# असम के मंत्रियों को फील्ड दौरे से पहले स्थानीय विधायकों को सूचना देना अनिवार्य, हिमंत बिस्वा सरमा ने जारी किए निर्देश

> असम में अब मंत्रियों को किसी भी क्षेत्र में दौरे या सरकारी कार्यक्रम से पहले संबंधित विधायक को पूर्व सूचना देनी होगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंत्रियों और विधायकों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए यह निर्देश दिया है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-ke-mntriyon-ko-philda-daure-se-pahale-sthaniya-mlas-ko-suchana-dena-anivarya-himanta-biswa-sarma-ne-jari-kie-nirdesha-53804 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, हिमंत बिस्वा सरमा, असम सरकार, विधायक, प्रशासनिक निर्देश, गुवाहाटी

असम प्रशासन में मंत्रियों और स्थानीय विधायकों के बीच बेहतर कामकाजी तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को सभी मंत्रियों को एक औपचारिक संवाद भेजकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने फील्ड दौरों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और आधिकारिक गतिविधियों के बारे में संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायकों को पहले से सूचित करें। यह कदम उन स्थितियों को समाप्त करने के लिए उठाया गया है जहां मंत्रियों के दौरों की जानकारी स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को नहीं मिल पा रही थी।

## विधायकों को अनदेखा करने पर मुख्यमंत्री ने जताई असंतोष
जारी किए गए आधिकारिक पत्र में मुख्यमंत्री ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों के विधायकों को उनके इलाके में होने वाले मंत्री स्तरीय दौरों और सरकारी आयोजनों की समय पर जानकारी नहीं दी जा रही थी। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ मंत्रियों ने स्थानीय विधायकों को भरोसे में लिए बिना अथवा उन्हें शामिल किए बिना ही कई इलाकों का दौरा पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की इस प्रकार की अनदेखी प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से उचित नहीं है।

## सार्वजनिक आयोजनों में आमंत्रण और शिष्टाचार सूचना का नियम
मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को परामर्श दिया कि वे अपने दौरों की पूर्व सूचना संबंधित विधायकों को अवश्य भेजें। इसके साथ ही विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होने वाले सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी समारोहों में स्थानीय विधायकों को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विभागीय बैठक या आंतरिक समीक्षा सत्र में विधायकों की प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक न भी हो, तब भी शिष्टाचार के नाते उन्हें इन गतिविधियों की जानकारी पहले ही दे दी जानी चाहिए ताकि वे अपने क्षेत्र में प्रशासनिक हलचलों से पूरी तरह अवगत रहें।

## निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर बेहतर तालमेल का लक्ष्य
इस नई व्यवस्था को लागू करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के मंत्रियों और स्थानीय स्तर पर जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों के बीच परस्पर समन्वय को मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इस व्यवस्था के पालन से सरकारी दौरों और आधिकारिक आयोजनों का संचालन अधिक सुचारू और प्रभावी ढंग से हो सकेगा। खासकर निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर जब मंत्री और विधायक मिलकर काम करेंगे, तो सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की निगरानी अधिक पारदर्शी तरीके से की जा सकेगी।

## इसका आप पर असर
इस प्रशासनिक निर्देश से राज्य के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और जनसमस्याओं के समाधान में तेजी आएगी।

- **असम में:** आम नागरिकों के स्थानीय विधायकों को अब अपने क्षेत्र में आने वाले मंत्रियों और सरकारी कार्यक्रमों की पूरी जानकारी पहले से होगी। इससे स्थानीय लोग अपने क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के माध्यम से मंत्रियों के समक्ष बुनियादी समस्याओं को अधिक प्रभावी ढंग से उठा सकेंगे।
- **भारत में:** निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी प्रशासनिक तालमेल का उदाहरण बन सकता है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि स्थानीय स्तर पर चुनी गई विधायिका को शासन के निर्णयों में अलग-थलग न किया जाए।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** मंत्रियों के दौरों की जानकारी सार्वजनिक होने से स्थानीय स्तर पर विभागों की कार्यशैली अधिक पारदर्शी बनेगी। स्थानीय विधायक विकास योजनाओं और आधिकारिक समीक्षा बैठकों की स्थिति पर करीबी नजर रख सकेंगे।
- **सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन:** निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर होने वाले आधिकारिक आयोजनों में समन्वय की कमी दूर होगी। इससे सरकारी कार्यक्रमों का संचालन बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक टकराव के सुचारू रूप से पूरा होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह निर्णय उन शिकायतों और रिपोर्टों के बाद लिया गया, जिनमें मंत्रियों के औचक या बिना सूचना के दौरों के कारण प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल बिगड़ रहा था।

- **विधायकों की अनदेखी:** राज्य के कई विधायकों ने यह अनुभव किया कि उनके अपने क्षेत्रों में मंत्रियों के सरकारी कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। इस स्थिति से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों में असंतोष उत्पन्न हुआ।
- **समीक्षा के दौरान सामने आई खामियां:** आंतरिक समीक्षा में मुख्यमंत्री ने पाया कि कुछ मंत्रियों ने स्थानीय विधायकों को सूचित किए बिना ही फील्ड दौरे निपटा लिए थे। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए शुक्रवार को सभी मंत्रियों को औपचारिक पत्र भेजना जरूरी समझा गया।
- **प्रोटोकॉल का अभाव:** आधिकारिक समीक्षा बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में विधायकों की उपस्थिति या पूर्व सूचना को लेकर कोई स्पष्ट मानक नहीं अपनाया जा रहा था। अब शिष्टाचार के तहत सूचना देना अनिवार्य बनाकर इस अनिश्चितता को दूर किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. असम के मुख्यमंत्री ने राज्य के मंत्रियों को क्या निर्देश दिया है?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे अपने फील्ड दौरों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और आधिकारिक व्यस्तताओं की सूचना स्थानीय विधायकों को पहले से दें।

### 2. मुख्यमंत्री ने यह कदम क्यों उठाया?
यह निर्देश इसलिए जारी किया गया क्योंकि कई विधायकों ने शिकायत की थी कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले मंत्रियों के दौरों की जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही थी।

### 3. क्या विधायकों को सभी विभागीय बैठकों में भाग लेना अनिवार्य किया गया है?
नहीं, जिन बैठकों में विधायकों की सीधी भागीदारी आवश्यक नहीं है, उनमें भी शिष्टाचार के तौर पर उन्हें पूर्व सूचना देना अनिवार्य किया गया है।

### 4. सार्वजनिक कार्यक्रमों के संबंध में मंत्रियों के लिए क्या नियम है?
मंत्रियों को अपने दौरों की अग्रिम सूचना देने के साथ-साथ स्थानीय विधायकों को निर्वाचन क्षेत्र में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में आमंत्रित करना होगा।

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