# असम में बाढ़ राहत न मिलने पर अखिल गोगोई का अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू

> शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने चार जिलों के बाढ़ पीड़ितों को राहत राशि न मिलने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-men-barha-rahata-na-milane-para-akhil-gogoi-ka-anishchitakalina-satyagraha-shuru-42454 · **Language:** Hindi
**Tags:** अखिल गोगोई, असम बाढ़, शिवसागर, हिमंत बिस्व सरमा, बाढ़ राहत, राइजोर दल, सत्याग्रह

असम के शिवसागर क्षेत्र से विधायक और राइजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने राज्य सरकार के खिलाफ अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन छेड़ दिया है। उनका कहना है कि राज्य के चार जिलों में बाढ़ का दंश झेलने वाले परिवारों को अब तक तय की गई एकमुश्त अंतरिम आर्थिक सहायता पूरी तरह नहीं मिल पाई है। इसी देरी के विरोध में उन्होंने 2 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे से अपना सत्याग्रह आरंभ किया, क्योंकि प्रशासन को दी गई अंतिम समयसीमा बिना किसी ठोस समाधान के बीत गई थी।

## बाढ़ पीड़ितों के लिए वित्तीय मदद की मांग
इस आंदोलन के केंद्र में चार प्रमुख जिले शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट शामिल हैं। विधायक का कहना है कि इन चार जिलों के बाढ़ से प्रभावित सभी परिवारों को 15,000 रुपये की एकमुश्त अंतरिम सहायता तत्काल दी जानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने शिवसागर और चराइदेव के आपदा पीड़ितों के लिए अतिरिक्त 10,000 रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराने की मांग भी उठाई है। उनका दावा है कि निर्धारित व्यवस्था के बावजूद जमीनी स्तर पर पीड़ितों को उनका हक नहीं मिल पाया है।

## राहत वितरण में भारी खामियों का आरोप
विधायक ने दावा किया है कि चारों चिन्हित जिलों में लगभग 30 से 40 प्रतिशत प्रभावित लोग अब तक 15,000 रुपये की मूल सहायता राशि से वंचित हैं। इसके साथ ही, शिवसागर और चराइदेव के मामले में स्थिति और भी खराब बताई गई है, जहाँ उनके अनुसार अतिरिक्त 10,000 रुपये की राशि किसी भी बाढ़ पीड़ित परिवार तक नहीं पहुंची है। इन विसंगतियों को देखते हुए उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

## मुख्यमंत्री को लिखा पत्र और आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन शुरू करने के अगले दिन, यानी 3 अक्टूबर को उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को पत्र भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। इस पत्र की प्रति असम के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। पत्र में विधायक ने कहा, 
> “मैं दोहराना चाहता हूं कि जब तक सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करती, मेरा सत्याग्रह जारी रहेगा।”
 उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में सीधे हस्तक्षेप करने और बिना किसी देरी के राहत राशि जारी करवाने का आग्रह किया।

## गुवाहाटी प्रदर्शन के बाद तय की गई थी समयसीमा
इस अनिश्चितकालीन सत्याग्रह की नींव 23 सितंबर को गुवाहाटी के चंचल धरना स्थल पर आयोजित एक जनसभा में रखी गई थी। उस बैठक में तत्काल अंतरिम राहत के साथ-साथ चारों जिलों के प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई गई थी। उसी दिन एक सरकारी प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें मांगों को पूरा करने के लिए 1 अक्टूबर तक का समय दिया गया था। उस ज्ञापन में स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाए गए, तो 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
इस आंदोलन और राहत वितरण की मांग का सीधा असर असम के बाढ़ पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

- **असम राज्य में:** बाढ़ से तबाह हुए परिवारों के लिए 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता न मिलना उनके दैनिक पुनर्वास को सीधे तौर पर रोक रहा है। यदि आंदोलन के दबाव में प्रशासन राशि जारी करता है, तो हजारों परिवारों को तात्कालिक राहत सामग्री और मरम्मत का सहारा मिल सकेगा।
- **शिवसागर और चराइदेव में:** इन दोनों क्षेत्रों के परिवारों के लिए 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता की मांग की गई है जो अब तक किसी को नहीं मिली है। इस राशि के मिलने से स्थानीय निवासियों को घरों के पुनर्निर्माण और आजीविका बहाल करने में बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** ज्ञापन में 10 लाख रुपये के स्थायी मुआवजे की मांग भी रखी गई है, जिससे प्रशासन पर राहत वितरण प्रणाली पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ा है। प्रभावित नागरिकों को अपने स्थानीय राजस्व या राहत कार्यालयों में लंबित भुगतानों की स्थिति की पड़ताल करनी पड़ सकती है।
- **नागरिक सतर्कता:** जिन 30 से 40 प्रतिशत परिवारों को अब तक सहायता नहीं मिली है, उन्हें अपने नाम सूची में दर्ज होने की पुष्टि करनी होगी। स्थानीय स्तर पर हो रहे सत्याग्रह के चलते सरकारी दफ्तरों में राहत फाइलों की समीक्षा में तेजी आने की संभावना है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सत्याग्रह असम सरकार द्वारा तय समयसीमा के भीतर बाढ़ पीड़ितों को घोषित आर्थिक मदद न देने और राहत वितरण में आ रही कथित खामियों के कारण शुरू हुआ है।

- **सहायता राशि का अधूरा वितरण:** शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट के लगभग 30 से 40 प्रतिशत बाढ़ पीड़ितों को 15,000 रुपये की सहायता नहीं मिल सकी है। इस विफलता ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों में गहरा असंतोष पैदा किया।
- **अतिरिक्त राहत का शून्य वितरण:** शिवसागर और चराइदेव के लिए घोषित अतिरिक्त 10,000 रुपये की सहायता राशि का लाभ कथित तौर पर किसी भी पीड़ित को नहीं मिला। इस पूरी तरह लंबित भुगतान ने विरोध की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
- **समयसीमा का उल्लंघन:** 23 सितंबर को गुवाहाटी के चंचल धरना स्थल पर आयोजित बैठक के दौरान सरकार को 1 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया गया था। तय तारीख बीतने के बाद भी सरकार द्वारा कदम न उठाए जाने पर 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
- **लिखित मांग पर सुनवाई का अभाव:** मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को स्थिति से अवगत कराने के बाद भी तुरंत समाधान न मिलने के कारण सत्याग्रह को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की घोषणा की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. अखिल गोगोई ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह क्यों शुरू किया है?
उन्होंने असम के चार जिलों में बाढ़ पीड़ितों को घोषित अंतरिम राहत राशि का समय पर भुगतान न होने के विरोध में यह सत्याग्रह शुरू किया है।

### 2. यह सत्याग्रह कब और किस समय शुरू हुआ?
यह विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे शुरू किया गया।

### 3. बाढ़ राहत के तहत कौन-से चार जिले शामिल हैं?
इन मांगों में शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले शामिल हैं।

### 4. बाढ़ पीड़ितों के लिए कितनी आर्थिक सहायता की मांग की जा रही है?
चारों जिलों के लिए 15,000 रुपये की एकमुश्त सहायता और शिवसागर व चराइदेव के पीड़ितों के लिए अतिरिक्त 10,000 रुपये की मांग की गई है।

### 5. अखिल गोगोई के अनुसार कितने प्रतिशत लोगों को सहायता राशि नहीं मिली है?
उनके दावे के अनुसार चारों जिलों के 30 से 40 प्रतिशत प्रभावित लोगों को 15,000 रुपये की सहायता नहीं मिली है, और शिवसागर व चराइदेव में अतिरिक्त 10,000 रुपये किसी को नहीं मिले हैं।

### 6. अखिल गोगोई ने सरकार को क्या समयसीमा दी थी?
23 सितंबर के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक ज्ञापन सौंपकर सरकार को मांगें पूरी करने के लिए 1 अक्टूबर तक का समय दिया गया था।

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