# असम में कैंसर की 137 दवाएं 9 नवंबर से होंगी सस्ती, सरकार ने तय की कीमतों की नई सीमा

> असम में 9 नवंबर से कैंसर की 137 नॉन-शेड्यूल्ड दवाएं घटी हुई कीमतों पर मिलेंगी। राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत पर सीमित किए जाने के बाद प्रशासन ने 90 दिनों का सघन जांच अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-men-kainsara-ki-137-davaen-9-navnbara-se-hongi-sasti-sarakara-ne-taya-ki-kimaton-ki-nai-sima-55719 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम, कैंसर की दवाएं, एनपीपीए, दवाओं की कीमतें, ड्रग्स कंट्रोल, स्वास्थ्य नीति

असम भर के कैंसर मरीजों के लिए इलाज के खर्च में बड़ी राहत की राह खुली है। असम ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने राज्य के सभी दवा विक्रेताओं, अस्पतालों, डिस्ट्रीब्यूटरों और स्टॉकिस्टों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि 9 नवंबर से कैंसर की 137 नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं को घटे हुए अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही बेचा जाए। केंद्र स्तर पर दवाओं के अनियंत्रित मुनाफे पर लगाम लगाने के मकसद से यह नियामक कदम उठाया गया है, ताकि आम परिवारों के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाएं अधिक किफायती बन सकें।

## ट्रेड मार्जिन पर 30 प्रतिशत की सीमा और गजट अधिसूचना
कीमतों में इस कटौती की शुरुआत नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के 17 अक्टूबर को जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन से हुई है। इस नियामक संस्था ने चयनित 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर अधिकतम 30 प्रतिशत की सीमा तय की है। यह महत्वपूर्ण आदेश ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत लिया गया है, जो सार्वजनिक हित और आम जनता के कल्याण को देखते हुए कीमतों में सीधा हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

नियामक के इस नए आदेश के दायरे में इन चिन्हित दवाओं के वे सभी फॉर्मूलेशन आते हैं जो नॉन-शेड्यूल्ड श्रेणी में हैं। चाहे दवा को एकल घटक के रूप में बेचा जा रहा हो या फिर किसी अन्य दवा के संयोजन के रूप में, नई मूल्य सीमा पूरी तरह प्रभावी होगी। इसके अलावा पेटेंटेड दवाओं को भी इस मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे आधुनिक और महंगी दवाओं के दाम भी नियंत्रित रहेंगे।

## राज्यव्यापी आदेश और 90 दिनों की जांच मुहिम
असम ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने विस्तृत आदेश में कहा है कि रिटेल मेडिकल स्टोर, अस्पताल के डिस्पेंसरी, स्टॉकिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर 9 नवंबर की तय तारीख से ही नई घटी हुई दरें लागू करें। इसके साथ ही ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 25(3) के प्रावधानों के अनुरूप सभी प्रतिष्ठानों को अपनी दुकानों और काउंटरों पर संशोधित मूल्य सूची को प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है ताकि मरीज सीधे तौर पर नई दरों को देख सकें।

आदेश को कागजों से जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने पूरे असम में 90 दिनों का एक सघन निरीक्षण अभियान चलाने का ऐलान किया है। इस विशेष जांच दल का काम यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी मेडिकल स्टोर या निजी अस्पताल इन 137 दवाओं को निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर न बेचे। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेताया है कि नियमों की अवहेलना करने वाले किसी भी विक्रेता या संस्थान पर ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर के साथ-साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए मूल्य नियमों का पालन पूरी तरह अनिवार्य है और इसे तत्काल लागू करना होगा।

## भारी मुनाफे पर रोक से 70 प्रतिशत तक घटेंगे दाम
इस राष्ट्रीय स्तर के हस्तक्षेप की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि आधिकारिक जांच में सामने आया था कि कई नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर रोधी दवाओं पर औसत ट्रेड मार्क-अप 170 प्रतिशत के करीब था। कई मामलों में तो यह मुनाफा 700 प्रतिशत तक की अत्यधिक ऊंचाई पर पहुंच रहा था। वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के इस मनमाने मुनाफे पर 30 प्रतिशत की सीमा तय होने से इन दवाओं के बाजार मूल्य में 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आने की उम्मीद जताई गई है।

इस मूल्य नियंत्रण सूची में शामिल 137 दवाएं विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार और आधुनिक इम्यूनोथेरेपी प्रोटोकॉल में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती हैं। इनमें निवोलुमैब, ओलापारिब, डेनोसुमैब और टोपोटेकन जैसी प्रमुख और नियमित रूप से लिखी जाने वाली जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।

## 2019 के पिछले हस्तक्षेप का रिकॉर्ड
कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का यह तरीका पहली बार नहीं अपनाया गया है। इससे पहले 2019 में भी नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने 42 कैंसर रोधी दवाओं पर 30 प्रतिशत का ट्रेड मार्जिन कैप लगाया था। उस समय किए गए इस नीतिगत सुधार के कारण 526 प्रमुख ब्रांड्स की दवाओं के दामों में 90 प्रतिशत तक की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई थी। इस पूरे कदम से जुड़ी विस्तृत अधिसूचना, प्रशासनिक आदेश और दवाओं की नई कीमतों का ब्योरा नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है।

## इसका आप पर असर
कैंसर की महंगी दवाओं पर सरकारी सीमा लागू होने से मरीजों के इलाज के मासिक खर्च में सीधी गिरावट आएगी।

- **भारत में:** नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी के फैसले से देशभर में कैंसर की 137 दवाओं पर मुनाफा 30 प्रतिशत तक सीमित हो गया है। इसके चलते विभिन्न राज्यों के मरीजों को महंगे ब्रांड्स और इम्यूनोथेरेपी दवाओं के बिल में 70 प्रतिशत तक की राहत मिल सकेगी।
- **असम में:** राज्य प्रशासन ने 9 नवंबर से सभी निजी व सरकारी अस्पतालों तथा मेडिकल स्टोरों के लिए नई दरें लागू करना अनिवार्य कर दिया है। मरीज और उनके तीमारदार दुकानों पर लगी संशोधित रेट लिस्ट देखकर बिल की जांच कर सकते हैं और तय दर से अधिक पैसे देने से बच सकते हैं।
- **दवा दुकानों और अस्पतालों पर असर:** सभी खुदरा विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटरों को 9 नवंबर से पहले अपनी बिलिंग प्रणाली में नई कीमतें अपडेट करनी होंगी। ऐसा न करने या पुराने अधिक रेट पर दवा बेचने वाले संस्थानों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कानूनी मुकदमा चलेगा।
- **मरीजों के परिजनों के लिए उपाय:** इलाज करा रहे परिजन अस्पताल या फार्मेसी से खरीदारी करते समय नई दरों की रसीद मांग सकते हैं। यदि कोई संस्थान पुरानी एमआरपी पर दवा बेचता है तो 90 दिनों तक चलने वाले विशेष निगरानी अभियान के दौरान सीधे ड्रग्स कंट्रोल विभाग से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
कैंसर की आवश्यक दवाओं पर मनमाना मुनाफा वसूले जाने और मरीजों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के चलते नियामक संस्था को हस्तक्षेप करना पड़ा।

- **अत्यधिक ट्रेड मार्क-अप:** जांच में सामने आया कि नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं पर औसत मार्क-अप लगभग 170 प्रतिशत और कुछ मामलों में 700 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इस असामान्य मुनाफे की वजह से आम मरीजों तक पहुंचते-पहुंचते जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।
- **जनहित में विशेष कानूनी अधिकार:** अत्यधिक कीमतों को रोकने के लिए नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 का इस्तेमाल किया। यह धारा नियामक को आपात स्थिति और व्यापक लोक कल्याण के लिए सीधे मूल्य सीमा निर्धारित करने की शक्ति देती है।
- **2019 के सुधार की सफलता:** सरकार ने 2019 में 42 एंटी-कैंसर दवाओं पर इसी प्रकार का 30 प्रतिशत मार्जिन कैप लगाया था। उस कदम से 526 ब्रांड्स के दामों में 90 प्रतिशत तक की कमी आई थी, जिसके सकारात्मक परिणामों ने मौजूदा 137 दवाओं के विस्तार का आधार तैयार किया।

## सवाल-जवाब

### 1. असम में कैंसर दवाओं की नई कीमतें कब से लागू हो रही हैं?
असम ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के आदेशानुसार नई घटी हुई कीमतें 9 नवंबर से पूरे राज्य में अनिवार्य रूप से लागू हो रही हैं।

### 2. इस आदेश के तहत कैंसर की कितनी दवाओं के दाम कम किए गए हैं?
इस नियामक आदेश के अंतर्गत नॉन-शेड्यूल्ड श्रेणी की कुल 137 एंटी-कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी की गई है।

### 3. दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर कितनी सीमा लगाई गई है?
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने चिन्हित दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत पर सीमित किया है।

### 4. इस फैसले से कैंसर की दवाओं के दाम कितने प्रतिशत तक घट सकते हैं?
मौजूदा मूल्य संरचना के आधार पर इन 137 दवाओं की खुदरा कीमतों में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है।

### 5. नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए असम में क्या कदम उठाया गया है?
प्रशासन ने राज्यभर के मेडिकल प्रतिष्ठानों की निगरानी और जांच के लिए 90 दिनों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाने का फैसला किया है।

### 6. दुकानों पर अधिक कीमत वसूलने पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

### 7. इस मूल्य नियंत्रण सूची में कौन सी प्रमुख दवाएं शामिल हैं?
इस सूची में इम्यूनोथेरेपी और कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली निवोलुमैब, ओलापारिब, डेनोसुमैब और टोपोटेकन जैसी प्रमुख दवाएं शामिल हैं।

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