असम में बच्चों की सुरक्षा के लिए नई नीति लागू, कर्मचारियों की स्क्रीनिंग हुई अनिवार्य असम सरकार ने स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस रूल्स 2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जिसके तहत बाल कल्याण से जुड़े सभी कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी। असम सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और देखभाल प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। राज्य में स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) रूल्स, 2026 को लागू कर दिया गया है। इन नए नियमों के तहत बाल संरक्षण सेवाओं से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य संस्थागत कमियों को दूर करना और बच्चों की देखरेख करने वाली सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय करना है। कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग और जवाबदेही नए नीतिगत ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चों की देखभाल और सुरक्षा में लगे कर्मचारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग है। इसके तहत बाल संरक्षण अधिकारियों और केयरगिवर्स की पृष्ठभूमि की गहन जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चों की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग तय सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इस कदम से बाल देखभाल गृहों और सुरक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार की गुंजाइश को खत्म करने में मदद मिलेगी। वैधानिक निकायों के कामकाज में सुधार कर्मचारियों की जांच के अलावा, राज्य सरकार ने बाल कल्याण से जुड़ी वैधानिक संस्थाओं के काम करने के तरीके को भी सुव्यवस्थित किया है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) और 10 से अधिक अन्य वैधानिक निकायों की कार्यप्रणाली में सुधार किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के मामले में किसी भी तरह की विनियामक ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट की व्यवस्था बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों और सुरक्षा का आकलन करने के लिए सरकार ने इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट को संस्थागत रूप दिया है। इसके माध्यम से बच्चों के रहने की स्थिति, खान-पान, शिक्षा और सुरक्षा का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने X पर लिखा कि सरकार ने सुरक्षा तंत्र में मौजूद कमियों की पहचान की है और बच्चों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से ये सख्त कदम उठाए हैं। रोकथाम से लेकर पुनर्वास तक एकीकृत ढांचा जुवेनाइल जस्टिस रूल्स, 2026 के लागू होने से राज्य में बच्चों की रोकथाम, संस्थागत देखभाल, निगरानी और पुनर्वास के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार हुआ है। यह नीति सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करती है। इससे न केवल बाल संरक्षण तंत्र की प्रभावकारिता बढ़ेगी, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर सही सहायता और सुरक्षा भी मिल सकेगी। इसका आप पर असर नवीनतम जुवेनाइल जस्टिस नियमों के लागू होने से अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार होगा, जिससे देखभाल करने वाले संस्थानों में जवाबदेही बढ़ेगी। • भारत में: यह नीतिगत बदलाव देश के अन्य राज्यों के लिए बाल कल्याण और कर्मचारियों की स्क्रीनिंग को सख्त बनाने का एक बेहतरीन मॉडल पेश करता है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर बाल संरक्षण मानकों को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। • असम में: बाल देखभाल गृहों में रहने वाले बच्चों को इंडिविजुअल केयर प्लान और नियमित होम ऑडिट का सीधा लाभ मिलेगा। इससे उनके रहने, खाने और सुरक्षा के स्तर में सुधार होगा। • असम में: बाल कल्याण समितियों और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य पृष्ठभूमि जांच से गुजरना होगा। इससे संस्थागत लापरवाही की गुंजाइश खत्म होगी और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। • भारत में: बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों को सरकारी और गैर-सरकारी बाल गृहों में सख्त निगरानी की मांग करने के लिए एक मजबूत आधार मिलेगा। यह कदम पूरे देश में बच्चों के अधिकारों की रक्षा को बढ़ावा देगा। ऐसा क्यों हुआ असम सरकार ने मौजूदा बाल संरक्षण व्यवस्था में विनियामक कमियों और निगरानी के अभाव की पहचान करने के बाद इन बड़े सुधारों की घोषणा की है। प्रशासन का मानना था कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं में ढिलाई को दूर करने के लिए नियम सख्त करना जरूरी था। • विनियामक तंत्र में खामियां: राज्य सरकार के आंतरिक मूल्यांकन में सामने आया कि पुरानी व्यवस्था में निगरानी के पर्याप्त उपाय नहीं थे। इन खामियों को दूर करने के लिए जुवेनाइल जस्टिस रूल्स, 2026 के तहत नए नियम लागू किए गए। • कर्मचारियों की जांच का अभाव: पहले बाल गृहों में काम करने वाले कर्मियों की पृष्ठभूमि जांच के लिए कोई अनिवार्य नियम नहीं था। बच्चों के साथ किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सरकार ने सभी अधिकारियों की स्क्रीनिंग को अनिवार्य बना दिया। • संस्थागत समन्वय की आवश्यकता: बाल कल्याण समितियों और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड्स के बीच समन्वय की कमी से फैसलों में देरी होती थी। 10 से अधिक वैधानिक निकायों को सुव्यवस्थित करने से अब मामलों का त्वरित निपटारा हो सकेगा। • मानकीकृत देखभाल योजना की कमी: बाल संरक्षण केंद्रों में बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों के नियमित आकलन की कोई तय प्रक्रिया नहीं थी। सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट की व्यवस्था लागू की। सवाल-जवाब 1. असम सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कौन से नए नियम अधिसूचित किए हैं? असम सरकार ने बाल सुरक्षा और कल्याण ढांचे को मजबूत करने के लिए स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) रूल्स, 2026 को अधिसूचित किया है। 2. नई नीति के तहत किन लोगों की स्क्रीनिंग अनिवार्य की गई है? बच्चों की देखरेख और सुरक्षा में लगे सभी बाल संरक्षण अधिकारियों और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच (स्क्रीनिंग) को अनिवार्य किया गया है। 3. किन संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार किया गया है? राज्य सरकार ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC), जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) और 10 से अधिक अन्य वैधानिक निकायों के कामकाज को सुव्यवस्थित किया है। 4. इंडिविजुअल केयर प्लान और होम ऑडिट का मुख्य उद्देश्य क्या है? इनका मुख्य उद्देश्य बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों, उनके रहने की स्थिति और सुरक्षा का व्यवस्थित और नियमित आकलन करना है। 5. यह नई बाल संरक्षण नीति किस प्रकार काम करेगी? यह नीति राज्य में बाल सुरक्षा के लिए रोकथाम, संस्थागत देखरेख, निगरानी और पुनर्वास को शामिल करते हुए एक व्यापक और जवाबदेह ढांचा तैयार करती है। https://trendkia.com/assam/assam-men-bachchon-ki-suraksha-ke-lie-nai-niti-lagu-karmachariyon-ki-skrininga-hui-anivarya-30384 TrendKia — Har trend, sabse pehle.