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  "title": "असम के पूर्व मंत्री सिद्दीक अहमद का 63 साल की उम्र में निधन, कैंसर से जूझ रहे थे वरिष्ठ कांग्रेस नेता",
  "summary": "असम सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और चार बार के विधायक सिद्दीक अहमद का 63 वर्ष की आयु में श्रीभूमि स्थित आवास पर कैंसर की लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।",
  "content": "असम के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री सिद्दीक अहमद का रविवार सुबह निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे और काफी समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निजी सचिव साले अहमद के अनुसार, उन्होंने श्रीभूमि जिले के बारोईग्राम स्थित अपने निजी आवास पर सुबह लगभग 8 बजे अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनकी पत्नी अनिमा बेगम, तीन बेटे और एक बेटी हैं। दक्षिण असम के कद्दावर नेताओं में शुमार अहमद के जाने से क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।\n\nकरीमगंज दक्षिण से चार बार तय किया विधानसभा का सफर\nसिद्दीक अहमद ने दक्षिणी असम की राजनीति में अपनी एक मजबूत और विशिष्ट पहचान बनाई थी। वह करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कई बार जनता के प्रतिनिधि चुने गए। चुनावी राजनीति में उनका पदार्पण वर्ष 2001 में हुआ था, जब उन्होंने समता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमाई और शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2006 के विधानसभा चुनावों में वह एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे थे।\n\n \nनिर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव बेहद फलदायी रहा और उन्होंने वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में करीमगंज दक्षिण सीट पर फिर से जीत हासिल की। अपनी जमीनी पकड़ की बदौलत उन्होंने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी इस निर्वाचन क्षेत्र पर अपना परचम लहराया। इस मुकाबले में अहमद ने असम गण परिषद (एजीपी) के प्रत्याशी अज़ीज़ अहमद खान को पराजित कर करीमगंज दक्षिण से अपनी चौथी चुनावी जीत दर्ज की थी।\n\nतरुण गोगोई सरकार में संभाले अहम मंत्रालय\nअहमद असम में तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का एक प्रमुख चेहरा थे। उन्होंने राज्य सरकार में कई अहम प्रशासनिक और नीतिगत जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2011 में विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दायित्व सौंपा गया था, जहां उन्होंने सहकारिता और सीमा क्षेत्र विकास विभागों का कामकाज देखा।\n\nप्रशासनिक कौशल और पार्टी में उनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2015 में उन्हें पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया। कैबिनेट रैंक मिलने के बाद अहमद को उद्योग एवं वाणिज्य, ऊर्जा, और सार्वजनिक उद्यम जैसे भारी-भरकम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन मंत्रालयों के जरिए उन्होंने असम के औद्योगिक ढांचे और बुनियादी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।\n\nराजनीतिक मतभेदों से परे मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि\nसिद्दीक अहमद के देहांत पर पूरे असम के राजनीतिक दलों और नेताओं ने गहरा दुख प्रकट किया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उनके साथ अपने पुराने रिश्तों को याद किया। मुख्यमंत्री ने लिखा, \"मेरे कई वर्षों के प्रिय सहयोगी श्री सिद्दीक अहमद साहब के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है।\"\n\nमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर अहमद ने सदैव जनता के कल्याण को सबसे आगे रखा और मंत्री के रूप में अपने विभागों का संचालन पूरी पेशेवर कुशलता के साथ किया। सरमा ने उल्लेख किया कि वे भले ही अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और दलों से जुड़े रहे, लेकिन उनके आपसी संबंध राजनीति की सीमाओं से परे थे और उन्होंने जीवन के कठिन चरणों को साथ मिलकर देखा था। उन्होंने कहा कि अहमद के जाने से श्रीभूमि के सामाजिक जीवन और असम के प्रशासनिक जगत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है, साथ ही उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।\n\nइसका आप पर असर\nवरिष्ठ नेता सिद्दीक अहमद के निधन से दक्षिणी असम के राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी ने पूर्वोत्तर भारत में एक अनुभवी अल्पसंख्यक चेहरे और जमीनी रणनीतिकार को खो दिया है। इससे आने वाले संगठनात्मक फैसलों में पार्टी को नए स्थानीय नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में काम करना होगा।\n• असम में: श्रीभूमि और करीमगंज दक्षिण क्षेत्र में एक अनुभवी और मजबूत जनप्रतिनिधि की कमी महसूस होगी। दशकों से स्थानीय लोगों की समस्याएं उठाने वाले नेता के जाने से क्षेत्र के प्रशासनिक संवाद और स्थानीय विकास योजनाओं की प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसिद्दीक अहमद लंबे समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसके चलते उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया और अंततः उनका देहांत हो गया।\n\n• सीधा कारण: पूर्व मंत्री सिद्दीक अहमद काफी वक्त से कैंसर से जूझ रहे थे। इसी जानलेवा बीमारी के कारण आई शारीरिक जटिलताओं की वजह से रविवार सुबह उनका निधन हुआ।\n• घटनाक्रम: रविवार सुबह लगभग 8 बजे श्रीभूमि के बारोईग्राम में स्थित उनके अपने आवास पर उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निजी सचिव साले अहमद ने आधिकारिक तौर पर उनके निधन की पुष्टि की।\n• राजनीतिक पृष्ठभूमि: वह कई दशकों तक लगातार सक्रिय रहे और चार बार विधायक चुने गए। खराब स्वास्थ्य के बावजूद वे क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी और समर्थकों के साथ जुड़े रहे थे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सिद्दीक अहमद कौन थे?\nसिद्दीक अहमद असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री थे, जिन्होंने करीमगंज दक्षिण क्षेत्र का चार बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया।\n\n2. सिद्दीक अहमद का निधन कब और कहां हुआ?\nउनका निधन रविवार सुबह लगभग 8 बजे असम के श्रीभूमि जिले के बारोईग्राम स्थित उनके आवास पर हुआ।\n\n3. सिद्दीक अहमद के निधन का मुख्य कारण क्या था?\nवह लंबे समय से कैंसर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और इसी बीमारी से लड़ते हुए उनका देहांत हुआ।\n\n4. उन्होंने असम सरकार में कौन से प्रमुख मंत्रालय संभाले थे?\nउन्होंने तरुण गोगोई सरकार में सहकारिता, सीमा क्षेत्र विकास, उद्योग एवं वाणिज्य, ऊर्जा तथा सार्वजनिक उद्यम जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला था।\n\n5. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके निधन पर क्या कहा?\nमुख्यमंत्री ने उन्हें कई वर्षों का प्रिय सहयोगी बताया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनके बीच गहरा मानवीय संबंध था।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-13",
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