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  "type": "article",
  "title": "छह सदी राज करने वाले अहोम वंश की राजधानी रंगपुर-शिवसागर अब यूनेस्को की दहलीज पर",
  "summary": "भारत ने असम में अहोम राजवंश की छह सदी पुरानी राजधानी रंगपुर-शिवसागर परिसर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए औपचारिक रूप से नामांकित किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे 2024 में मिली चराईदेव मोइदम की मान्यता की अगली कड़ी बताया।",
  "content": "असम में अहोम राजवंश की करीब छह सदी पुरानी राजधानी के अवशेषों को अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जगह दिलाने की कोशिश शुरू हो गई है। भारत ने रंगपुर-शिवसागर परिसर को इसके लिए औपचारिक रूप से नामित कर दिया है। यह जानकारी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर साझा की।\n\nछह सदी तक अटूट रहा अहोम राज\nअहोम राजवंश ने 1228 में असम में अपनी सत्ता स्थापित की थी और उसके बाद 1826 तक लगातार ब्रह्मपुत्र घाटी पर राज किया। इतने लंबे समय तक बिना किसी बड़े व्यवधान के एक ही राजवंश का शासन चलना अपने आप में खास बात मानी जाती है। रंगपुर-शिवसागर परिसर शिवसागर के ऐतिहासिक राजधानी क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें उस दौर के मंदिर, राजमहल, बड़े जलाशय और उन्नत इंजीनियरिंग के नमूने शामिल हैं, जो अहोम शासकों की वास्तुकला और तकनीकी समझ को दिखाते हैं।\n\n \n\nरंग घर, एशिया का सबसे पुराना एम्फीथिएटर\nइस परिसर में शामिल इमारतों में सबसे ज्यादा पहचान रंग घर की है। मुख्यमंत्री सरमा इसे एशिया का सबसे पुराना बचा हुआ एम्फीथिएटर बताते हैं और आज भी यह शिवसागर में अहोम इंजीनियरिंग की सबसे स्पष्ट झलक देता है।\n\nनामांकन की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई\nयूनेस्को में भारत के स्थायी मिशन ने 19.06.2026 को रंगपुर-शिवसागर परिसर को औपचारिक रूप से नामांकित किया, और इसे यूनेस्को की श्रेणी (iii) और (iv) के तहत शामिल करने का अनुरोध किया गया है। ये श्रेणियां किसी सांस्कृतिक परंपरा की गवाही और किसी स्थापत्य समूह की असाधारणता को परखती हैं। सरमा ने शुक्रवार रात एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी सार्वजनिक की और बताया कि नामांकन का कागजी काम पहले ही पूरा हो चुका है।\n\nचराईदेव मोइदम की कड़ी से जुड़ाव\nअसम के लिए यह पहला मौका नहीं है जब अहोम विरासत को यूनेस्को से मान्यता दिलाने की कोशिश हो रही हो। अहोम राजाओं के समाधि स्थल चराईदेव मोइदम को 2024 में ही यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा चुका है। सरमा ने नई नामांकन को उसी सफलता की अगली कड़ी बताया। उन्होंने कहा, \"साथ में ये दोनों स्थल अहोम की पूरी कहानी कहते हैं, एक जगह राजवंश आराम करता है तो दूसरी जगह उसने राज किया।\" इस तरह उन्होंने चराईदेव के समाधि स्थल को शिवसागर की सत्ता की धरती से जोड़ा।\n\nकेंद्र सरकार को धन्यवाद\nसरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद किया और उनके प्रयासों को असम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर में पहचान दिलाने की दिशा में एक \"अभूतपूर्व पहल\" बताया। मुख्यमंत्री के इस पोस्ट से साफ है कि राज्य और केंद्र दोनों मिलकर असम के अहोम कालीन स्थलों को दुनिया की बाकी बड़ी धरोहरों की सूची में शामिल कराने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nअगर यूनेस्को यह नामांकन मंजूर करता है, तो असम को अहोम काल का दूसरा विश्व धरोहर स्थल मिल जाएगा, जिसका सीधा असर वहां आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं की संख्या पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: मान्यता मिलने से देश की यूनेस्को सूची में एक और नाम जुड़ जाएगा, जिससे बाकी राज्यों के लिए भी अपनी विरासत को आगे बढ़ाने का रास्ता आसान होगा। इससे भारतीय शोधकर्ताओं और संरक्षण एजेंसियों को बड़े और बहु-स्थल वाले धरोहर परिसरों के रखरखाव का एक बड़ा उदाहरण भी मिलेगा।\n• शिवसागर, असम में: मान्यता मिलने पर रंग घर और आसपास के परिसर में देसी और विदेशी दोनों तरह के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे शिवसागर जैसे शहर में होटल, गाइड और स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सकता है, जहां अभी पर्यटकों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम है।\n• रखरखाव पर असर: यूनेस्को टैग मिलने के साथ आमतौर पर सख्त संरक्षण नियम और निगरानी भी आती है। स्थानीय प्रशासन को स्थल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बनाए रखना होगा, जिसके लिए अतिरिक्त फंडिंग और आसपास के निर्माण पर पाबंदियां लग सकती हैं।\n• सांस्कृतिक पहचान पर असर: 2024 में मिली चराईदेव मोइदम की मान्यता के साथ अब यह दूसरा अहोम स्थल असम को एक संयुक्त हेरिटेज सर्किट के तौर पर पेश करने का मौका देगा, जिसमें दोनों जगहों को पर्यटन प्रचार में साथ जोड़ा जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रंगपुर-शिवसागर परिसर क्या है?\nयह अहोम कालीन बचे हुए ढांचों का एक समूह है, जिसमें मंदिर, राजमहल, जलाशय और इंजीनियरिंग के नमूने शामिल हैं और जो असम के शिवसागर के ऐतिहासिक राजधानी क्षेत्र में फैला है।\n\n2. इस नामांकन की जानकारी किसने दी?\nअसम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार रात एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी।\n\n3. नामांकन औपचारिक रूप से कब भेजा गया?\nयूनेस्को में भारत के मिशन ने इसे 19.06.2026 को औपचारिक रूप से भेजा।\n\n4. यह नामांकन किन श्रेणियों के तहत भेजा गया है?\nइसे यूनेस्को की श्रेणी (iii) और (iv) के तहत नामांकित किया गया है।\n\n5. अहोम राजवंश ने कितने समय तक राज किया?\nअहोम राजवंश ने 1228 से 1826 तक, यानी करीब छह सदी तक ब्रह्मपुत्र घाटी पर राज किया।\n\n6. रंग घर क्या है?\nयह परिसर में शामिल एक अहोम कालीन इमारत है, जिसे मुख्यमंत्री सरमा एशिया का सबसे पुराना बचा हुआ एम्फीथिएटर बताते हैं।\n\n7. इसका चराईदेव मोइदम से क्या संबंध है?\nअहोम राजाओं के समाधि स्थल चराईदेव मोइदम को पहले ही 2024 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा चुका है, और सरमा ने नए नामांकन को उसी की अगली कड़ी बताया।\n\n8. क्या इस नामांकन से यूनेस्को की मान्यता तय हो गई है?\nनहीं, अभी सिर्फ नामांकन भेजा गया है, यूनेस्को को इसका मूल्यांकन करना और मंजूरी देना अभी बाकी है।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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    "यूनेस्को विश्व धरोहर",
    "अहोम राजवंश",
    "असम विरासत",
    "रंगपुर-शिवसागर परिसर",
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