बल मिलेगा। • गर्भवती महिलाओं के लिए: अस्पताल में जन्म होने से नवजातों को जन्म के तुरंत बाद आवश्यक टीके और आपातकालीन नवजात देखभाल उपलब्ध होती है। परिजनों को घरेलू प्रसव से जुड़े संक्रमण और रक्तस्राव जैसे जानलेवा खतरों से पूरी सुरक्षा मिलती है। • स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में: आपातकालीन एम्बुलेंस बेड़े और रेफरल नेटवर्क के बेहतर समन्वय से गंभीर मामलों को बिना समय गंवाए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। ऐसा क्यों हुआ डिब्रूगढ़ जिले में लगातार दो वर्षों तक शून्य घरेलू प्रसव का रिकॉर्ड स्वास्थ्य तंत्र, जमीनी कार्यकर्ताओं और आपातकालीन परिवहन के सुनियोजित समन्वय से संभव हुआ है। • सघन निगरानी प्रणाली: स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक गर्भावस्था का शुरुआती चरणों में ही पंजीकरण सुनिश्चित किया। इसके बाद नियमित जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष ट्रैकिंग की गई, जिससे प्रसव के समय अप्रत्याशित संकट नहीं आया। • आशा और स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता: आशा बहुओं और प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मियों ने परिवारों को घरेलू प्रसव के खतरों के प्रति जागरूक किया। निरंतर परामर्श के जरिए परिवारों की झिझक दूर की गई और उन्हें अस्पताल आने के लिए प्रेरित किया गया। • 108 एम्बुलेंस नेटवर्क का जुड़ाव: दूरदराज के इलाकों और चाय बागान बस्तियों से महिलाओं को समय रहते अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा को मुस्तैद रखा गया। परिवहन बाधा दूर होने से घरेलू प्रसव का मुख्य कारण समाप्त हो गया। सवाल-जवाब 1. डिब्रूगढ़ जिले ने हाल ही में क्या उपलब्धि हासिल की है? डिब्रूगढ़ ने लगातार दो वित्तीय वर्षों तक शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर्ज करते हुए शून्य घरेलू प्रसव का रिकॉर्ड बनाया है। 2. अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच जिले में कितने बच्चों का जन्म हुआ? इस अवधि के दौरान कुल 5,848 बच्चों का जन्म हुआ और ये सभी प्रसव स्वास्थ्य केंद्रों में संपन्न हुए। 3. वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में कुल कितने संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे? वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 21,895 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए थे। 4. दूरदराज के इलाकों से महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में किसकी मुख्य भूमिका रही? आशा कार्यकर्ताओं, जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों और 108 एम्बुलेंस नेटवर्क ने दूरदराज व चाय बागानों की महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाया। https://trendkia.com/assam/assam-ke-dibrugarh-ne-racha-itihasa-lagatara-do-sala-taka-hara-bachche-ka-janma-aspatala-men-hua-37662 TrendKia — Har trend, sabse pehle.