# असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने तिनसुकिया में नशा मुक्त भारत संकल्प पदयात्रा का नेतृत्व किया

> असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने तिनसुकिया में नशा विरोधी पदयात्रा की अगुवाई की और नशीले पदार्थों के खिलाफ एक मजबूत जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-ke-rajyapala-lakshman-prasad-acharya-ne-tinsukia-men-nasha-mukta-bharata-snkalpa-padayatra-ka-netritva-kiya-36899 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, तिनसुकिया, लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, नशा मुक्त भारत, पदयात्रा, असम सरकार

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने मंगलवार को तिनसुकिया जिले में नशीले पदार्थों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित एक बड़े पैदल मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने राज्य भर में नशीले पदार्थों के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देकर इसे एक सशक्त सामाजिक आंदोलन का रूप देने पर जोर दिया। यह पदयात्रा राज्यपाल के उस व्यापक क्षेत्रीय संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके जरिए नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ समाज को जागरूक करने और नशा मुक्त वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

## कछार से शुरू होकर ऊपरी असम तक पहुंची पदयात्रा
राज्यपाल का यह पदयात्रा अभियान सबसे पहले कछार जिले से शुरू हुआ था। इसके बाद यह यात्रा श्रीभूमि से गुजरी और फिर ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में पहुंची। तिनसुकिया में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने 'नशा मुक्त भारत संकल्प पदयात्रा' को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों स्कूली छात्रों, स्थानीय निवासियों और आम नागरिकों के साथ तिनसुकिया कॉलेज से लेकर महात्मा गांधी पार्क तक पैदल मार्च किया। इस पैदल मार्च से पहले तिनसुकिया के जिला आयुक्त सुमित सत्तवान ने वहां मौजूद सभी लोगों को 'नशा मुक्त भारत संकल्प' की शपथ दिलाई।

## विरासत, आत्मसंयम और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी
पदयात्रा की शुरुआत से पहले तिनसुकिया कॉलेज में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने इस जिले को असम की समृद्ध विरासत, पहचान और औद्योगिक क्षमता का एक प्रमुख प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा मुक्त भारत' के संकल्प के अनुरूप इस अभियान को एक सच्चे जनआंदोलन के तौर पर मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने आत्मसंयम, अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये मूल्य भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत धरोहर में गहराई से समाए हुए हैं।

## सरकारी नीतियों और युवा कल्याण योजनाओं की सराहना
राज्यपाल ने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए कानून का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। इसके साथ ही एक नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज के संगठनों और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता होगी। उन्होंने असम सरकार की नशीले पदार्थों के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति और नशाखोरी पर अंकुश लगाने के सक्रिय कदमों की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने 'निजुत मोइना' और 'निजुत बाबू' जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की पहल युवाओं को सशक्त बनाती हैं तथा उन्हें एक उद्देश्यपूर्ण और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।

## इसका आप पर असर
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और स्थानीय समुदायों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाना और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

- **भारत में:** केंद्र सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत देश भर में सामुदायिक जागरूकता और कड़े प्रशासनिक कदमों को गति दी जा रही है। इससे शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज को युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का मंच मिलता है।
- **असम में:** राज्य सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति और कछार से तिनसुकिया तक चले इस व्यापक अभियान से स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ेगी। निजुत मोइना और निजुत बाबू जैसी राज्य योजनाओं के जरिए युवाओं को पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों से जोड़कर नशे की लत से बचाने में मदद मिलेगी।
- **अभिभावकों और युवाओं के लिए:** परिवारों और शिक्षण संस्थानों से अपील की गई है कि वे बच्चों के आचरण पर ध्यान दें और किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की तुरंत सूचना दें। इससे परिवारों को अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने और सही मार्गदर्शन प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
- **नागरिक समाज के लिए:** स्थानीय संगठनों और स्वयंसेवकों को प्रशासन के साथ मिलकर नशा विरोधी अभियानों और पुनर्वास प्रयासों में सीधे भागीदारी करने का अवसर मिलेगा। इससे मोहल्ला और गांव स्तर पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ सख्त निगरानी सुनिश्चित होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
असम में मादक पदार्थों की तस्करी और युवाओं में बढ़ती लत की समस्या से निपटने के लिए प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ व्यापक जनचेतना की जरूरत महसूस की जा रही थी।

- **क्षेत्रीय संवेदनशीलता और लत का खतरा:** पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में अवैध मादक पदार्थों के आवागमन और तस्करी की चुनौतियां लंबे समय से बनी रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए समाज के हर वर्ग को इस खतरे के प्रति सचेत करने के लिए यह पदयात्रा आयोजित की गई।
- **व्यापक संपर्क अभियान का चरण:** राज्यपाल ने कछार और श्रीभूमि से शुरू करते हुए डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया तक एक सतत जनजागरूकता अभियान की रूपरेखा तैयार की थी। इसका मकसद केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित न रहकर सीधे आम नागरिकों से संवाद स्थापित करना था।
- **कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक समर्थन की जरूरत:** केवल पुलिसिया धरपकड़ से पूरी तरह समाधान संभव नहीं होता जब तक कि परिवार और स्थानीय समाज मिलकर युवाओं को नैतिक संबल न दें। इसी वजह से नैतिक मूल्यों, आत्मसंयम और संकल्प पदयात्रा के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. तिनसुकिया में पदयात्रा का नेतृत्व किसने किया?
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने तिनसुकिया में इस नशा विरोधी पदयात्रा की अगुवाई की।

### 2. यह पदयात्रा तिनसुकिया में कहां से कहां तक निकाली गई?
यह पदयात्रा तिनसुकिया कॉलेज से शुरू होकर महात्मा गांधी पार्क तक निकाली गई।

### 3. राज्यपाल का यह जागरूकता अभियान किन-किन जिलों से होकर गुजरा?
यह अभियान कछार से शुरू हुआ और श्रीभूमि, डिब्रूगढ़ होते हुए तिनसुकिया तक पहुंचा।

### 4. पदयात्रा से पहले प्रतिभागियों को शपथ किसने दिलाई?
तिनसुकिया के जिला आयुक्त सुमित सत्तवान ने पदयात्रा से पहले नशा मुक्त भारत संकल्प की शपथ दिलाई।

### 5. राज्यपाल ने युवाओं के कल्याण के लिए किन योजनाओं का उल्लेख किया?
उन्होंने 'निजुत मोइना' और 'निजुत बाबू' जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया।

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