दिब्रुगढ़ में बनेगा 235 हेक्टेयर का विशाल वन्यजीव सफारी और रेस्क्यू कैंपस, लागत 534 करोड़ रुपए असम का वन विभाग दिब्रुगढ़ के पास 235 हेक्टेयर में 534 करोड़ रुपए की लागत से वाइल्डलाइफ सफारी और रेस्क्यू सेंटर बनाने जा रहा है, जिसमें दो चरणों में बाघ, गैंडे, शेर जैसे जानवरों के लिए बाड़े बनेंगे। असम के अपर असम इलाके को जल्द एक बड़ी वन्यजीव परियोजना मिलने जा रही है। राज्य का वन विभाग दिब्रुगढ़ जिले में 534 करोड़ रुपए की लागत से एक वाइल्डलाइफ सफारी और रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने रविवार को संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस प्रोजेक्ट के खाके की समीक्षा की। इसके लिए जो जमीन चुनी गई है, वह नामडांग रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में है, जो टिंगखोंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 235 हेक्टेयर में फैला कैंपस, शहर से नजदीक यह प्रोजेक्ट 235 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन में फैला होगा, जो इसे इलाके की सबसे बड़ी वन्यजीव परियोजनाओं में शामिल कर देगा। जगह चुनते वक्त आने-जाने की सुविधा का खास ख्याल रखा गया है, यह जगह दिब्रुगढ़ शहर से करीब 20 किलोमीटर और दिब्रुगढ़ हवाई अड्डे से लगभग 30 किलोमीटर दूर है, यानी स्थानीय लोगों के साथ-साथ हवाई सफर करके आने वाले पर्यटकों के लिए भी यहां पहुंचना आसान होगा। दो चरणों में बंटा निर्माण, जानवरों के हिसाब से बंटवारा इस पूरे प्रोजेक्ट को असम लोक निर्माण विभाग दो अलग-अलग चरणों में पूरा करेगा। पहले चरण पर करीब 259 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, इसमें बाघ, गैंडे, तेंदुए और भालू के लिए बाड़े बनाए जाएंगे, साथ ही एक पशु चिकित्सालय और घायल या बेघर हुए वन्यजीवों के लिए एक अलग रेस्क्यू सेंटर भी होगा। दूसरे चरण पर लगभग 275 करोड़ रुपए खर्च होंगे, इसमें एशियाई शेर, चीता, ज़ेब्रा और दरियाई घोड़े के लिए इंतजाम किया जाएगा। इसी चरण के तहत एक आधुनिक रिसर्च सेंटर बनाने की भी योजना है, जो जानवरों के बाड़ों के साथ-साथ वैज्ञानिक शोध कार्य में मदद करेगा। संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा बरुआ ने इस प्रोजेक्ट को एक ऐसी व्यापक सुविधा बताया जो राज्य की वन्यजीव बचाव और संरक्षण क्षमता को मजबूत करेगी, साथ ही इलाके में इको-टूरिज्म के नए मौके भी खोलेगी। उन्होंने इस योजना की जानकारी एक्स पर भी साझा की और इसे असम के वन्यजीव संरक्षण ढांचे को बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया। पर्यटकों को आकर्षित करने के अलावा इस सेंटर से दिब्रुगढ़ इलाके में रोजगार के नए मौके भी बनने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि दिब्रुगढ़ शहर और हवाई अड्डे के करीब होने से पर्यटकों की आवाजाही और आसान होगी, जिससे पूरे अपर असम में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसका आप पर असर यह प्रोजेक्ट आने वाले सालों में दिब्रुगढ़ को वन्यजीव पर्यटन के नए केंद्र में बदल सकता है, जिसका सीधा असर रोजगार, यात्रा और वन्यजीव संरक्षण क्षमता पर पड़ेगा। • भारत में: नया रेस्क्यू सेंटर और पशु चिकित्सालय बाघ, गैंडे जैसे बड़े जानवरों के इलाज और पुनर्वास की देश की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से भी घायल या बेघर वन्यजीवों को यहां भेजना आसान होगा। • दिब्रुगढ़, असम में: स्थानीय लोगों को पहले निर्माण कार्य में रोजगार मिलेगा, फिर सफारी शुरू होने पर स्टाफ, गाइड और रखरखाव जैसे पदों पर लंबे समय तक काम मिल सकता है। इलाके में होटल और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को अभी से बढ़ती भीड़ के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। • यात्रियों के लिए: यह जगह दिब्रुगढ़ शहर से महज 20 किलोमीटर और हवाई अड्डे से करीब 30 किलोमीटर दूर है, इसलिए अपर असम आने वाले पर्यटक इसे एक छोटी वीकेंड ट्रिप में आसानी से शामिल कर सकेंगे। • वन्यजीव प्रेमियों के लिए: दो चरणों की योजना की वजह से एशियाई शेर, चीता और दरियाई घोड़े जैसे जानवर, जो असम के मूल निवासी नहीं हैं, यहां पहली बार देखने को मिल सकते हैं, वह भी बाघ, गैंडे और तेंदुए जैसे स्थानीय जानवरों के साथ। सवाल-जवाब 1. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत कितनी है? इस वाइल्डलाइफ सफारी और रेस्क्यू सेंटर की अनुमानित लागत 534 करोड़ रुपए है। 2. यह प्रोजेक्ट कहां बनेगा? यह दिब्रुगढ़ जिले के नामडांग रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में बनेगा, जो टिंगखोंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 3. यह कैंपस कितने बड़े इलाके में फैला होगा? यह 235 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन में फैला होगा। 4. पहले चरण में क्या-क्या बनेगा? पहले चरण में बाघ, गैंडे, तेंदुए और भालू के लिए बाड़े, एक पशु चिकित्सालय और रेस्क्यू सेंटर बनेगा, जिसकी लागत करीब 259 करोड़ रुपए है। 5. दूसरे चरण में क्या शामिल है? दूसरे चरण में एशियाई शेर, चीता, ज़ेब्रा और दरियाई घोड़े के लिए सुविधाएं और एक रिसर्च सेंटर बनेगा, जिसकी लागत करीब 275 करोड़ रुपए है। 6. इस प्रोजेक्ट को कौन बनाएगा? इसे असम लोक निर्माण विभाग दो चरणों में पूरा करेगा। 7. यह जगह दिब्रुगढ़ हवाई अड्डे से कितनी दूर है? यह दिब्रुगढ़ हवाई अड्डे से करीब 30 किलोमीटर दूर है। 8. इस प्रोजेक्ट की समीक्षा किसने की? राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने रविवार को इसकी समीक्षा की। https://trendkia.com/assam/dibrugarh-men-banega-235-hekteyara-ka-vishala-vanyajiva-saphari-aura-reskyu-kainpasa-lagata-534-karora-rupae-28865 TrendKia — Har trend, sabse pehle.