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  "type": "article",
  "title": "असम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भारी कमी, 25% से ज्यादा पद खाली",
  "summary": "डिब्रूगढ़ के असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। संस्थान में 434 स्वीकृत पदों में से 121 पद खाली पड़े हैं।",
  "content": "गुवाहाटी: डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। ऊपरी असम के इस प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र पर डॉक्टरों, नर्सों और सहायक कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मौजूदा कर्मियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।\n\nडॉक्टरों और कर्मचारियों के खाली पद\n\nएक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 434 स्वीकृत पद हैं जिनमें से 121 पद फिलहाल खाली चल रहे हैं और अभी केवल 313 डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह रिक्तियां कुल 23 विभागों को प्रभावित कर रही हैं, जबकि जूनियर डॉक्टरों की कमी के कारण ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सा स्टाफ की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।\n\nस्थानांतरण और नई नियुक्तियों की स्थिति\n\nतिनसुकिया और लखीमपुर में नए खुले मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के तबादले के बाद यहां की स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन तबादलों की वजह से जो पद खाली हुए थे, उन पर अभी तक नई नियुक्तियां नहीं की जा सकेंगी क्योंकि उन पदों को भरा नहीं गया है।\n\nनर्सिंग स्टाफ और बिस्तरों का असंतुलन\n\nअस्पताल में केवल डॉक्टरों ही नहीं बल्कि नर्सिंग स्टाफ की भी भारी किल्लत बनी हुई है। लगभग 2,000 बिस्तरों वाले असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इस समय सिर्फ 449 नर्सें ही तैनात हैं। दशकों के दौरान यह अंतर काफी ज्यादा गहरा गया है। जब साल 1947 में इस संस्थान को मेडिकल स्कूल से अपग्रेड करके मेडिकल कॉलेज बनाया गया था, तब यहां करीब 900 बिस्तर थे और लगभग इतने ही नर्सिंग स्टाफ भी मौजूद थे।\n\nहॉस्पिटल की बिस्तर क्षमता तो दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले नर्सों की कुल संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। इस भारी असंतुलन की वजह से नर्सों को अत्यधिक संख्या में मरीजों की देखभाल करनी पड़ रही है। रात की कुछ शिफ्टों के दौरान स्थिति यह हो जाती है कि एक अकेली नर्स को 150 से 200 तक मरीजों की देखभाल और निगरानी संभालनी पड़ सकती है, जिससे मरीजों की सही तरीके से मॉनिटरिंग और व्यक्तिगत देखभाल पर मिलने वाले समय को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो रही हैं।\n\nअन्य कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे पर असर\n\nडॉक्टरों और नर्सों के अलावा ग्रेड IV कर्मचारियों समेत अन्य श्रेणी के स्टाफ के पद भी खाली पड़े हैं। मैनपावर की इस संयुक्त कमी ने मौजूदा कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं क्योंकि अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बहुत ज्यादा बनी हुई है। असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ऊपरी असम के लिए एक प्रमुख रेफरल सेंटर है और यहां कई जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे कि अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।\n\nडायग्नोस्टिक सेवाओं में तकनीकी बाधाएं\n\nकर्मचारियों की कमी के अलावा अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें अक्सर खराब होती रहती हैं। जब ये जरूरी जांच उपकरण काम नहीं करते हैं, तो विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से ताल्लुक रखने वाले मरीजों को मजबूरी में बाहर प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ता है, जहां इन स्कैन के लिए उन्हें हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं।\n\nस्वास्थ्य नेटवर्क का विस्तार और चुनौतियां\n\nअसम मेडिकल कॉलेज में ये कमियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब राज्य सरकार अपने मेडिकल कॉलेजों और हेल्थकेयर सुविधाओं के नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है। हालांकि, डिब्रूगढ़ के इस संस्थान पर किफायती और स्पेशलाइज्ड इलाज के लिए निर्भर रहने वाले आम मरीजों के लिए स्टाफ और डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के ये गैप अब भी बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअसम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी से डिब्रूगढ़ और आसपास के इलाकों के मरीजों को समय पर इलाज मिलने में दिक्कत हो सकती है।\n\n• भारत में: देश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी एक बड़ी व्यवस्थागत समस्या बनी हुई है। इससे मरीजों को अक्सर विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख के लिए लंबी कतारों और देरी का सामना करना पड़ता है।\n\n• डिब्रूगढ़ में: स्थानीय मरीजों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले लोगों को एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांच के लिए बाहर के प्राइवेट सेंटरों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। रात की शिफ्ट में एक नर्स पर 150 से 200 मरीजों का बोझ होने के कारण व्यक्तिगत देखभाल प्रभावित हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअसम मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की यह गंभीर किल्लत प्रशासनिक फेरबदल और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बीच असंतुलन के कारण पैदा हुई है।\n\n• डॉक्टरों के तबादले: तिनसुकिया और लखीमपुर में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और वहां डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद खाली हुए पदों को समय पर नहीं भरा गया।\n\n• नर्सिंग स्टाफ की पुरानी संख्या: साल 1947 में जब संस्थान को मेडिकल कॉलेज बनाया गया था, तब बिस्तरों की संख्या लगभग 900 थी जो अब बढ़कर दोगुनी हो चुकी है, लेकिन नर्सों की संख्या पिछले दशकों में लगभग वैसी ही बनी हुई है।\n\n• डायग्नोस्टिक मशीनों की खराबी: एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनें पुरानी या रखरखाव के अभाव में बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे अस्पताल की आंतरिक जांच सेवाएं बाधित होती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असम मेडिकल कॉलेज कहाँ स्थित है?\nअसम मेडिकल कॉलेज असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित है।\n\n2. अस्पताल में डॉक्टरों के कितने पद खाली हैं?\nअस्पताल में डॉक्टरों के स्वीकृत 434 पदों में से 121 पद खाली हैं और 313 डॉक्टर तैनात हैं।\n\n3. नर्सिंग स्टाफ की क्या स्थिति है?\nलगभग 2,000 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में वर्तमान में केवल 449 नर्सें ही कार्यरत हैं।\n\n4. इस कमी का मुख्य कारण क्या है?\nतिनसुकिया और लखीमपुर के नए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद खाली पदों का नहीं भरा जाना इसका मुख्य कारण है।\n\n5. कौन-सी डायग्नोस्टिक मशीनें अक्सर खराब होती हैं?\nअस्पताल की एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें अक्सर खराब होने की समस्या से जूझती हैं।\n\n6. यह अस्पताल किन अन्य राज्यों के मरीजों की देखभाल करता है?\nयह संस्थान अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड सहित कई पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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