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  "title": "असम में चाय उद्योग को बड़ी राहत, ऑर्थोडॉक्स चाय पर सब्सिडी बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलो की गई",
  "summary": "असम सरकार ने चाय उद्योग विशेष प्रोत्साहन योजना में बदलाव करते हुए ऑर्थोडॉक्स व स्पेशलिटी चाय पर सब्सिडी बढ़ा दी है, जिससे निर्यातकों और स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।",
  "content": "पूर्वोत्तर के बागानों और चाय उत्पादकों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए असम सरकार ने अपनी विशेष प्रोत्साहन नीति में अहम संशोधन अधिसूचित किए हैं। संशोधित असम चाय उद्योग विशेष प्रोत्साहन योजना (ATISIS) 2020 आगामी 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी। व्यापारिक संगठनों और नीलामी मंचों ने राज्य प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे घरेलू उत्पादन लागत कम करने और अंतरराष्ट्रीय निर्यात को तेज करने में सीधी मदद मिलेगी।\n\nसीटीसी चाय निर्यात पर प्रोत्साहन और परिवहन खर्च की भरपाई\nइस नीतिगत बदलाव के तहत सिंगल ओरिजिन असम क्वालिटी सीटीसी चाय के निर्यात पर 3 रुपये प्रति किलोग्राम की वित्तीय सहायता तय की गई है। चारों तरफ से जमीन से घिरे होने की वजह से असम के चाय व्यापारियों को कंटेनर लाने-ले जाने, आंतरिक माल ढुलाई और बंदरगाहों तक परिवहन पर काफी अधिक खर्च उठाना पड़ता है। गुवाहाटी चाय नीलामी खरीदार संघ का कहना है कि यह नया प्रावधान उसी अतिरिक्त ढुलाई लागत की भरपाई करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।\n\nगुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) के जरिए बेची जाने वाली सीटीसी चाय को आधिकारिक तौर पर इस निर्यात लाभ के लिए उपयुक्त माना गया है। संघ के सचिव दिनेश बिहानी के अनुसार, इस आधिकारिक पहचान से संगठित नीलामी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बागान मालिकों को अपनी फसल पारदर्शी तरीके से बेचने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि चाय व्यापारी इस प्रगतिशील नीतिगत ढांचे की शुरुआत के लिए राज्य सरकार के आभारी हैं।\n\nऑर्थोडॉक्स, माचा और कार्यशील पूंजी पर बढ़े लाभ\nसंशोधित नियमों में ऑर्थोडॉक्स तथा स्पेशलिटी चाय के उत्पादन पर मिलने वाले अनुदान को 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक यूनिट अथवा चाय बागान के लिए अधिकतम वार्षिक क्लेम की सीमा को भी बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया है। इस कदम से प्रीमियम गुणवत्ता वाली पत्तियों का उत्पादन करने वाले उत्पादकों को भारी वित्तीय सहारा मिलने की उम्मीद है।\n\nनीति में पहली बार माचा चाय को भी शामिल किया गया है, जिससे आधुनिक स्वास्थ्य पेय बाजार में असम की पहुंच बढ़ेगी। इसके अलावा चाय इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी पर ब्याज छूट की सीमा को भी 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। दिनेश बिहानी ने बताया कि दुनिया के सबसे बड़े सीटीसी नीलामी केंद्रों में शुमार गुवाहाटी का मंच इस व्यवस्था के जरिए अंतरराष्ट्रीय तथा घरेलू व्यापार नेटवर्क को और मजबूत करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस नीतिगत फैसले का सीधा प्रभाव चाय की कीमतों, बागान कर्मियों के रोजगार और पूर्वोत्तर के कृषि व्यापार पर पड़ेगा।\n\n• असम में: चाय बागानों और प्रसंस्करण इकाइयों को सालाना 1 करोड़ रुपये तक की उत्पादन सहायता और 20 लाख रुपये तक ब्याज राहत मिलेगी। इससे वित्तीय संकट से जूझ रहे बागानों में नकदी का प्रवाह सुधरेगा और लाखों बागान श्रमिकों के रोजगार की स्थिरता बनी रहेगी।\n• भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चाय की स्थिति मजबूत होगी क्योंकि निर्यातकों को 3 रुपये प्रति किलो की ढुलाई भरपाई मिल रही है। घरेलू खुदरा बाजार में ऑर्थोडॉक्स और माचा जैसी प्रीमियम चाय की उपलब्धता बढ़ेगी और इनकी कीमतों में स्थिरता आ सकती है।\n• निर्यातकों के लिए: बंदरगाहों तक माल पहुंचाने का लॉजिस्टिक्स खर्च घटने से विदेशी खरीदारों को बेहतर दरों पर चाय की आपूर्ति संभव होगी। इससे पड़ोसी देशों की सस्ती चाय से मुकाबला करना आसान होगा।\n• नीलामी व्यवस्था के लिए: गुवाहाटी नीलामी केंद्र से बिक्री करने पर ही प्रोत्साहन मिलने से किसान और व्यापारी सीधे संगठित मंच पर आएंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और उत्पादकों को उचित मूल्य मिल सकेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअसम की भौगोलिक स्थिति और वैश्विक चाय बाजार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण राज्य के चाय क्षेत्र को लंबे समय से उच्च लॉजिस्टिक खर्चों और कमजोर मार्जिन का सामना करना पड़ रहा था।\n\n• लॉजिस्टिक्स और आंतरिक ढुलाई की समस्या: असम एक गैर-तटीय राज्य है, जिसके चलते निर्यात कंटेनरों को बंदरगाह तक पहुंचाने में काफी अधिक लागत आती थी। इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए विशेष निर्यात सहायता की जरूरत थी।\n• प्रीमियम चाय की वैश्विक मांग: पारंपरिक सीटीसी चाय की तुलना में ऑर्थोडॉक्स, स्पेशलिटी और माचा चाय की मांग वैश्विक बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। उत्पादकों को इन महंगे विकल्पों की ओर आकर्षित करने के लिए उत्पादन सब्सिडी 10 से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलो की गई।\n• संगठित नीलामी को बढ़ावा देने की रणनीति: कई उत्पादक निजी माध्यमों से माल बेचते थे जिससे कीमतों में पारदर्शिता नहीं रहती थी। केवल नीलामी केंद्र से बेची गई चाय को मान्यता देकर सरकार ने संगठित व्यापार को बढ़ावा देने का प्रयास किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संशोधित असम चाय प्रोत्साहन योजना कब तक लागू रहेगी?\nयह संशोधित नीति 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।\n\n2. सीटीसी चाय निर्यात पर कितनी प्रोत्साहन राशि दी जा रही है?\nसिंगल ओरिजिन असम क्वालिटी सीटीसी चाय के निर्यात पर 3 रुपये प्रति किलोग्राम का प्रोत्साहन तय किया गया है।\n\n3. ऑर्थोडॉक्स और स्पेशलिटी चाय की सब्सिडी में क्या बदलाव हुआ है?\nउत्पादन सब्सिडी 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है और अधिकतम सीमा प्रति यूनिट 1 करोड़ रुपये सालाना है।\n\n4. इस योजना में कौन सा नया चाय उत्पाद जोड़ा गया है?\nइस बार योजना के दायरे में पहली बार माचा चाय को भी शामिल किया गया है।\n\n5. कार्यशील पूंजी पर ब्याज छूट कितनी बढ़ाई गई है?\nकार्यशील पूंजी पर ब्याज छूट की सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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