# असम ने कूलिंग के लिए बढ़ती बिजली की मांग से निपटने के लिए नया एक्शन प्लान किया लॉन्च

> असम सरकार ने राज्य में कूलिंग की बढ़ती मांग और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए 'स्टेट कूलिंग एक्शन प्लान' शुरू किया है, जिसके तहत 2040 तक बिजली की भारी खपत को नियंत्रित किया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/assam-ne-kulinga-ke-lie-barhati-bijali-ki-manga-se-nipatane-ke-lie-naya-ekshana-plana-kiya-loncha-32680 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम समाचार, स्टेट कूलिंग एक्शन प्लान, जयंत मल्लाबरुआ, पर्यावरण संरक्षण, बिजली की मांग, अमृत वृक्ष आंदोलन

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और राज्य में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को संतुलित करने की दिशा में असम सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में कूलिंग की बढ़ती जरूरतों को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल तरीकों से पूरा करने के लिए 'असम स्टेट कूलिंग एक्शन प्लान' (ACAP) को औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया है। असम के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने गुवाहाटी के खानापारा स्थित असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय विश्व ओजोन दिवस 2026 कार्यक्रम के दौरान इस विशेष योजना की शुरुआत की। इस साल के कार्यक्रम का मुख्य विषय "ग्लोबल एक्शन फॉर अ कूलर प्लैनेट" रखा गया था, जो वैश्विक स्तर पर बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल देता है।

 

## चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित एक अनूठी पहल

असम देश के उन शुरुआती राज्यों में शामिल हो गया है जिसने राज्य स्तर पर एक एकीकृत कूलिंग एक्शन प्लान तैयार किया है। यह नई रणनीति मुख्य रूप से चार सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनमें भवन निर्माण (बिल्डिंग्स), कोल्ड चेन, उद्योग और परिवहन क्षेत्र शामिल हैं। यह योजना राष्ट्रीय स्तर के 'इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान' के उद्देश्यों को असम की स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का काम करती है। इसे तकनीकी स्तर पर वैश्विक शोध संस्थान WRI इंडिया के सहयोग से असम क्लाइमेट चेंज मैनेजमेंट सोसाइटी (ACCMS) द्वारा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, ऊर्जा दक्षता में सुधार करना और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

 

## 2040 तक दोगुनी से अधिक हो जाएगी बिजली की मांग

इस कूलिंग एक्शन प्लान में जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि आने वाले समय में असम को बिजली की भारी मांग का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कूलिंग यानी घरों और उद्योगों को ठंडा रखने वाले उपकरणों के कारण होने वाली बिजली की मांग वर्ष 2040 तक दोगुनी से भी अधिक होने का अनुमान है। यह मांग वर्तमान के 3,576 GWh से बढ़कर 8,445 GWh तक पहुंच सकती है। इस भारी मांग को नियंत्रित करने और बिजली ग्रिड पर दबाव कम करने के लिए ही इस योजना के तहत रेफ्रिजरेंट्स का जिम्मेदारी से प्रबंधन करने और कम बिजली खपत वाले उपकरणों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

 

## पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी विकास का तालमेल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने कहा कि असम की विकास यात्रा को पर्यावरण की सुरक्षा के साथ जोड़कर देखना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यह कूलिंग एक्शन प्लान भविष्य की चुनौतियों के लिए राज्य को तैयार करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी सरकारी विभाग मिलकर जमीनी स्तर पर इसे कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।

मंत्री ने आधुनिक तकनीकी समाधानों के साथ-साथ प्राकृतिक तरीकों से तापमान को नियंत्रित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक के भरोसे रहने के बजाय हमें राज्य के हरित क्षेत्र को बढ़ाना होगा और प्राकृतिक जल स्रोतों व जंगलों की रक्षा करनी होगी। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरती को रहने योग्य बना सकते हैं।

 

## जनभागीदारी और जन आंदोलन पर विशेष ध्यान

इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों का जिक्र करते हुए जयंत मल्लाबरुआ ने 'अमृत वृक्ष आंदोलन' और 'वृक्ष बंधु' जैसी बड़ी योजनाओं की चर्चा की। इन पहलों के तहत छात्रों, स्वयं सहायता समूहों, वन सुरक्षा बल और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए जा रहे हैं। वन मंत्री ने कहा कि जब देश के युवा और आम नागरिक खुद पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी लेते हैं, तो उन पेड़ों के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने राज्य के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और कार्यस्थलों पर भी पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाएं और बिजली बचाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करें।

 

## अंतरराष्ट्रीय संधियों के क्रियान्वयन और प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम के दौरान ओजोन परत के संरक्षण से जुड़े वैश्विक समझौतों जैसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता और किगाली संशोधन के 10 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक सफर को भी रेखांकित किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर असम सरकार के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पर्यावरण विशेषज्ञ मौजूद रहे। इनमें विशेष मुख्य सचिव महेंद्र कुमार यादव, वन बल के प्रमुख और प्रधान मुख्य वन संरक्षक संदीप कुमार, पर्यावरण एवं वन विभाग के आयुक्त और सचिव डॉ ओम प्रकाश, पीसीसीएफ (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ विनय गुप्ता, ACCMS के सीईओ डॉ सत्येंद्र सिंह और WRI इंडिया के ऊर्जा कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक भरत जयराज प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता, छात्र, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और पर्यावरण कार्यकर्ता भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

## इसका आप पर असर
यह नीति सीधे तौर पर प्रभावित करती है कि आने वाले दशकों में पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा संसाधनों और तापमान का प्रबंधन कैसे किया जाएगा।

  - **अखिल भारतीय स्तर पर:** देश के अन्य राज्य भी टिकाऊ शहरी कूलिंग योजनाएं बनाने के लिए असम के इस स्थानीय मॉडल को अपना सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को गति मिलेगी।

  - **असम में:** आम नागरिकों को भविष्य में घरों के निर्माण के लिए ऊर्जा-कुशल नियमों का पालन करना होगा, जिससे स्मार्ट कूलिंग तकनीकों के मानकीकरण के कारण बिजली के बिलों में कमी आने की उम्मीद है।

  - **व्यवसायों के लिए:** छोटे और बड़े उद्योगों के साथ-साथ कोल्ड-स्टोरेज ऑपरेटरों को भी पर्यावरण के अनुकूल रेफ्रिजरेंट्स का उपयोग करना होगा, जिसके लिए उन्हें 2040 की समयसीमा से पहले अपने उपकरणों में बदलाव करना होगा।

  - **स्थानीय समुदायों के लिए:** अमृत वृक्ष आंदोलन जैसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में जनभागीदारी बढ़ेगी, जिससे नागरिकों को अपने क्षेत्रों के तापमान को सीधे तौर पर कम करने का अवसर मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
असम स्टेट कूलिंग एक्शन प्लान को तैयार करने का निर्णय तेजी से बढ़ते शहरीकरण, क्षेत्रीय तापमान में वृद्धि और राज्य के बिजली बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव के कारण लिया गया है।

  - **बिजली की बढ़ती मांग:** इस नीति का मुख्य कारण यह अनुमान है कि असम में कूलिंग से जुड़ी बिजली की मांग 2040 तक 3,576 GWh से दोगुनी से अधिक होकर 8,445 GWh हो जाएगी, जिसके लिए तत्काल ऊर्जा-कुशल उपायों की आवश्यकता है।

  - **राष्ट्रीय नीति का पालन:** इस योजना को राष्ट्रीय स्तर के इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के साथ राज्य के प्रयासों को जोड़ने और विशिष्ट क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।

  - **अंतरराष्ट्रीय समझौते:** यह योजना वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है, जो हानिकारक ओजोन-क्षयकारी पदार्थों को धीरे-धीरे कम करने के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और किगाली संशोधन के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. असम स्टेट कूलिंग एक्शन प्लान (ACAP) क्या है?
यह ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों और रेफ्रिजरेंट्स के जिम्मेदारी से प्रबंधन के माध्यम से कूलिंग की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया एक राज्य स्तरीय नीतिगत ढांचा है।

### 2. ACAP के तहत कौन से प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं?
इस योजना के तहत चार मुख्य क्षेत्रों को शामिल किया गया है: भवन निर्माण (बिल्डिंग्स), कोल्ड चेन, उद्योग और परिवहन।

### 3. 2040 तक असम में कूलिंग से जुड़ी बिजली की मांग कितनी बढ़ने की उम्मीद है?
इस मांग के दोगुने से अधिक होने का अनुमान है, जो 3,576 GWh से बढ़कर 8,445 GWh हो जाएगी।

### 4. इस एक्शन प्लान को तैयार करने में किसने सहयोग किया है?
इसे असम क्लाइमेट चेंज मैनेजमेंट सोसाइटी द्वारा WRI इंडिया के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है।

### 5. इस योजना में प्राकृतिक समाधानों की क्या भूमिका है?
यह योजना क्षेत्रीय तापमान को कम करने के लिए तकनीकी कूलिंग सिस्टम के साथ-साथ हरित क्षेत्र को बढ़ाने और प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणालियों की रक्षा करने पर जोर देती है।

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