बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में रीमा दास बनीं न्यू करेंट्स अवार्ड की जूरी सदस्य असमिया फिल्म निर्माता रीमा दास बुसान फिल्म महोत्सव के 31वें संस्करण में न्यू करेंट्स अवार्ड की जूरी में शामिल होंगी, जहां उनकी नई फिल्म नॉट ए हीरो का एशियन प्रीमियर भी होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वाली असमिया फिल्म निर्देशक रीमा दास दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। महोत्सव के 31वें संस्करण में उन्हें न्यू करेंट्स अवार्ड प्रतियोगिता के तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल में शामिल किया गया है। यह खास मुकाबला पूरे एशिया से उभरती हुई नई सिनेमाई प्रतिभाओं को मंच देने और उनके काम को सम्मान प्रदान करने के लिए आयोजित किया जाता है। तीन सदस्यीय जूरी में शामिल हुए अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई चेहरे इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के जूरी पैनल में रीमा दास के साथ दक्षिण कोरियाई अभिनेत्री शिम यूं-क्युंग और चीनी फिल्म निर्माता शान जुओलोंग शामिल हैं। शिम यूं-क्युंग ने 'सनी', 'मिस ग्रैनी' और 'द जर्नलिस्ट' जैसी चर्चित फिल्मों में उल्लेखनीय अभिनय किया है। वहीं निर्माता शान जुओलोंग कई ऐसी फिल्मों के निर्माण से जुड़े रहे हैं जिनका प्रदर्शन कान, वेनिस और बर्लिन जैसे दुनिया के अग्रणी फिल्म समारोहों में हो चुका है। न्यू करेंट्स अवार्ड के तहत चयनित विजेताओं को 2 करोड़ दक्षिण कोरियाई वॉन (लगभग 14,719 अमेरिकी डॉलर) की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। बुसान महोत्सव से रहा है रीमा दास का गहरा जुड़ाव रीमा दास के सिने करियर का इस दक्षिण कोरियाई फिल्म समारोह से बेहद पुराना और मजबूत नाता रहा है। उनके निर्देशन में बनी कई बेहतरीन फिल्में पूर्व में बुसान के विभिन्न मंचों पर प्रदर्शित की जा चुकी हैं। इनमें 'बुलबुल कैन सिंग' और 'तोराज हसबैंड' प्रमुख हैं। साल 2024 में उनकी बहुप्रशंसित फिल्म 'विलेज रॉकस्टार्स 2' का वर्ल्ड प्रीमियर भी इसी समारोह में हुआ था, जहां उसने बेहतरीन सिनेमा के लिए दिया जाने वाला किम जिसेक पुरस्कार अपने नाम किया था। इसके अलावा उनका एक अन्य आगामी प्रोजेक्ट 'मालती, माय लव' भी बीआईएफएफ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित होने वाले एशियन प्रोजेक्ट मार्केट में शामिल किया गया था। नई फिल्म 'नॉट ए हीरो' का होगा एशियन प्रीमियर निर्णायक की भूमिका निभाने के साथ-साथ रीमा दास अपनी नवीनतम निर्देशित फिल्म 'नॉट ए हीरो' के साथ भी इस बार बुसान पहुंच रही हैं। इस फिल्म का इस महोत्सव के दौरान एशियन प्रीमियर तय किया गया है। अपनी इस नई जिम्मेदारी पर बात करते हुए रीमा दास ने साझा किया कि एक फिल्मकार के रूप में उनकी यात्रा में बुसान हमेशा से बेहद खास हिस्सा रहा है। वे अपनी फिल्मों के साथ यहां आती रही हैं, दर्शकों और अन्य निर्देशकों से मिली हैं और उन्होंने अलग-अलग नजरियों से इस समारोह को महसूस किया है। अब एक निर्णायक सदस्य के रूप में लौटना उनके लिए भावनात्मक रूप से अत्यंत अर्थपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब उनकी अपनी फिल्म 'नॉट ए हीरो' का एशियन प्रीमियर भी यहीं हो रहा है, तो ऐसे अवसर पर यह जिम्मेदारी मिलना उनके लिए और भी खास हो जाता है। उन्होंने आगे कहा कि वे पूरे एशिया से उभरती नई आवाजों को देखने, अहम चर्चाओं में भाग लेने और बुसान में यादगार समय बिताने के लिए बेहद उत्सुक हैं। 31वां बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक बुसान सिनेमा सेंटर समेत शहर के अन्य प्रमुख सांस्कृतिक केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा। इसका आप पर असर असम की स्वतंत्र फिल्मकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान से भारतीय और क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक मंचों पर नई पहचान मिलेगी। • भारत में: स्वतंत्र भारतीय फिल्म निर्माताओं और क्षेत्रीय सिनेमा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों के रास्ते और सुगम होंगे। इससे वैश्विक फिल्म फेस्टिवलों में भारतीय प्रोजेक्ट्स के चयन और फंडिंग के अवसरों को बल मिलेगा। • असम में: पूर्वोत्तर भारत के कलाकारों और कहानीकारों के वैश्विक प्रतिनिधित्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज होगी। स्थानीय सिनेमा प्रेमियों और युवा निर्देशकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कहानियां प्रस्तुत करने का सीधा प्रोत्साहन मिलेगा। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: दर्शकों को एशियाई सिनेमा की नई और विविधतापूर्ण कहानियों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा। प्रतियोगिता में शामिल चयनित एशियाई फिल्मों को व्यापक वैश्विक दर्शक वर्ग प्राप्त होगा। • फिल्म उद्योग के लिए: सह-निर्माण और एशियाई सिनेमाई नेटवर्क के बीच भारतीय फिल्मकारों की भूमिका मजबूत होगी। इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर क्रॉस-कंट्री सिनेमाई सहयोग बढ़ेगा। ऐसा क्यों हुआ बुसान फिल्म महोत्सव ने एशियाई सिनेमा में रीमा दास के लगातार उल्लेखनीय योगदान और उनकी वैश्विक पहचान को देखते हुए उन्हें न्यू करेंट्स अवार्ड के निर्णायक मंडल में शामिल किया है। • महोत्सव से निरंतर जुड़ाव: रीमा दास की पूर्व फिल्में जैसे 'बुलबुल कैन सिंग' और 'तोराज हसबैंड' पहले भी बुसान में प्रदर्शित हो चुकी हैं। इसके अलावा 2024 में 'विलेज रॉकस्टार्स 2' ने यहीं प्रतिष्ठित किम जिसेक पुरस्कार जीता था। • स्वतंत्र सिनेमा में पहचान: सीमित संसाधनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का सार्थक सिनेमा बनाने के उनके अनुभव को एशियाई मंचों पर सराहा गया है। इसी विशिष्ट दृष्टि के कारण उन्हें नई एशियाई प्रतिभाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी दी गई। • समारोह का आगामी शेड्यूल: 31वें संस्करण के आयोजन की तैयारियों के तहत फेस्टिवल प्रबंधन ने अंतरराष्ट्रीय जूरी सदस्यों की आधिकारिक घोषणा की। यह महोत्सव 6 से 15 अक्टूबर तक दक्षिण कोरिया में आयोजित किया जा रहा है। सवाल-जवाब 1. रीमा दास को बुसान फिल्म महोत्सव में कौन सी जिम्मेदारी दी गई है? उन्हें 31वें बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित न्यू करेंट्स अवार्ड के लिए तीन सदस्यीय जूरी का सदस्य नियुक्त किया गया है। 2. न्यू करेंट्स अवार्ड जूरी में रीमा दास के साथ अन्य कौन से सदस्य शामिल हैं? इस जूरी में उनके साथ दक्षिण कोरियाई अभिनेत्री शिम यूं-क्युंग और चीनी फिल्म निर्माता शान जुओलोंग शामिल हैं। 3. न्यू करेंट्स अवार्ड के विजेता को कितनी पुरस्कार राशि दी जाती है? इस पुरस्कार के तहत 2 करोड़ दक्षिण कोरियाई वॉन (लगभग 14,719 अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि दी जाती है। 4. इस वर्ष बुसान फिल्म महोत्सव में रीमा दास की कौन सी फिल्म दिखाई जाएगी? महोत्सव में उनकी नवीनतम फिल्म 'नॉट ए हीरो' का एशियन प्रीमियर आयोजित किया जाएगा। 5. रीमा दास की किस फिल्म ने बुसान में किम जिसेक पुरस्कार जीता था? साल 2024 में उनकी फिल्म 'विलेज रॉकस्टार्स 2' का वर्ल्ड प्रीमियर बुसान में हुआ था और उसने किम जिसेक पुरस्कार जीता था। 6. 31वां बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव कब और कहां आयोजित होगा? यह महोत्सव 6 से 15 अक्टूबर तक दक्षिण कोरिया के बुसान सिनेमा सेंटर और शहर के अन्य केंद्रों में आयोजित किया जाएगा। प्रेरणा और सबक असम के ग्रामीण अंचल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय निर्णायक मंडल तक का रीमा दास का यह सफर स्वतंत्र रचनाकारों के लिए प्रेरणादायक है। • साधनों की कमी को बाधा न बनाएं: सीमित बजट और न्यूनतम संसाधनों के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाला रचनात्मक काम संभव है। प्रामाणिक कहानियां दुनिया भर के दर्शकों को प्रभावित करती हैं। • अपनी मिट्टी की जड़ों से जुड़ाव: अपनी क्षेत्रीय संस्कृति और स्थानीय कहानियों पर भरोसा करने से वैश्विक स्तर पर अनूठी पहचान मिलती है। स्थानीय परिवेश की कहानियां ही अक्सर सबसे अधिक सार्वभौमिक साबित होती हैं। • निरंतरता और धैर्य का महत्व: एक के बाद एक प्रोजेक्ट्स पर लगातार काम करते रहने से वैश्विक मंचों पर स्थायी जगह बनती है। बुसान में प्रतियोगी से लेकर जूरी सदस्य बनने का सफर सतत रचनात्मक प्रयास का परिणाम है। https://trendkia.com/assam/busan-antararashtriya-philma-mahotsava-men-rima-das-banin-new-currents-award-ki-juri-sadasya-36360 TrendKia — Har trend, sabse pehle.