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  "type": "article",
  "title": "असम के युवाओं के लिए खुलेंगे विदेश में नौकरी के रास्ते, राज्य में बनेगा अंतरराष्ट्रीय स्किल सेंटर",
  "summary": "असम सरकार और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच एक विशेष अंतरराष्ट्रीय स्किल केंद्र शुरू करने को लेकर समझौता हुआ है, जिससे स्थानीय युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार मिल सकेगा।",
  "content": "पूर्वोत्तर के युवाओं को विदेशी कंपनियों में करियर बनाने के बेहतर अवसर दिलाने के मकसद से असम में एक खास पहल शुरू होने जा रही है। राज्य प्रशासन ने केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिलकर असम में एक स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित करने का फैसला किया है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद आधुनिक औद्योगिक मांग के मुताबिक युवाओं को ट्रेंड करना और दुनिया भर के नौकरी बाजारों तक उनकी पहुंच को आसान बनाना है।\n\nपर्यटन एवं आतिथ्य सम्मेलन में बनी सहमति\nइस पूरे समझौते को गुवाहाटी के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित नॉर्थईस्ट टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर औपचारिक रूप दिया गया। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इस खास सम्मेलन में उद्योग जगत और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का एजेंडा पूर्वोत्तर के नौजवानों को पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में वैश्विक पैमानों के अनुसार तैयार करने पर केंद्रित रहा।\n\nग्लोबल सर्टिफिकेट और आधुनिक ट्रेनिंग पर रहेगा जोर\nप्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्किल केंद्र को एक नए और संशोधित ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को ऐसे प्रमाणपत्र दिए जाएंगे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होगी। इसके अलावा, विदेशी नियोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे ताकि छात्रों को विदेशी कंपनियों में सीधे रोजगार हासिल करने के सुरक्षित रास्ते मिल सकें।\n\nपीएम-सेतु पहल के तहत बने क्लस्टर की शुरुआत\nकार्यक्रम के दौरान कौशल विकास तंत्र को मजबूती देने के लिए पीएम-सेतु पहल के तहत एक औद्योगिक क्लस्टर की भी घोषणा हुई। इस गठबंधन में केंद्रीय मंत्रालय और असम सरकार के अलावा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हुए हैं। सार्वजनिक उपक्रमों और सरकार का यह साझा प्रयास स्थानीय युवाओं के तकनीकी प्रशिक्षण में व्यावहारिक औद्योगिक अनुभवों को जोड़ेगा।\n\nनेताओं ने साझेदारी और संभावनाओं पर दिया जोर\nअसम के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने इस अवसर पर कहा कि वैश्विक अवसरों को भुनाने के लिए युवाओं का उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने पूर्वोत्तर के युवाओं की प्रतिभा को रेखांकित करते हुए सरकारों, कॉरपोरेट कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने की अपील की। वहीं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने पूर्वोत्तर के स्किल इकोसिस्टम को मजबूत करने और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलने की आवश्यकता पर बल दिया।\n\nवैश्विक गतिशीलता पर विशेष कार्यशाला\nसम्मेलन में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को लेकर एक तकनीकी वर्कशॉप भी संपन्न हुई। इस सत्र में विशेषज्ञों ने वैश्विक स्किल मानकों, विदेशी बाजारों की कामकाजी जरूरतों और विदेश में सुरक्षित रोजगार के व्यावहारिक तौर-तरीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।\n\nइसका आप पर असर\nइस केंद्र की स्थापना से पूर्वोत्तर के युवाओं को विदेश में रोजगार पाने के लिए सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण और मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र मिलेंगे।\n\n• पूर्वोत्तर में: स्थानीय युवाओं को होटल, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में वैश्विक मानकों की ट्रेनिंग मिलेगी। इससे विदेश में नौकरियों के लिए होने वाली धोखाधड़ी और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी।\n• असम में: राज्य के युवाओं को विदेशी कंपनियों में नौकरी के अवसर मिलेंगे जिससे उनकी आय में भारी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा नुमालीगढ़ रिफाइनरी और ऑयल इंडिया जैसे संस्थानों के सहयोग से युवाओं को उद्योगों में सीधे व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।\n• भारत में: भारत के कुशल कार्यबल की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग बढ़ेगी। सरकार द्वारा प्रमाणित प्रशिक्षित युवा देश के लिए अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सक्षम होंगे।\n• आवेदकों के लिए: युवाओं को वैध और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के जरिए विदेश जाने के रास्ते उपलब्ध होंगे। इससे युवाओं का करियर सुरक्षित रहेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके कौशल को मान्यता मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपूर्वोत्तर के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र और विदेशी मानकों के प्रशिक्षण के अभाव में उन्हें विदेशों में रोजगार मिलने में कठिनाई आती रही है। इसी अंतर को पाटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर इस पहल की शुरुआत की है।\n\n• कौशल मानकों का अंतर: विदेशी कंपनियों को विशेष तकनीकी और सेवा मानकों की आवश्यकता होती है जो पारंपरिक प्रशिक्षण में अक्सर शामिल नहीं होते। इस नए केंद्र के जरिए वैश्विक मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे।\n• पर्यटन क्षेत्र की बढ़ती मांग: वैश्विक स्तर पर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल कामगारों की भारी मांग पैदा हुई है। पूर्वोत्तर के युवाओं के पास इस क्षेत्र के लिए स्वाभाविक प्रतिभा है, जिसे सही ट्रेनिंग की दरकार थी।\n• औद्योगिक भागीदारी की कमी: पूर्व में स्किल योजनाओं में बड़े उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित थी। इसे सुधारने के लिए ऑयल इंडिया और नुमालीगढ़ रिफाइनरी जैसी बड़ी कंपनियों को पीएम-सेतु पहल से जोड़ा गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असम में कौन सा नया स्किल सेंटर बनने जा रहा है?\nअसम में युवाओं को विदेशी नौकरियों के लिए प्रशिक्षित करने हेतु एक स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित किया जाएगा।\n\n2. इस केंद्र की स्थापना को लेकर किनके बीच समझौता हुआ है?\nयह समझौता असम सरकार और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के बीच हुआ है।\n\n3. इस समझौते की घोषणा किस कार्यक्रम में की गई?\nइस समझौते को गुवाहाटी के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित नॉर्थईस्ट टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल कॉन्क्लेव 2026 में अंतिम रूप दिया गया।\n\n4. पीएम-सेतु पहल के तहत कौन सी कंपनियां साझीदार बनी हैं?\nइस पहल में केंद्र और राज्य सरकार के साथ राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, ऑयल इंडिया लिमिटेड और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड शामिल हैं।\n\n5. इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य प्रमाणपत्र प्रदान कर विदेश में रोजगार के अवसर दिलाना है।",
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  "publishedAt": "2026-11-03",
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