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  "type": "article",
  "title": "असम विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम की विश्वसनीयता पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू",
  "summary": "असम विधानसभा चुनाव 2026 में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माइक्रोचिप्स और प्रोग्रामिंग की निष्पक्षता को लेकर दायर जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर अदालत विचार कर रही है।",
  "content": "असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की वैधानिक स्वीकार्यता और तकनीकी विश्वसनीयता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष प्रारंभिक बहस शुरू हुई। अदालत वर्तमान में इस पहलू का परीक्षण कर रही है कि क्या इस याचिका को सुनवाई के लिए विधिवत स्वीकार किया जा सकता है।\n\nयह कानूनी चुनौती असम जातीय परिषद के नेता जियाउर रहमान तथा कांग्रेस नेताओं गुप्तमणि शर्मा और रिपुन बोरा द्वारा संयुक्त रूप से पेश की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मतदान मशीनों में प्रयुक्त तकनीकी घटकों, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर उपकरणों और माइक्रोचिप्स की आंतरिक कार्यप्रणाली के साथ ही प्रोग्रामिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह प्रकट किया है।\n\nसेमीकंडक्टर तकनीक और सोर्स कोड पर उठाए गए सवाल\nयाचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह मामला मतदान उपकरणों से जुड़ी पूर्ववर्ती याचिकाओं की तुलना में भिन्न आधारों पर टिका है। इसमें मशीनों के भीतर लगे सेमीकंडक्टर घटकों की वास्तविक बनावट और उनकी स्वतंत्र जांच की अनुपलब्धता को मुख्य आधार बनाया गया है। याचिका में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम के सोर्स कोड को सार्वजनिक सत्यापन के लिए सुलभ न कराए जाने की नीति पर भी आपत्ति दर्ज की गई है।\n\nइसके साथ ही याचिका में एक जापानी सेमीकंडक्टर फर्म और राज्य सरकार के निवेश प्रयासों के बीच कथित संबंधों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। रहमान का दावा है कि इस विदेशी प्रतिष्ठान के प्रतिनिधियों ने जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के जापान दौरे के समय उनसे भेंट की थी। उल्लेखनीय है कि संबंधित जापानी कंपनी को भी इस न्यायिक प्रक्रिया में एक पक्षकार बनाया गया है।\n\nमतदान पैटर्न और आगामी न्यायिक कार्यवाही\nअदालत में प्रस्तुत याचिका में विधानसभा चुनाव के आधिकारिक मतदान आंकड़ों का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मतदान दिवस पर एक तय समयावधि में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के भीतर एकसमान वोटिंग पैटर्न दर्ज किया गया था, जिसकी गहन अदालती जांच आवश्यक है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि ये तमाम बिंदु केवल याचिकाकर्ताओं के दावे हैं और उच्च न्यायालय ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।\n\nशुक्रवार को हुई शुरुआती अदालती बैठक के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं तथा भारत निर्वाचन आयोग के कानूनी प्रतिनिधियों ने अपनी दलीलें रखीं। मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी स्वीकार्यता पर अगली विस्तृत सुनवाई 4 नवंबर के लिए मुकर्रर की है। रहमान ने बताया कि अदालत ने इसे एक अत्यंत गंभीर विषय माना है, जिसके कई तार सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों में पहले से विचाराधीन या निपटाए गए मामलों से जुड़ते हैं। अगली बैठक में असम सरकार भी अपना पक्ष रखेगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह अदालती कार्यवाही देश की चुनावी तकनीक और मतदान सुरक्षा की न्यायिक पड़ताल से सीधे जुड़ी हुई है।\n\n• भारत में: यह कानूनी बहस तय करेगी कि क्या भविष्य में निर्वाचन आयोग को मतदान उपकरणों के सोर्स कोड और आंतरिक चिपसेट की सार्वजनिक जांच की अनुमति देनी होगी। यदि अदालत तकनीकी ऑडिट पर कोई दिशा-निर्देश देती है तो इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है।\n• असम में: राज्य के 2026 विधानसभा चुनाव के मतदान आंकड़ों और चुनावी नतीजों की वैधता को लेकर जनता के बीच उठ रहे सवालों को न्यायिक स्पष्टता मिलेगी। आगामी 4 नवंबर की सुनवाई के बाद यह तय होगा कि याचिका खारिज होगी या राज्य सरकार और जापानी कंपनी को औपचारिक जवाब दाखिल करना पड़ेगा।\n• मतदाताओं के लिए: चुनावी व्यवस्था में प्रयुक्त डिजिटल तकनीक की प्रामाणिकता को लेकर चल रही इस बहस से आम नागरिकों का मतदान प्रणाली पर विश्वास प्रभावित होता है। तकनीकी घटकों पर अदालत का रुख यह स्पष्ट करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली कितनी अभेद्य और विश्वसनीय मानी जाए।\n• प्रशासनिक स्तर पर: निर्वाचन आयोग और राजनीतिक दलों के कानूनी प्रतिनिधियों को उच्च न्यायालय में अपनी-अपनी तकनीकी दलीलें साबित करनी होंगी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनाव प्रक्रिया के दस्तावेजीकरण और तकनीक सुरक्षा नियमों का पालन और सख्त हो जाएगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह याचिका असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस्तेमाल की गई मशीनों की तकनीक, डेटा पैटर्न और विदेशी कंपनियों के साथ संपर्कों पर संदेह के बाद दायर की गई है।\n\n• तकनीकी पारदर्शिता पर सवाल: याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि मतदान मशीनों के माइक्रोचिप्स और प्रोग्रामिंग कोड की बाहरी विशेषज्ञों द्वारा निष्पक्ष जांच की व्यवस्था मौजूद नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सोर्स कोड को सार्वजनिक न करना याचिकाकर्ताओं के अविश्वास का मुख्य आधार बना।\n• जापान यात्रा का संदर्भ: याचिका में जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री के जापान दौरे के दौरान एक सेमीकंडक्टर कंपनी के प्रतिनिधियों से हुई मुलाकात का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इस निवेश वार्ता और चुनाव में प्रयुक्त सेमीकंडक्टर घटकों के बीच संभावित तार जुड़े होने की आशंका जताई है।\n• समान मतदान पैटर्न के आरोप: याचिकाकर्ताओं ने चुनाव दिवस के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक निश्चित समय पर एक जैसा वोटिंग ट्रेंड देखने को मिला। इसी आधार पर उन्होंने उच्च न्यायालय से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुवाहाटी उच्च न्यायालय में किस विषय पर सुनवाई हो रही है?\nअदालत 2026 के असम विधानसभा चुनाव में प्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर विचार कर रही है।\n\n2. यह जनहित याचिका किसने दायर की है?\nयह याचिका असम जातीय परिषद के नेता जियाउर रहमान और कांग्रेस पार्टी के नेताओं गुप्तमणि शर्मा व रिपुन बोरा द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है।\n\n3. याचिकाकर्ताओं ने मशीनों को लेकर मुख्य आरोप क्या लगाए हैं?\nयाचिकाकर्ताओं ने मशीनों में लगे सेमीकंडक्टर उपकरणों, माइक्रोचिप्स की पारदर्शिता और सार्वजनिक रूप से सोर्स कोड उपलब्ध न कराए जाने पर सवाल उठाए हैं।\n\n4. इस मामले में जापानी कंपनी का क्या संदर्भ है?\nयाचिका में दावा किया गया है कि एक जापानी सेमीकंडक्टर कंपनी के प्रतिनिधियों ने जनवरी 2025 में असम के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी, और उस कंपनी को मामले में पक्षकार बनाया गया है।\n\n5. उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई कब होगी?\nमुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की स्वीकार्यता पर अगली सुनवाई 4 नवंबर को करेगी।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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