असम में तबाही के बीच राज्यपाल से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, बाढ़ संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री से बाढ़ और नदी कटाव के संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने और एक उच्चस्तरीय कार्यबल बनाने का आग्रह किया है। असम में बाढ़ और नदी के कटाव से बिगड़े हालातों के बीच असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की। राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजीत दास के नेतृत्व में पहुंचे इस शिष्टमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की गई कि राज्य की इस गंभीर प्राकृतिक आपदा को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए। मौत का आंकड़ा बढ़कर 103 हुआ राज्य में बुधवार को जलभराव की स्थिति में कुछ सुधार जरूर दर्ज किया गया और चार जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 87,000 रह गई। हालांकि, इस दौरान दो और लोगों की जान जाने से बाढ़ के कारण जान गंवाने वालों की कुल संख्या 103 तक पहुंच गई है। पानी उतरने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में आम जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक प्रभावित क्षेत्र कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में राज्य के भौगोलिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि असम का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा, यानी तकरीबन 31.05 लाख हेक्टेयर जमीन, बाढ़ के खतरे के दायरे में आती है। यह आंकड़ा 10.2 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है। लगातार आने वाली बाढ़ के कारण चाय बागान श्रमिकों, किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पूरी तरह ठप हो गई है और अनगिनत परिवार बेघर होकर विस्थापन झेल रहे हैं। उच्चस्तरीय कार्यबल के गठन की सिफारिश इस स्थायी संकट का ठोस समाधान निकालने के लिए पार्टी ने केंद्र सरकार से एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित करने का आग्रह किया है। इस प्रस्तावित समिति में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है ताकि जल प्रबंधन और कटाव रोकने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जा सके। इसका आप पर असर • असम में: बाढ़ से प्रभावित 87,000 लोगों, चाय बागान मजदूरों, किसानों और बेघर परिवारों के पुनर्वास तथा राहत कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। • भारत में: असम की 31.05 लाख हेक्टेयर बाढ़-संभावित भूमि के लिए केंद्रीय टास्क फोर्स बनने से देश में आपदा प्रबंधन की रणनीति मजबूत होगी। सवाल-जवाब 1. एपीसीसी प्रतिनिधिमंडल ने असम के राज्यपाल से क्या मांग की? प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की कि असम में बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी कटाव के संकट को राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए। 2. राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मिलने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया? प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एपीसीसी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजीत दास ने किया। 3. असम बाढ़ में मृतकों की संख्या और प्रभावित लोगों का वर्तमान आंकड़ा क्या है? दो और मौतों के बाद कुल मृतकों की संख्या 103 हो गई है, जबकि चार जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 87,000 रह गई है। 4. ज्ञापन के अनुसार असम की कितनी जमीन बाढ़ के खतरे में है? असम का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा (31.05 लाख हेक्टेयर) बाढ़-संभावित क्षेत्र है, जो 10.2 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है। 5. बाढ़ संकट से निपटने के लिए कांग्रेस पार्टी ने क्या उपाय सुझाया है? पार्टी ने केंद्र और राज्य के अधिकारियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रभावित लोगों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्चस्तरीय कार्यबल गठित करने का सुझाव दिया। https://trendkia.com/assam/assam-men-tabahi-ke-bicha-rajyapala-se-mila-congress-pratinidhimndala-barha-snkata-ko-rashtriya-samasya-ghoshita-karane-ki-manga-16217 TrendKia — Har trend, sabse pehle.