असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बनेगा दूसरा सरायघाट रेल व सड़क पुल, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत रेल मंत्रालय असम में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर दूसरे सरायघाट डबल डेकर पुल और आगथोरी-कामाख्या रेलवे दोहरीकरण का निर्माण कार्य शुरू करने जा रहा है। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के आर-पार परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेल मंत्रालय दूसरे सरायघाट रेल-सह-सड़क पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत करने जा रहा है। इस बुनियादी ढांचा पहल के अंतर्गत केवल नया पुल ही नहीं बनेगा, बल्कि आगथोरी और कामाख्या रेलवे स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का काम भी शामिल है। यह समूची परियोजना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे जोन के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में संचालित की जा रही है, जिससे गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में यात्रियों के आवागमन के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। डबल डेकर पुल की तकनीकी विशेषताएं और रूपरेखा नया प्रस्तावित पुल 1.3 किलोमीटर लंबा डबल डेकर ढांचा होगा। इसके निचले डेक पर दो समानांतर रेलवे लाइनें बिछाई जाएंगी, जबकि ऊपरी डेक पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ के साथ तीन लेन की सड़क तैयार की जाएगी। मौजूदा सरायघाट पुल की तुलना में यह काफी बड़ा विस्तार है, क्योंकि पुराने पुल पर केवल एक सिंगल रेलवे लाइन और दो लेन की सड़क ही उपलब्ध है। मुख्य पुल की नींव कुआं नींव (वेल फाउंडेशन) पर आधारित होगी और इसके सुपरस्ट्रक्चर में 125 मीटर स्पैन वाला वेल्डेड ओपन वेब गर्डर डिजाइन उपयोग में लाया जाएगा। नदी के दोनों किनारों पर पुल को जोड़ने के लिए विशेष अप्रोच वायाडक्ट्स बनाए जाएंगे। आगथोरी की तरफ लगभग 600 मीटर लंबा और कामाख्या की तरफ करीब 200 मीटर लंबा अप्रोच वायाडक्ट तैयार किया जाएगा। इन वायाडक्ट्स का निर्माण पाइल फाउंडेशन पर कंपोजिट गर्डर सुपरस्ट्रक्चर तकनीक की मदद से किया जाएगा। सड़क संपर्क और रेलवे ट्रैक दोहरीकरण परियोजना यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा तैयार किए जा रहे सड़क नेटवर्क से भी जुड़ेगी। इससे एक ओर जालुकबारी की दिशा में सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर आगथोरी क्षेत्र के सड़क तंत्र से सीधा संपर्क स्थापित होगा। पुल के समानांतर ही 7.20 किलोमीटर लंबी आगथोरी-कामाख्या दोहरीकरण परियोजना पर भी काम चल रहा है, जो मौजूदा रूट पर एक अतिरिक्त रेल लाइन जोड़ेगी। रेल मंत्रालय ने वर्ष 2024 में इस दोहरीकरण कार्य को मंजूरी दी थी, और इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो को सौंपी गई है। निर्माण समयसीमा और आधुनिक निगरानी तकनीक पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना यात्रियों और मालगाड़ियों दोनों के संचालन को रफ्तार देगी और असम के परिवहन तंत्र की क्षमता बढ़ाएगी। निर्माण कार्य में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, डिजिटल इंजीनियरिंग, सख्त गुणवत्ता मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाएगा। पुल की मजबूती और कार्यप्रणाली पर निरंतर नजर बनाए रखने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और ब्रिज इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम लगाए जाएंगे। रेलवे की योजना के अनुसार, पाइलिंग से जुड़ा जमीनी कार्य अक्टूबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अन्य प्रमुख निर्माण गतिविधियां मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान चरणबद्ध तरीके से गति पकड़ेंगी। यह अतिरिक्त रेल क्षमता ट्रेनों की आवाजाही को निर्बाध बनाएगी, वहीं तीन लेन का सड़क मार्ग गुवाहाटी के उत्तरी और दक्षिणी छोर के बीच सफर को बेहद सुगम कर देगा। आने वाले कुछ वर्षों में इस समग्र प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसका आप पर असर यह परियोजना गुवाहाटी और समूचे पूर्वोत्तर भारत के दैनिक यात्रियों और माल ढुलाई के लिए यात्रा के समय और ट्रैफिक जाम को घटाएगी। • भारत में: पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की आवाजाही पहले से अधिक तेज और सुगम हो जाएगी। इससे पूरे क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आएगी। • असम में: गुवाहाटी के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के बीच यात्रा करने वाले दैनिक मुसाफिरों को पुराने पुल पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी। तीन लेन की नई सड़क और दोहरी रेलवे लाइन से स्थानीय व्यापार और दैनिक आवागमन को नई रफ्तार मिलेगी। • यात्रियों के लिए: आगथोरी और कामाख्या के बीच अतिरिक्त रेल लाइन बनने से क्रॉसिंग पर ट्रेनों के रुकने का इंतजार खत्म होगा। सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए भी अलग फुटपाथ की सुविधा सुरक्षित आवागमन प्रदान करेगी। • निर्माण कार्य का प्रभाव: अक्टूबर 2026 से पाइलिंग कार्य शुरू होने के बाद नदी क्षेत्र और पहुंच मार्गों पर गतिविधियां बढ़ेंगी। स्थानीय यात्रियों को आगामी कुछ वर्षों तक निर्माण क्षेत्र के आसपास यातायात नियमों का पालन करना होगा। ऐसा क्यों हुआ ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित पुराना सरायघाट पुल बढ़ते ट्रैफिक और ट्रेन परिचालन के दबाव को संभालने में सीमित साबित हो रहा था, जिससे नए पुल की आवश्यकता बनी। • क्षमता संबंधी दबाव: पुराना सरायघाट पुल केवल एक सिंगल रेलवे ट्रैक और दो लेन की सड़क के साथ संचालित हो रहा है। लगातार बढ़ते रेल और सड़क यातायात के कारण इस खंड पर अक्सर ट्रेनों और वाहनों की कतारें लग जाती हैं। • आगथोरी-कामाख्या बॉटलनेक: आगथोरी और कामाख्या स्टेशनों के बीच सिंगल लाइन होने से इस महत्वपूर्ण रेल गलियारे में ट्रेनों के संचालन पर विपरीत असर पड़ रहा था। रेल मंत्रालय ने इस अड़चन को दूर करने के लिए वर्ष 2024 में दोहरीकरण को औपचारिक स्वीकृति दी थी। • रणनीतिक और लॉजिस्टिक जरूरत: पूर्वोत्तर क्षेत्र में नागरिक आवाजाही और भारी माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने के लिए ब्रह्मपुत्र पर एक आधुनिक और बड़े पुल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। सवाल-जवाब 1. दूसरे सरायघाट पुल की लंबाई और संरचना कैसी होगी? यह 1.3 किलोमीटर लंबा डबल डेकर पुल होगा, जिसके निचले स्तर पर दो रेलवे ट्रैक और ऊपरी स्तर पर तीन लेन की सड़क तथा फुटपाथ होगा। 2. आगथोरी और कामाख्या के बीच रेलवे दोहरीकरण की लंबाई कितनी है? इस रेलवे दोहरीकरण खंड की लंबाई 7.20 किलोमीटर है, जिसे वर्ष 2024 में रेल मंत्रालय से स्वीकृति मिली थी। 3. परियोजना का निर्माण कार्य किस कंपनी को सौंपा गया है? इस परियोजना के क्रियान्वयन का जिम्मा इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को सौंपा गया है। 4. पुल के निर्माण में पाइलिंग का काम कब शुरू होगा? रेलवे के अनुसार परियोजना के लिए पाइलिंग का काम अक्टूबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 5. नया पुल सड़क नेटवर्क से किस तरह जुड़ेगा? यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मार्गों से जुड़कर एक ओर जालुकबारी और दूसरी ओर आगथोरी के सड़क तंत्र से सीधा संपर्क स्थापित करेगा। https://trendkia.com/assam/assam-men-brahmaputra-nadi-para-banega-dusara-saraighat-rela-va-saraka-pula-purvottara-ki-kanektiviti-hogi-majabuta-37814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.