असम में 31 अक्टूबर तक भाजपा का जिला स्तरीय प्रदर्शन, हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर साधा निशाना असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए राज्यभर के जिला मुख्यालयों में 31 अक्टूबर तक शांतिपूर्ण रैलियों का ऐलान किया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्यभर के सभी जिला मुख्यालयों में भारतीय जनता पार्टी की ओर से शांतिपूर्ण जन रैलियों के आयोजन का ऐलान किया है। यह प्रदर्शन 31 अक्टूबर तक लगातार जारी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। चुनावी नतीजों पर दोहरे मापदंड का आरोप मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनावी फैसलों को केवल अपने निजी स्वार्थ के चश्मे से देखती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस चुनाव हारती है, तो वह चुनावी प्रणाली पर सवाल खड़े करने लगती है, जबकि अपनी जीत पर पूरी प्रक्रिया को सही मान लेती है। हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री चुने जाते हैं तो राहुल गांधी इसे हेरफेर का परिणाम बताते हैं, लेकिन जब वह खुद संसद सदस्य बनते हैं और बाद में विपक्ष के नेता पद पर बैठते हैं, तो उस चुनाव की निष्पक्षता पर कोई सवाल नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया पूरी तरह स्पष्ट है और लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। असम और केरल के नतीजों की तुलना चुनावी परिणामों पर विपक्षी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस की प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब असम की जनता मतदान करती है और परिणाम सामने आते हैं, तो कांग्रेस उन परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर देती है। वहीं दूसरी ओर, जब केरल में मतदान होता है और परिणाम उसके पक्ष में दिखते हैं, तो पार्टी उनका खुले दिल से स्वागत करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लिए लोकतंत्र का अस्तित्व तभी तक मान्य रहता है जब तक चुनाव परिणाम में उसे जीत हासिल हो रही हो। हार की स्थिति में जनादेश का अनादर करना पार्टी का पुराना तरीका बन चुका है। न्यायपालिका पर दबाव बनाने का दावा हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के सर्वोच्च न्यायालय जाने के कदम पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद भी न्यायालय की चौखट पर जाना न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश है। संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की चुनावी निराशाओं के आगे देश की संस्थाओं को जवाबदेह या मजबूर नहीं बनाया जा सकता। न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक निकायों को अपनी स्वतंत्र स्थिति में काम करने देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। रैलियों के तीन मुख्य मुद्दे असम में आयोजित होने वाले इन व्यापक कार्यक्रमों के उद्देश्य स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा कार्यकर्ता राज्य की जनता को कांग्रेस के तीन प्रमुख कदमों के प्रति जागरूक करेंगे। • संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा: रैलियों के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए ब्लैकमेल करने की कोशिशों का कड़ा विरोध होगा। • मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर का विरोध करके अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने के कथित प्रयासों का खुलासा जनता के बीच किया जाएगा। • जनता के जनादेश का सम्मान: चुनाव परिणामों और जनभावनाओं को कमजोर करने की हर राजनीतिक कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला किया जाएगा। 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का समर्थन मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि असम की जनता ऐसी राजनीति पर खामोश नहीं बैठेगी। मंगलवार से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस राज्यव्यापी अभियान में पार्टी कार्यकर्ता और आम नागरिक शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस अभियान के साथ ही भाजपा कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और वर्ष 2047 तक भारत को एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराएंगे। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि जनता का जनादेश हमेशा सम्मान का हकदार है और देश की सभी संस्थाओं की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहनी चाहिए, क्योंकि इनमें से किसी को भी राजनीतिक सुविधा का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता। इसका आप पर असर असम में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आने से राज्यभर के जिला मुख्यालयों में कानून-व्यवस्था और यातायात पर असर पड़ सकता है। • असम में: राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 31 अक्टूबर तक रैलियां आयोजित की जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को प्रदर्शन स्थलों के आस-पास प्रशासनिक ट्रैफिक रूट का ध्यान रखना होगा। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी शुचिता पर राजनीतिक बहस और तेज होगी। इससे चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक सत्यापन नियमों पर मतदाताओं की जागरूकता बढ़ेगी। • राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए: भाजपा संगठन सभी जिलों में कैडर को सक्रिय कर रहा है। आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों में भारी बढ़ोतरी होगी। • प्रशासनिक तैयारी: जिला स्तर पर पुलिस और सुरक्षा बलों को शांतिपूर्ण रैलियों के लिए सुरक्षा प्रबंध कड़े रखने होंगे। संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा निगरानी बढ़ाई जाएगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव चुनावी परिणामों की स्वीकार्यता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच बढ़ते तनाव का नतीजा है। • संवैधानिक संस्थाओं पर विवाद: कांग्रेस पार्टी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाने को सत्ताधारी दल अनुचित दबाव के रूप में देख रहा है। राहुल गांधी द्वारा मुख्य न्यायाधीश से मिलने के प्रयास को लेकर असम के मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया। • मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा: असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक दलों में गंभीर मतभेद हैं। भाजपा का दावा है कि इसका विरोध घुसपैठियों को संरक्षण देने के लिए किया जा रहा है। • चुनावी बयानों का टकराव: राष्ट्रीय चुनावों के बाद विपक्ष द्वारा जनादेश और मतगणना प्रक्रिया पर बार-बार उठाए जा रहे सवालों के जवाब में भाजपा जनसमर्थन जुटाने की रणनीति अपना रही है। सवाल-जवाब 1. असम में भाजपा कब तक रैलियों का आयोजन करेगी? असम भाजपा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 31 अक्टूबर तक शांतिपूर्ण जन रैलियों का आयोजन करेगी। 2. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए हैं? उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी नतीजों पर दोहरा रवैया अपनाने और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। 3. हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी को लेकर क्या टिप्पणी की? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के निर्वाचन को हेरफेर बताते हैं लेकिन अपनी खुद की जीत और नेता प्रतिपक्ष बनने पर सवाल नहीं उठाते। 4. रैलियों के तीन मुख्य मुद्दे क्या हैं? संवैधानिक संस्थाओं को ब्लैकमेल करने से रोकना, मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध कर घुसपैठियों को बचाने की कोशिशों को उजागर करना और जनादेश का सम्मान करना। 5. एसआईआर (SIR) का पूरा नाम क्या है जिसका उल्लेख इस विवाद में हुआ? एसआईआर का अर्थ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण) है, जो मतदाता सूचियों से जुड़ा एक प्रशासनिक कार्यक्रम है। https://trendkia.com/assam/assam-men-31-aktubara-taka-bjp-ka-jila-stariya-pradarshana-himanta-biswa-sarma-ne-congress-para-sadha-nishana-46930 TrendKia — Har trend, sabse pehle.