असम में बिजनेस रिफॉर्म्स के लिए दिसंबर की डेडलाइन तय, जनवरी 2027 तक ई-ऑफिस लागू करने का लक्ष्य असम सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक सभी पेंडिंग बिजनेस सुधार पूरे करने और 1 जनवरी 2027 तक सभी सरकारी दफ्तरों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का लक्ष्य रखा है। असम सरकार ने प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाने और शासन से जुड़े सुधारों को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत 31 दिसंबर 2026 को लंबित व्यावसायिक सुधारों को पूरा करने की अंतिम समय सीमा तय की गई है। इसके साथ ही 1 जनवरी 2027 तक राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों को ई-ऑफिस प्रणाली के दायरे में लाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन तमाम बिंदुओं पर राज्य सरकार के वरिष्ठतम सचिवों की 21वीं मासिक समीक्षा बैठक में विस्तार से चर्चा की गई। काजीरंगा कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई उच्चस्तरीय बैठक यह अहम समीक्षा बैठक काजीरंगा कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने की। इस उच्चस्तरीय मंथन का मुख्य केंद्र बिंदु लालफीताशाही को कम करना और कारोबार को आसान बनाना यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस था। अधिकारियों के साथ डिरेगुलेशन 2.0, स्टेट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान और डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और तय समय सीमा के भीतर अपने सभी पेंडिंग सुधार कार्य पूरे करें। वित्तीय प्रबंधन और विकास से जुड़े अन्य अहम मुद्दे बैठक के दौरान वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसमें विकसित असम प्रस्ताव, ग्रीन सेस का कार्यान्वयन, सकल राज्य मूल्य वर्धित गणना के लिए सोसाइटियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा वार्षिक खातों को जमा करना, और सिंगल नोडल एजेंसी स्पर्श प्रणाली के तहत हो रही प्रगति शामिल रही। संबंधित विभागों से कहा गया कि वे वित्तीय जवाबदेही में सुधार लाएं और सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करें। विकास प्राथमिकताओं के तहत आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रमों, सतत विकास लक्ष्य संकेतकों और अन्य उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। फाइलों की पेंडेंसी और प्रशासनिक सुधार प्रशासनिक सुधारों की दिशा में सह-जिला आयुक्तों को शक्तियों के प्रत्यायोजन, सेवा सेतु, ई-ऑफिस और प्रोजेक्ट सद्भावना की समीक्षा की गई। हालांकि ई-ऑफिस की पेंडेंसी में 7 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद 3,04,288 फाइलें अभी भी लंबित पड़ी हैं। सरकार ने इसके साथ ही मिशन सद्भावना 3.0 की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया। इसके अलावा छठी अनुसूची के तहत आने वाली स्वायत्त परिषदों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी प्रमुखता से चर्चा की गई। योजनाओं की मॉनिटरिंग और मुख्यमंत्री के निर्देश बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि परिषदों और संबंधित विभागों के बीच योजना-विशिष्ट समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने चाहिए। साथ ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और उचित निगरानी तथा फंड के सही इस्तेमाल के लिए हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि समीक्षा बैठकों में लिए गए फैसलों का असर जमीनी स्तर पर शासन प्रणाली में दिखना चाहिए। उन्होंने बेहतर शासन और समावेशी विकास को असम के विकास एजेंडे के केंद्र में रखते हुए समन्वित प्रयासों, स्पष्ट जवाबदेही और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने का आह्वान किया है। इसका आप पर असर असम में प्रशासनिक और व्यावसायिक सुधारों के इस बड़े फैसले का राज्य के आम नागरिकों और कारोबारियों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: प्रशासनिक सुधारों की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी पारदर्शी और समयबद्ध कामकाज का एक मॉडल पेश करती है। इस तरह के कदमों से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आती है। • असम में: राज्य में ई-ऑफिस पूरी तरह लागू होने और बिजनेस रिफॉर्म्स के पूरा होने से आम जनता के सरकारी काम-धंधे तेजी से होंगे और अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। कारोबारियों को लाइसेंस और अनुमति लेने में आने वाली प्रशासनिक अड़चनों से बड़ी राहत मिलेगी। • वित्तीय प्रबंधन: सरकारी विभागों द्वारा वित्तीय जवाबदेही और संसाधनों के बेहतर उपयोग से राज्य के विकास कार्यों को गति मिलेगी। लंबित फाइलों के निस्तारण से अटके हुए मामलों का समाधान तेजी से हो सकेगा। • कल्याणकारी योजनाएं: स्वायत्त परिषदों में योजनाओं की सख्त मॉनिटरिंग और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति से सरकारी अनुदान और योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचेगा। ऐसा क्यों हुआ असम सरकार द्वारा इन कठोर समय सीमाओं को तय करने के पीछे प्रशासनिक तंत्र को दुरुस्त करना और लालफीताशाही को खत्म करना मुख्य वजह रही है। • प्रशासनिक सुस्ती दूर करना: सरकारी कार्यालयों में बड़ी संख्या में फाइलें लंबित होने और कामकाज में देरी को दूर करने के लिए डिजिटल ई-ऑफिस प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। • कारोबार सुगमता को बढ़ावा: निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों के लिए राज्य में व्यापार करना आसान बनाने के वास्ते नियामक प्रक्रियाओं को सरल करने की आवश्यकता महसूस की गई थी। • वित्तीय अनुशासन: सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और विकास योजनाओं के लिए धन के सही प्रबंधन को सुनिश्चित करने के वास्ते यह उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। सवाल-जवाब 1. असम सरकार ने बिजनेस सुधार पूरे करने की क्या डेडलाइन तय की है? सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक सभी पेंडिंग बिजनेस सुधार पूरे करने की समय सीमा तय की है। 2. सभी सरकारी दफ्तरों में ई-ऑफिस कब तक लागू हो जाएगा? राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों को 1 जनवरी 2027 तक ई-ऑफिस प्रणाली के तहत लाने का लक्ष्य रखा गया है। 3. यह समीक्षा बैठक किसकी अध्यक्षता में हुई थी? यह बैठक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में काजीरंगा कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई थी। 4. वर्तमान में कितनी फाइलें लंबित हैं? ई-ऑफिस की पेंडेंसी में 7 प्रतिशत की गिरावट आने के बावजूद अभी भी 3,04,288 फाइलें लंबित हैं। 5. बैठक में कौन सा नया मिशन चर्चा में रहा? बैठक के दौरान मिशन सद्भावना 3.0 की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। https://trendkia.com/assam/assam-men-bijanesa-riphormsa-ke-lie-disnbara-ki-dedalaina-taya-janavari-2027-taka-i-phisa-lagu-karane-ka-lakshya-58027 TrendKia — Har trend, sabse pehle.