# असम में बाढ़ का प्रचंड कहर: एक दिन में 21 मौतें, 16 जिलों में हाहाकार

> असम में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जहां महज 24 घंटों के भीतर 21 लोगों की जान चली गई है। उफनती नदियों ने राज्य के 16 जिलों में 5.64 लाख से अधिक लोगों का जीवन संकट में डाल दिया है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-07-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-men-barha-ka-prachnda-kahara-eka-dina-men-21-mauten-16-jilon-men-hahakara-9688 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम बाढ़, बाढ़ का कहर, हिमंत विश्व शर्मा, आपदा प्रबंधन, शिवसागर, मौसम अलर्ट

असम में बाढ़ के हालात बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं, जिसके चलते बड़े पैमाने पर जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ओर से देर रात जारी किए गए एक बुलेटिन में यह जानकारी सामने आई है कि बीते 24 घंटों के दौरान उफनती नदियों ने 21 और लोगों की जान ले ली है। पूरा राज्य इस समय भीषण जलप्रलय का सामना कर रहा है, जिसने 16 जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है और 5,64,600 से अधिक लोगों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौतों के आंकड़ों में यह अचानक हुई बढ़ोतरी बेहद डराने वाली है, क्योंकि महज दो दिन पहले तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या केवल पांच थी। इस साल राज्य में बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब 31 तक पहुंच गई है, जो इस आपदा की गंभीरता को साफ तौर पर बयां करती है।

 

## शिवसागर समेत कई जिलों में भारी तबाही

वैसे तो पूरा राज्य बाढ़ की मार झेल रहा है, लेकिन सबसे भयानक तबाही शिवसागर जिले में देखने को मिल रही है। एएसडीएमए के बुलेटिन के अनुसार, हाल ही में हुई मौतों में से अकेले 13 मौतें शिवसागर में दर्ज की गई हैं। इस इलाके में विस्थापन और बर्बादी का स्तर भी सबसे ज्यादा है, जहां 3,59,535 लोग सीधे तौर पर जलभराव से प्रभावित हुए हैं। अन्य जिले भी इस प्राकृतिक आपदा का भारी खामियाजा भुगत रहे हैं। जोरहाट में फिलहाल 87,662 लोग बाढ़ के कारण भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, जबकि चराइदेव में प्रभावित निवासियों की संख्या 72,646 बताई गई है। यह संकट एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैल चुका है, जिसकी चपेट में गोलाघाट, कामरूप, होजाई, डिब्रूगढ़, बिश्वनाथ, धेमाजी, सोनितपुर, उदालगुड़ी, नगांव, कामरूप (मेट्रो), तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग और लखीमपुर जिले भी शामिल हैं। कुल मिलाकर, 44 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 872 गांव पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं, जिससे सामान्य जनजीवन और खेती पूरी तरह से ठप हो गई है।

 

## राहत कार्य और सरकार का एक्शन

जैसे-जैसे यह मानवीय संकट गहराता जा रहा है, राज्य प्रशासन बेघर हुए लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रहा है। प्रभावित इलाकों में फिलहाल 71 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जो उन 12,284 लोगों को अस्थायी आसरा दे रहे हैं, जिन्हें अपने जलमग्न घरों को छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इन शिविरों के अलावा, प्रशासन 202 राहत वितरण केंद्र भी चला रहा है ताकि आपदा में फंसे या गंभीर रूप से प्रभावित हुए लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजें मिल सकें। लगातार बिगड़ते हालात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने खुद मोर्चे पर जाने का फैसला किया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह बुधवार से बाढ़ से तबाह हुए जिलों का दौरा करेंगे, ताकि राहत और बचाव कार्यों की जमीनी स्तर पर समीक्षा की जा सके और पीड़ितों तक जल्द से जल्द आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।

 

## बाढ़ के दौरान जान बचाने के जरूरी उपाय

खतरे के निशान से ऊपर बहते पानी को देखते हुए, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने और अधिक जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों का पालन करने पर जोर दिया है। ऐसी भयानक बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा पानी में डूबने और बिजली का करंट लगने का होता है, इसके साथ ही घर के कीमती सामान और मवेशियों के नुकसान का भी भारी जोखिम बना रहता है। संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सख्ती से सलाह दी गई है कि वे तुरंत अपनी एक आपातकालीन किट तैयार कर लें। इस किट में कुछ नकद पैसे, एक मोबाइल फोन चार्जर, पीने का साफ पानी, सूखा राशन, एक अच्छी टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, फर्स्ट एड बॉक्स, जरूरी दवाइयां और सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को वाटरप्रूफ बैग में सुरक्षित रखना चाहिए।

 इसके अलावा, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बिना कोई देरी किए तुरंत ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए, क्योंकि बाढ़ का पानी सबसे पहले निचले इलाकों में ही भरता है और वहां जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ता है। शहरों और कस्बों में जलभराव की समस्या को और बिगड़ने से रोकने के लिए, नागरिकों से अपील की गई है कि वे नालियों और सीवेज में कूड़ा-कचरा बिल्कुल न फेंकें, क्योंकि इससे भारी रुकावट पैदा होती है। अंत में, सभी परिवारों को यह भी सलाह दी गई है कि वे एक साथ बैठकर बचाव की एक साफ योजना बनाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति के दौरान घर के हर सदस्य को यह पता हो कि उन्हें किस सुरक्षित स्थान पर जाना है और एक-दूसरे से संपर्क कैसे करना है।

## इसका आप पर असर
- **असम में:** बाढ़ प्रभावित 16 जिलों के निवासियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाना होगा और जरूरी सामान की आपातकालीन किट तैयार रखनी होगी।
- **पूरे भारत में:** असम में हो रही यह तबाही दिखाती है कि बदलता मौसम अब ज्यादा खतरनाक हो गया है, जिससे सभी राज्यों के नागरिकों को अपनी आपदा तैयारियों को मजबूत करना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. इस साल अब तक असम में बाढ़ से कितने लोगों की मौत हुई है?
एएसडीएमए के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, इस साल असम बाढ़ में अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 21 मौतें केवल पिछले 24 घंटों में हुई हैं।

### 2. वर्तमान बाढ़ से असम का कौन सा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है?
शिवसागर जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 13 लोगों की जान गई है और 3.59 लाख से अधिक लोग भारी जलभराव की चपेट में हैं।

### 3. बाढ़ पीड़ितों के लिए सरकार ने क्या राहत उपाय किए हैं?
प्रशासन ने 71 राहत शिविर स्थापित किए हैं जिनमें 12,000 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। इसके साथ ही 202 राहत वितरण केंद्र भी चलाए जा रहे हैं।

### 4. बाढ़ की आपातकालीन किट में लोगों को क्या-क्या रखना चाहिए?
आपातकालीन किट में नकद पैसे, मोबाइल चार्जर, पीने का पानी, सूखा राशन, टॉर्च, बैटरी, फर्स्ट एड, दवाइयां और जरूरी दस्तावेज होने चाहिए।

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