असम के मानस नेशनल पार्क से हथिनी दुर्गा के गुप्त तबादले पर उठे गंभीर सवाल असम के मानस नेशनल पार्क से हथिनी दुर्गा को 7 सितंबर की रात कथित तौर पर केरल भेजे जाने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रावधानों पर सवाल खड़े हो गए हैं। असम के प्रसिद्ध मानस नेशनल पार्क से एक हथिनी को देर रात गुप्त रूप से बाहर ले जाए जाने के बाद वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त हो गया है। 7 सितंबर की रात दुर्गा नाम की इस हथिनी को एक वाहन पर लादकर ले जाया गया, जिससे इस पूरी प्रक्रिया की वैधता, प्रशासनिक अनुमति और जानवर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर हथिनी के गंतव्य और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की चुप्पी पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। देर रात वाहन से ले जाई गई हथिनी मानस नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र में कुल तीन हाथी रखे गए थे, जिनमें दुर्गा भी शामिल थी। 7 सितंबर की रात उसे पंजीकरण संख्या DD 01 A 9525 वाले एक बड़े ट्रक में लादा गया और कथित तौर पर केरल की दिशा में रवाना कर दिया गया। इस गुप्त आवाजाही की जानकारी मिलते ही पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने विरोध जताया है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि इस स्थानांतरण को किसने अधिकृत किया था और इसे वन्यजीव संरक्षण से जुड़े किन कानूनी प्रावधानों के तहत अंजाम दिया गया है। प्रशासनिक फेरबदल और 5 हाथियों के तबादले की योजना यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब काजीरंगा नेशनल पार्क से जुड़ी रहीं सोनाली घोष ने लगभग एक महीने पहले ही मानस नेशनल पार्क के डायरेक्टर पद का कार्यभार संभाला है। सूत्रों के अनुसार, दुर्गा का यह स्थानांतरण असम के 5 बंदी हाथियों को राज्य से बाहर भेजने की एक व्यापक योजना का हिस्सा है। इस सूची में दुर्गा के अलावा रूपसिंह, शिव, हीरालाल और बिजुली शामिल हैं। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट इन सभी 5 हाथियों को तमिलनाडु स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है, जिसको लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने लंबी दूरी की यात्रा के दौरान हाथियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की चेतावनी दी है। पशु अधिकार संगठन का कड़ा विरोध हाथियों के इस प्रस्तावित तबादले के खिलाफ 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनिमल राइट्स' (CRAR), इंडिया ने असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। CRAR के संस्थापक आलोक हिसारवाला गुप्ता ने मांग की है कि पांचों हाथियों के अंतर-राज्यीय स्थानांतरण पर तुरंत रोक लगाई जाए। गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हाथियों के वर्तमान मालिक देखभाल और रखरखाव में असमर्थ होने के कारण उन्हें सौंप रहे हैं, लेकिन इसका समाधान उन्हें दूर दराज के राज्यों में भेजना नहीं हो सकता। असम में ही पुनर्वास की मांग आलोक हिसारवाला गुप्ता ने असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से अपील की है कि हाथियों को हजारों किलोमीटर दूर तमिलनाडु भेजने के बजाय असम के भीतर ही मौजूद या प्रस्तावित हाथी देखभाल एवं पुनर्वास केंद्रों में समायोजित करने की संभावनाओं का आकलन किया जाए। संस्था का तर्क है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक और मूल पारिस्थितिक माहौल में बनाए रखना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए राज्य में ही उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। इसका आप पर असर पाठकों के लिए प्रभाव: बंदी वन्यजीवों के अंतर-राज्यीय स्थानांतरण और संरक्षण नियमों से जुड़े इस मामले का प्रभाव असम और पूरे देश के पर्यावरण तंत्र पर पड़ता है। • भारत में: बंदी हाथियों के एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरण के नियमों को लेकर देशभर के वन्यजीव प्रेमियों और कानूनी निकायों का ध्यान आकर्षित हुआ है। इससे अंतर-राज्यीय पशु परिवहन से जुड़े राष्ट्रीय दिशानिर्देशों और केंद्रीय नियमों की समीक्षा तेज हो सकती है। • असम में: मानस नेशनल पार्क और स्थानीय वन्यजीव अभयारण्यों के प्रबंधन पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। राज्य के नागरिक और पर्यावरण समूह स्थानीय स्तर पर ही हाथियों के पुनर्वास केंद्रों की स्थापना की मांग को मजबूती दे रहे हैं। • वन्यजीव कार्यकर्ताओं के लिए: पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही मांगने का आधार मिला है। इस मामले के जरिए निजी मालिकों द्वारा सौंपे जाने वाले हाथियों के भविष्य पर नीतिगत स्पष्टता मांगी जा रही है। • स्थानीय पर्यावरण संरक्षण पर: असम के प्राकृतिक जंगलों से हाथियों को बाहर भेजने के बजाय उन्हें स्थानीय संरक्षण केंद्रों में रखने से राज्य की जैव विविधता संतुलित रहेगी। इससे स्थानीय वन्यजीव पर्यटन और संरक्षण प्रयासों को दीर्घकालिक बल मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह क्यों हुआ: मानस नेशनल पार्क से हथिनी के स्थानांतरण के पीछे निजी मालिकों द्वारा देखभाल करने में असमर्थता व्यक्त करना और वन विभाग की अंतर-राज्यीय तबादला योजना मुख्य कारण रही है। • रखरखाव में असमर्थता: हाथियों के वर्तमान निजी मालिक उनके भारी खर्च और देखभाल का जिम्मा उठाने में असमर्थ हैं। इसी वजह से हाथियों को वन विभाग को सौंपा जा रहा है। • अंतर-राज्यीय तबादले की योजना: असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की योजना राज्य के 5 बंदी हाथियों (दुर्गा, रूपसिंह, शिव, हीरालाल, बिजुली) को तमिलनाडु के केंद्रों में स्थानांतरित करने की है। इसी प्रक्रिया के तहत दुर्गा को रवाना किया गया। • पारदर्शिता की कमी: वन विभाग द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया की सार्वजनिक घोषणा न करने और हस्तांतरण आदेशों को गुप्त रखने के कारण संरक्षणवादियों में संदेह उत्पन्न हुआ। • प्रशासनिक बदलाव: लगभग एक महीने पहले मानस नेशनल पार्क के निदेशक पद पर नया प्रभार लिया गया, जिसके बाद हाथियों के स्थानांतरण की प्रक्रियाओं में तेजी देखी गई। सवाल-जवाब 1. मानस नेशनल पार्क से किस हथिनी को स्थानांतरित किया गया है? मानस नेशनल पार्क से दुर्गा नाम की एक बंदी हथिनी को 7 सितंबर की रात ट्रक के जरिए स्थानांतरित किया गया। 2. हथिनी को ले जाने वाले वाहन का विवरण क्या है? दुर्गा को पंजीकरण संख्या DD 01 A 9525 वाले एक ट्रक में लादकर कथित तौर पर केरल की ओर भेजा गया। 3. असम से कुल कितने हाथियों को तमिलनाडु भेजने की योजना है? असम वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कुल 5 बंदी हाथियों- रूपसिंह, शिव, हीरालाल, दुर्गा और बिजुली को तमिलनाडु भेजने की योजना है। 4. हाथियों के स्थानांतरण का विरोध किस संगठन ने किया है? सेंटर फॉर RESEARCH ऑन एनिमल राइट्स (CRAR) और इसके संस्थापक आलोक हिसारवाला गुप्ता ने असम वन विभाग से इस स्थानांतरण को तुरंत रोकने की मांग की है। 5. मानस नेशनल पार्क की वर्तमान निदेशक कौन हैं? सोनाली घोष, जो पहले काजीरंगा नेशनल पार्क से जुड़ी थीं, उन्होंने लगभग एक महीने पहले मानस नेशनल पार्क के निदेशक का पद संभाला है। https://trendkia.com/assam/assam-ke-manasa-neshanala-parka-se-hathini-durga-ke-gupta-tabadale-para-uthe-gnbhira-savala-30405 TrendKia — Har trend, sabse pehle.