# गौहाटी हाईकोर्ट का आदेश, बांग्लादेश भेजी गई महिला को असम सरकार देगी 2 लाख रुपये

> गौहाटी हाईकोर्ट ने ममताज बेगम को विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील का मौका दिए बिना ही बांग्लादेश भेज दिए जाने पर असम सरकार को उन्हें 2 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि राज्य के खिलाफ इस तरह का यह पहला आदेश है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/gauhati-high-court-ka-adesha-bangladesh-bheji-gai-mahila-ko-assam-sarakara-degi-2-lakha-rupaye-29076 · **Language:** Hindi
**Tags:** गौहाटी हाईकोर्ट, असम सरकार, विदेशी न्यायाधिकरण, बांग्लादेश निर्वासन, ममताज बेगम, मुआवजा आदेश

गौहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को आदेश दिया है कि वह बंगाली मूल की एक मुस्लिम महिला को 2 लाख रुपये की अंतरिम राहत राशि दे। इस महिला को विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील का मौका दिए बिना ही सीमा पार बांग्लादेश भेज दिया गया था।

## राज्य पर लगा ऐसा जुर्माना पहली बार
कानूनी जानकारों के मुताबिक यह पहला मौका है जब किसी अदालत ने निर्वासन प्रक्रिया का उल्लंघन कर किसी व्यक्ति को बांग्लादेश भेजे जाने पर राज्य सरकार पर आर्थिक जुर्माना लगाया हो। यह मामला तब अदालत पहुंचा जब ममताज बेगम नाम की इस महिला के परिजनों को पता चला कि उन्हें पहले ही देश से बाहर भेजा जा चुका है, और उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। न्यायमूर्ति कल्याण राय सुरना और न्यायमूर्ति सुष्मिता फुकन खाउंड की खंडपीठ ने नगांव विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा इस मामले को जिस तरह निपटाया, उस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से ही न्यायाधिकरण की ओर से "कानूनी दुर्भावना" झलकती है।

## न्यायाधिकरण में कैसे बढ़ा मामला
बेगम का यह मामला इससे पहले भी एक बार हाईकोर्ट में जा चुका था। अदालत ने पहले ही पाया था कि न्यायाधिकरण ने उनकी ओर से पेश किए गए सभी सबूतों पर गौर नहीं किया, जिसके बाद मामला दोबारा सुनवाई के लिए भेजा गया था। इसी दूसरे दौर की सुनवाई के बाद 30 मई को न्यायाधिकरण ने उन्हें विदेशी नागरिक घोषित कर दिया।

## आदेश की जानकारी से पहले ही गिरफ्तारी
खंडपीठ ने पाया कि बेगम को 30 मई के इस आदेश की जानकारी कभी दी ही नहीं गई और आदेश आने के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे वह ऊंची अदालत में इस आदेश को चुनौती देने का मौका ही गंवा बैठीं। जजों ने यह भी गौर किया कि उनकी गिरफ्तारी का समय और तरीका बताने में न्यायाधिकरण के जज और पुलिस के बयानों में अंतर था। खंडपीठ की राय में, राज्य की मशीनरी ने ही बेगम को निर्वासन से पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अधिकार से वंचित रखा।

## अदालत ने क्या-क्या निर्देश दिए
2 लाख रुपये की इस अंतरिम राशि के लिए असम सरकार को 60 दिन का समय दिया गया है, साथ ही खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बेगम चाहें तो दीवानी अदालत से अतिरिक्त मुआवजे की मांग भी कर सकती हैं। खंडपीठ ने विदेश मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है और संकेत दिया कि वह मंत्रालय से बेगम को बांग्लादेश में तलाशकर उन्हें भारत वापस लाने का प्रयास करने को कहेगी। इसके अलावा अदालत ने गृह एवं राजनीतिक विभाग को यह जांचने को कहा है कि न्यायाधिकरण का 30 मई वाला आदेश असल में किस तारीख और समय पर तैयार हुआ था, क्योंकि इसे लेकर सवाल उठे हैं। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि विदेशी घोषित किए गए व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले उसे न्यायाधिकरण के आदेश की जानकारी जरूर दी जाए, और उसे जिले से बाहर ले जाने से पहले परिवार के किसी वयस्क सदस्य को इसकी सूचना दी जाए।

## इसका आप पर असर
यह आदेश साफ करता है कि विदेशी न्यायाधिकरण के मामले में गड़बड़ी होने पर अब राज्य सरकार को आर्थिक और कानूनी कीमत चुकानी पड़ सकती है, साथ ही यह पुलिस के काम करने के तरीके में भी बदलाव लाता है।

- **भारत में:** यह फैसला देश भर की अदालतों के लिए एक नजीर बन सकता है, जब किसी को अपील का पूरा मौका दिए बिना निर्वासित कर दिया जाता है, इससे न्यायिक प्रक्रिया का पालन कराने का दबाव बढ़ेगा।
- **असम में:** राज्य के हर जिले की पुलिस को अब विदेशी घोषित व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले न्यायाधिकरण के आदेश की जानकारी देनी होगी, और उसे जिले से बाहर ले जाने से पहले परिवार के किसी वयस्क सदस्य को सूचित करना होगा।
- **लंबित मामलों वाले परिवारों के लिए:** असम में जिन परिवारों के सदस्यों के मामले न्यायाधिकरण में चल रहे हैं, उन्हें सुनवाई की तारीखों पर करीबी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इस मामले से पता चलता है कि आदेश आते ही गिरफ्तारी और निर्वासन कितनी तेजी से हो सकता है।
- **ममताज बेगम के लिए:** असम सरकार को 60 दिन के भीतर 2 लाख रुपये देने होंगे, वह चाहें तो दीवानी अदालत से अतिरिक्त मुआवजा भी मांग सकती हैं, और विदेश मंत्रालय को उन्हें बांग्लादेश में तलाशकर वापस लाने में मदद करने को कहा गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. असम सरकार को कितना मुआवजा देने का आदेश दिया गया है?
गौहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को ममताज बेगम को 2 लाख रुपये की अंतरिम राशि 60 दिन के भीतर देने का आदेश दिया है।

### 2. मामला किस अदालत में और किन जजों के सामने था?
यह मामला गौहाटी हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति कल्याण राय सुरना और न्यायमूर्ति सुष्मिता फुकन खाउंड की खंडपीठ के सामने था।

### 3. महिला को विदेशी कब घोषित किया गया था?
नगांव विदेशी न्यायाधिकरण ने 30 मई को ममताज बेगम को विदेशी नागरिक घोषित किया था।

### 4. महिला के परिवार ने अदालत में याचिका कैसे दाखिल की?
जब परिजनों को पता चला कि बेगम को पहले ही बांग्लादेश भेजा जा चुका है, तो उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की।

### 5. अदालत ने न्यायाधिकरण पर क्या टिप्पणी की?
खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से ही न्यायाधिकरण की ओर से "कानूनी दुर्भावना" झलकती है।

### 6. क्या बेगम और मुआवजा मांग सकती हैं?
हां, खंडपीठ ने कहा है कि वह दीवानी अदालत से अतिरिक्त राहत की मांग कर सकती हैं।

### 7. विदेश मंत्रालय की इसमें क्या भूमिका होगी?
अदालत ने विदेश मंत्रालय को पक्षकार बनाया है और कहा है कि वह बेगम को बांग्लादेश में तलाशकर भारत वापस लाने का प्रयास करेगा।

### 8. भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
जिला पुलिस अधीक्षकों को कहा गया है कि विदेशी घोषित व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले उसे आदेश की जानकारी दी जाए और परिवार के किसी वयस्क सदस्य को सूचित किया जाए।

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