असम के काल भैरव डांगोरिया बाबा आश्रम में जंगली हाथियों को भोजन देने पर वन विभाग सख्त, पुजारी गौरांग दास को नोटिस जारी असम के काल भैरव डांगोरिया बाबा आश्रम में पुजारी गौरांग दास द्वारा जंगली हाथियों को हाथ से केले खिलाने के अनोखे नजारे के बीच वन विभाग ने नोटिस जारी किया है। वन्यजीव सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम के तहत नियम तोड़ने पर 10 हजार रुपये के जुर्माने की चेतावनी दी गई है। असम के एक आश्रम में पिछले कई वर्षों से चला आ रहा इंसान और जंगली जानवरों का अनोखा संबंध अब प्रशासनिक और वन्यजीव संरक्षण के दायरे में आ गया है। काल भैरव डांगोरिया बाबा आश्रम के पुजारी गौरांग दास द्वारा घने जंगल से आने वाले जंगली हाथियों को अपने हाथों से भोजन कराने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। जो नजारा सोशल मीडिया पर इंसानी भरोसे की एक अनूठी मिसाल बनकर सामने आ रहा था, वही अब वन्यजीव सुरक्षा और संभावित संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता की वजह बन गया है। गौरांग दास और जंगली हाथियों का छह साल पुराना अनूठा रिश्ता यह पूरा वाकया काल भैरव डांगोरिया बाबा के आश्रम परिसर से जुड़ा हुआ है। आश्रम में निवास करने वाले पुजारी गौरांग दास और जंगल के विशालकाय हाथियों के बीच यह गहरा जुड़ाव रातों-रात कायम नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे करीब छह साल का लंबा समय शामिल है। लगभग छह वर्ष पूर्व आश्रम में प्रवास के दौरान पुजारी की पहली बार एक जंगली हाथी से मुलाकात हुई थी। उस शुरुआती संपर्क के बाद धीरे-धीरे हाथियों का आना-जाना बढ़ता गया और समय के साथ यह दायरा कई अन्य हाथियों तक फैल गया। वर्तमान स्थिति यह है कि आश्रम के पास स्थित घने जंगल से हाथियों का नियमित रूप से आना एक सामान्य गतिविधि बन चुका है। जब पुजारी गौरांग दास जंगल की सीमा पर पहुंचकर खास आवाज में पुकारते हैं, तो कुछ ही मिनटों के भीतर आसपास की घनी झाड़ियों और ऊंचे पेड़ों के पीछे से हाथियों की चहलकदमी दिखाई देने लगती है। बिना किसी डर, बंधन या जंजीर के ये विशालकाय प्राणी पुजारी के एकदम करीब पहुंच जाते हैं। पुजारी अपने हाथों से उन्हें केले खिलाते हैं और पेट भरने के बाद हाथी शांतिपूर्वक वापस जंगल की ओर लौट जाते हैं। पवित्र अग्नि के करीब रात की चहलकदमी और श्रद्धालुओं का आकर्षण पुजारी और हाथियों के बीच इस असामान्य और सम्मोहक मेल-मिलाप की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इंटरनेट पर लोग इसे हाथियों और इंसानों के बीच अद्भुत विश्वास और प्रेम का प्रतीक मान रहे हैं। आश्रम में हाथियों की उपस्थिति केवल दिन के उजाले तक ही सीमित नहीं रहती है। कई मौकों पर इन जंगली हाथियों को देर रात में भी आश्रम के आसपास घूमते हुए देखा गया है। आश्रम में निरंतर प्रज्वलित रहने वाली पवित्र अग्नि के बिल्कुल समीप तक हाथियों का शांतिपूर्वक खड़े रहना लोगों को हैरान कर देता है। रात की खामोशी, लाल वस्त्र पहने पुजारी का शांत व्यक्तित्व और उनके सामने खड़े विशाल गजराज का यह दृश्य किसी सिनेमाई पटकथा की भांति प्रतीत होता है। इसी वजह से अब स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग इस अलौकिक नजारे का साक्षी बनने के लिए आश्रम पहुंचने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की चेतावनी और मानव-हाथी संघर्ष का खतरा यद्यपि पुजारी और हाथियों की यह निकटता आम जनता और पर्यटकों के लिए काफी आकर्षक और कौतूहल से भरी दिखाई देती है, परंतु वन्यजीव विशेषज्ञ इसे पर्यावरण संतुलन और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत चिंताजनक मान रहे हैं। पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जंगली जानवरों को नियमित रूप से इंसानों द्वारा कृत्रिम भोजन उपलब्ध कराने से उनकी प्राकृतिक जीवन शैली और आदतों में खतरनाक बदलाव आ जाता है। जब हाथियों को यह अनुभव होने लगता है कि किसी विशिष्ट स्थान या मानव बस्ती के पास उन्हें बिना किसी प्रयास के आसानी से भोजन प्राप्त हो सकता है, तो उनकी प्राकृतिक रूप से जंगल में भोजन तलाशने की प्रवृत्ति कम होने लगती है। वे बार-बार मानव बस्तियों का रुख करने लगते हैं, जिससे इंसानी आबादी की ओर उनका झुकाव अत्यधिक बढ़ जाता है। असम राज्य पहले से ही मानव और हाथी के बीच होने वाले जानलेवा संघर्षों की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में जंगली जानवरों का किसी धार्मिक आश्रम या घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भोजन के लिए बार-बार आना भविष्य में बड़े हादसे या संघर्ष को न्योता दे सकता है। वन विभाग का कारण बताओ नोटिस और 10 हजार रुपये का जुर्माना हाथियों को खुलेआम भोजन कराने की इस प्रथा पर अब वन प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कपिली वैली रेंज कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जंगली हाथियों को अनुचित तरीके से खाना खिलाने के खिलाफ एक आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगली जीवों के स्वाभाविक व्यवहार को बनाए रखना और इंसानी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। जारी किए गए सरकारी आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि इस नियम का उल्लंघन जारी रहता है या हाथियों को भोजन देने की गतिविधि नहीं रोकी जाती है, तो दोषी व्यक्ति पर 10 हजार रुपये तक का मौद्रिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इस प्रशासनिक कदम के बाद अब सोशल मीडिया पर कौतूहल जगाने वाला यह पूरा मामला वन्यजीव कानून, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सुरक्षा के गंभीर विमर्श से जुड़ गया है। इसका आप पर असर भारत में: यह घटना यह स्पष्ट करती है कि जंगली जानवरों को अनधिकृत रूप से खाना खिलाना कानूनन अपराध है और इससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता है। असम में: मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए यह चेतावनी है कि जंगली हाथियों को भोजन का लालच देकर रिहाइशी इलाकों के पास बुलाना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हो सकता है। सवाल-जवाब 1. काल भैरव डांगोरिया बाबा आश्रम में क्या मामला सामने आया है? आश्रम के पुजारी गौरांग दास घने जंगल से आने वाले जंगली हाथियों को अपने हाथों से केले खिलाते हैं, जिसे लेकर वन विभाग ने नोटिस जारी किया है। 2. पुजारी गौरांग दास और हाथियों का संबंध कितने समय पुराना है? पुजारी और हाथियों के बीच यह अनूठा जुड़ाव पिछले लगभग छह वर्षों से बना हुआ है। 3. वन्यजीव विशेषज्ञ हाथियों को खाना खिलाने को चिंताजनक क्यों मान रहे हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों द्वारा भोजन मिलने से जंगली हाथियों का प्राकृतिक व्यवहार बदलता है और वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आने लगते हैं, जिससे संघर्ष का खतरा बढ़ता है। 4. वन विभाग ने क्या कदम उठाया है और नियम तोड़ने पर क्या सजा तय की है? कपिली वैली रेंज कार्यालय ने जंगली हाथियों को भोजन कराने के खिलाफ नोटिस जारी किया है और आदेश का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा है। https://trendkia.com/assam/assam-ke-kal-bhairav-dangoria-baba-ashram-men-jngali-hathiyon-ko-bhojana-dene-para-vana-vibhaga-sakhta-pujari-gauranga-das-ko-noti-16025 TrendKia — Har trend, sabse pehle.