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  "type": "article",
  "title": "गुवाहाटी विश्वविद्यालय के पत्रकारिता छात्रों को सिखाए गए वन्यजीव अपराध रिपोर्टिंग के गुर",
  "summary": "गुवाहाटी विश्वविद्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में पत्रकारिता के छात्रों को केवल जब्ती की खबरों से आगे बढ़कर वन्यजीव अपराधों की वैज्ञानिक और नैतिक रिपोर्टिंग करने के गुर सिखाए गए।",
  "content": "गुवाहाटी विश्वविद्यालय में भविष्य के मीडिया पेशेवरों को पर्यावरण से जुड़े अपराधों की रिपोर्टिंग करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के संचार और पत्रकारिता विभाग के लगभग 60 छात्रों ने बुधवार (16 सितंबर) को इस गहन सत्र में भाग लिया। इस शैक्षणिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं की केवल सतही रिपोर्टिंग करने के बजाय युवा पत्रकारों में संरक्षण के मुद्दों की गहरी समझ विकसित करना था।\n\n \n\nकार्यशाला का विषय और मुख्य उद्देश्य\n\nइस कार्यक्रम का आयोजन \"बियॉन्ड हेडलाइंस: द सीज़र इज़ नॉट द स्टोरी, अंडरस्टैंडिंग एंड रिपोर्टिंग वाइल्डलाइफ क्राइम\" विषय के तहत किया गया था। इस कार्यशाला का संचालन पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली एक प्रमुख संस्था आरण्यक के लीगल एंड एडवोकेसी डिपार्टमेंट (LAD) के तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला का मुख्य ध्यान मीडिया रिपोर्टिंग के नजरिए को केवल जानवरों के अंगों की जब्ती की खबर देने से आगे बढ़ाकर, इन अपराधों के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क और उनके पर्यावरणीय प्रभावों की जांच करने की ओर मोड़ना था।\n\n \n\nकानूनी ढांचा और खोजी पत्रकारिता के तौर-तरीके\n\nआरण्यक के LAD विभाग में सीनियर प्रोजेक्ट ऑफिसर और वाइल्डलाइफ क्राइम एनालिस्ट के रूप में कार्यरत आईवी फरहीन हुसैन इस कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक थीं। उन्होंने प्रतिभागियों को कई जटिल विषयों की जानकारी दी, जिसमें संशोधित वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) अमेंडमेंट एक्ट, 2022 के प्रावधानों को लागू करने का तरीका भी शामिल था। आईवी फरहीन हुसैन ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे पत्रकारिता के छात्र पेशेवर सीमाओं और कानूनी मर्यादाओं में रहकर इन अवैध गतिविधियों की गहन जांच कर सकते हैं। इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण व्यावहारिक सत्र था, जिसे \"फाइंडिंग द स्टोरी\" नाम दिया गया था। इसमें सभी प्रतिभागी छात्रों ने व्यावहारिक रूप से हिस्सा लिया और खोजी रिपोर्ट तैयार करने की बारीकियां सीखीं।\n\n \n\nक्षेत्रीय संरक्षण में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका\n\nइस सत्र की पृष्ठभूमि तैयार करते हुए, आरण्यक के पब्लिसिटी सेक्रेटरी और LAD के सलाहकार विजय शंकर बोरा ने बताया कि कैसे वन्यजीव अपराध हमारी समृद्ध जैव विविधता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जैव विविधता मानव जीवन और आजीविका को सहारा देने के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए इसका संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है। विजय शंकर बोरा ने रेखांकित किया कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र, जो अपनी समृद्ध वनस्पतियों और जीवों के लिए जाना जाता है, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के निशाने पर रहता है। उन्होंने भावी जनसंचार पेशेवरों से जनता में जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि स्थानीय समुदाय और आम नागरिक इस लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण हितधारक हैं।\n\nविजय शंकर बोरा ने आगे कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य पत्रकारिता के छात्रों को वैज्ञानिक, विश्वसनीय और ठोस तरीके से वन्यजीव अपराधों की रिपोर्टिंग करने के लिए संवेदनशील बनाना था, ताकि वे अपने पेशेवर और नैतिक मानकों से समझौता किए बिना काम कर सकें। इस प्रशिक्षण ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि किस तरह वे अपनी खबरों को इस तरह से पेश करें जो कानूनी रूप से भी सटीक हों और जनता पर भी गहरा प्रभाव छोड़ें।\n\n \n\nशैक्षणिक सहयोग और सम्मान\n\nगुवाहाटी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नेतृत्व ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया। संचार और पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अंकुरन दत्ता ने छात्रों को आरण्यक की टीम से मिलवाया और इस बात पर प्रकाश डाला कि आधुनिक पत्रकारिता के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए यह विषय कितना प्रासंगिक है। इस सहयोग को आगे बढ़ाते हुए, विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉ. अरुणव बरुआ ने आरण्यक के तीनों प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया। इसके अतिरिक्त, आरण्यक के PRO गुणाजीत मजूमदार ने इस कार्यशाला के आयोजन और इसके डिजिटल दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।\n\nइसका आप पर असर\nयह कार्यशाला भावी मीडिया पेशेवरों को जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव अपराधों के कानूनी पहलुओं के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।\n\n• भारत में: बेहतर ढंग से प्रशिक्षित पत्रकार वन्यजीव अपराधों की अधिक सटीक और वैज्ञानिक रिपोर्टिंग कर सकेंगे। इससे देश भर में अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ेगी।\n• असम में: समृद्ध जैव विविधता वाले असम में स्थानीय स्तर पर जागरूक पत्रकार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को उजागर करने में मदद करेंगे। इससे राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों में मौजूद अनमोल जीवों की सुरक्षा मजबूत होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्यशाला पूर्वोत्तर भारत में बढ़ते वन्यजीव अपराधों और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खतरों को देखते हुए आयोजित की गई थी। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:\n\n• सीमित रिपोर्टिंग को बदलना: अक्सर मीडिया में केवल वन्यजीवों के अंगों की जब्ती की सतही खबरें ही आ पाती हैं। इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को इन घटनाओं के पीछे छिपे बड़े नेटवर्क और कानूनी पहलुओं को समझने में मदद करना था।\n• सख्त कानून की जानकारी: हाल ही में लागू हुए वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) अमेंडमेंट एक्ट, 2022 के बाद पत्रकारों के लिए इसके कानूनी प्रावधानों को समझकर सही तरीके से रिपोर्टिंग करना जरूरी हो गया है।\n• जैव विविधता की रक्षा: पूर्वोत्तर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तस्करों के निशाने पर रहता है, इसलिए भावी जनसंचार पेशेवरों को स्थानीय समुदायों को जागरूक करने के लिए तैयार करना बेहद आवश्यक था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुवाहाटी विश्वविद्यालय में वन्यजीव अपराध रिपोर्टिंग कार्यशाला का आयोजन किसने किया?\nइसका आयोजन गुवाहाटी विश्वविद्यालय के संचार और पत्रकारिता विभाग के सहयोग से आरण्यक के लीगल एंड एडवोकेसी डिपार्टमेंट (LAD) द्वारा किया गया था।\n\n2. कार्यशाला का मुख्य विषय क्या था?\nकार्यशाला का विषय \"बियॉन्ड हेडलाइंस: द सीज़र इज़ नॉट द स्टोरी, अंडरस्टैंडिंग एंड रिपोर्टिंग वाइल्डलाइफ क्राइम\" था।\n\n3. सत्र के दौरान किस प्रमुख पर्यावरण कानून पर चर्चा की गई?\nविशेषज्ञ प्रशिक्षक ने छात्रों को वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) अमेंडमेंट एक्ट, 2022 के प्रावधानों के उपयोग की जानकारी दी।\n\n4. पूर्वोत्तर क्षेत्र को वन्यजीव अपराधों के प्रति संवेदनशील क्यों माना जाता है?\nयह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है, जिसके कारण यह अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-17",
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