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  "type": "article",
  "title": "असम में कनेक्टिविटी और पर्यटन को गति देने पांच नए रोपवे प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी",
  "summary": "असम कैबिनेट ने राज्य में पांच रणनीतिक रोपवे कॉरिडोर तैयार करने के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी के साथ साझेदारी को हरी झंडी दे दी है।",
  "content": "असम में पर्यटन को बढ़ावा देने और पहाड़ी व भीड़भाड़ वाले इलाकों में आवागमन सुगम बनाने के लिए पांच नए रोपवे प्रोजेक्ट्स के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राज्य कैबिनेट ने नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) के साथ मिलकर रोपवे डेवलपमेंट एग्रीमेंट पर आधिकारिक मुहर लगाई है। इस संयुक्त पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में ट्रैफिक दबाव घटाना, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मजबूत करना और प्रमुख धार्मिक व प्राकृतिक आकर्षणों तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाना है।\n\nसंयुक्त उपक्रम में केंद्र और राज्य की भागीदारी\nइस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन आने वाले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी NHLML राज्य सरकार के साथ साझेदारी करेगी। इस प्रस्तावित संयुक्त कंपनी में केंद्र सरकार के पास 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि असम सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत रखी जाएगी।\n\n \nअसम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर यह विशेष कंपनी गठित की जा रही है, जो राज्य भर में पांच रोपवे परियोजनाओं का निर्माण और प्रबंधन संभालेगी। उन्होंने इस पहल को राज्य में आवागमन और क्षेत्रीय संपर्क के लिए एक बड़ा कदम बताया।\n\nइन पांच प्रमुख मार्गों पर बनेंगे रोपवे कॉरिडोर\nप्रस्तावित योजना के तहत राज्य के चार अलग-अलग जिलों में पांच रूट तय किए गए हैं\n\n• कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर: कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में बनने वाला यह मार्ग 1.43 किलोमीटर लंबा होगा, जिससे मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सीधी चढ़ाई और सड़क जाम से मुक्ति मिलेगी।\n• खानापारा से गुवाहाटी रेलवे स्टेशन: कामरूप मेट्रोपॉलिटन में ही 11 किलोमीटर लंबा यह लंबा कॉरिडोर शहरी आवागमन को आसान बनाएगा।\n• गंगानगर पार्ट-VII से भुवन पहाड़ महादेव मंदिर: कछार जिले में 2.80 किलोमीटर का यह रोपवे तीर्थयात्रियों को पहाड़ी मंदिर तक पहुंचाएगा।\n• जतिंगा बर्ड वाचिंग टॉवर से हेम्पेउपेत पीक: दीमा हसाओ जिले में 3.50 किलोमीटर का मार्ग प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा।\n• अग्निगढ़ से भैरबी मंदिर: सोनितपुर जिले में 1.80 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला यह केबल नेटवर्क ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को जोड़ेगा।\n\nपरियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति\nमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर तक के 1.43 किलोमीटर वाले रोपवे प्रोजेक्ट पर काम काफी आगे बढ़ चुका है। वहीं दूसरी ओर, बाकी बचे चार प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स अभी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार किए जाने से पहले के चरण में हैं। डीपीआर पूरा होने के बाद इन सभी मार्गों पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nअसम में पांच नए रोपवे बनने से स्थानीय नागरिकों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों के ट्रैफिक जाम से सीधी राहत मिलेगी।\n\n• भारत भर के यात्रियों के लिए: कामाख्या मंदिर, भुवन पहाड़ और जतिंगा जैसे दुर्गम पर्यटन स्थलों पर पहुंचना काफी आसान और समय बचाने वाला होगा। इससे देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को खड़ी चढ़ाई और घंटों के सड़क जाम से मुक्ति मिलेगी।\n• असम में: गुवाहाटी में खानापारा से रेलवे स्टेशन तक 11 किलोमीटर का लंबा रोपवे शहर के रोजाना के ट्रैफिक को काफी हद तक कम करेगा। स्थानीय कारोबारियों और होटल उद्योग को बढ़ते पर्यटन से नए आर्थिक अवसर मिलेंगे।\n• समय और सुरक्षा की बचत: पहाड़ी इलाकों में केबल कार की सुविधा मिलने से खराब मौसम या भूस्खलन के दौरान भी सुरक्षित यात्रा विकल्प उपलब्ध रहेगा। तीर्थयात्री और बुजुर्ग बिना किसी शारीरिक परेशानी के सीधे मंदिरों तक पहुंच सकेंगे।\n• रोजगार और क्षेत्रीय विकास: कछार, दीमा हसाओ और सोनितपुर जैसे जिलों में नए टूरिज्म प्वाइंट्स विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, ट्रांसपोर्ट और हॉस्पिटैलिटी में नए काम शुरू होंगे। इससे दूरदराज के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअसम के कई प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थल दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित हैं, जहां संकरी सड़कों के कारण भारी ट्रैफिक जाम और यात्रा में अत्यधिक समय लगता है।\n\n• शहरी भीड़ और कठिन भौगोलिक स्थिति: गुवाहाटी जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव है, जबकि कामाख्या और दीमा हसाओ जैसे इलाके खड़ी पहाड़ियों पर बसे हैं। इन जगहों पर पारंपरिक सड़कों का विस्तार करना भौगोलिक सीमाओं और जंगलों के कारण बहुत चुनौतीपूर्ण है।\n• केंद्र और राज्य का संयुक्त प्रयास: राज्य सरकार ने भारी वित्तीय लागत और तकनीकी जटिलताओं को हल करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय की विशेषज्ञ एजेंसी NHLML के साथ 51:49 की हिस्सेदारी वाली कंपनी बनाने का रास्ता चुना। इससे फंडिंग और आधुनिक तकनीक दोनों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी है।\n• आगामी कदम और डीपीआर प्रक्रिया: कामाख्या प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है, जबकि अन्य चार रूटों पर डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद वित्तीय स्वीकृति और टेंडरिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असम कैबिनेट ने किन पांच रोपवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है?\nकैबिनेट ने कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर, खानापारा से गुवाहाटी स्टेशन, गंगानगर से भुवन पहाड़, जतिंगा से हेम्पेउपेत पीक और अग्निगढ़ से भैरबी मंदिर के लिए रोपवे को मंजूरी दी है।\n\n2. इन रोपवे परियोजनाओं को कौन सी एजेंसी विकसित करेगी?\nइन परियोजनाओं को असम सरकार और एनएचएआई की अनुषंगी कंपनी नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) मिलकर एक संयुक्त कंपनी के रूप में विकसित करेंगे।\n\n3. इस संयुक्त उपक्रम में केंद्र और असम सरकार की कितनी हिस्सेदारी होगी?\nप्रस्तावित व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के पास 51 प्रतिशत और असम सरकार के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।\n\n4. कौन सा रोपवे कॉरिडोर सबसे लंबा है?\nकामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में खानापारा से गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के बीच प्रस्तावित 11 किलोमीटर का कॉरिडोर सबसे लंबा है।\n\n5. कामाख्या मंदिर रोपवे प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है?\nमुख्यमंत्री के अनुसार 1.43 किलोमीटर लंबे कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर रोपवे पर काम काफी आगे बढ़ चुका है, जबकि बाकी चार परियोजनाएं अभी प्री-डीपीआर चरण में हैं।",
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