# गुवाहाटी के असम इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल पानी की टंकी में मिला मृत बंदर, 50 से अधिक छात्र बीमार

> गुवाहाटी स्थित असम इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल नंबर 7 की पानी की टंकी में मृत बंदर मिलने के बाद 50 से अधिक छात्र बीमार पड़ गए, जिन्हें इलाज के लिए जालुकबारी के आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल ले जाया गया।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/guwahati-ke-assam-engineering-college-hostala-pani-ki-tnki-men-mila-mrita-bndara-50-se-adhika-chhatra-bimara-55807 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम इंजीनियरिंग कॉलेज, गुवाहाटी, हॉस्टल पानी की टंकी, जल प्रदूषण, जालुकबारी, छात्र स्वास्थ्य, असम समाचार

गुवाहाटी स्थित असम इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल परिसर से स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। संस्थान के हॉस्टल नंबर 7 की छत पर रखी पानी की मुख्य टंकी में एक मृत बंदर पाए जाने के बाद 50 से अधिक छात्र अचानक बीमार पड़ गए। इस घटना के सामने आने के बाद समूचे कॉलेज परिसर में पेयजल सुरक्षा, स्वच्छता मानकों और बुनियादी रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

## बदबू आने पर खुली लापरवाही की पोल
इस पूरे मामले का खुलासा 2 नवंबर की शाम को हुआ, जब हॉस्टल नंबर 7 में रहने वाले छात्रों ने नलों से आने वाले पानी से असामान्य दुर्गंध आने की शिकायत की। छात्रों की लगातार शिकायतों के बाद जब कर्मचारियों ने पानी की मुख्य स्टोरेज टंकी का मुआयना किया, तो उसके भीतर एक बंदर का शव तैरता हुआ मिला। स्थिति का जायजा लेने पर सामने आया कि बंदर का शव लगभग एक हफ्ते से उस टंकी के अंदर पड़ा हुआ था।

## दूषित पानी का खाना बनाने और पीने में इस्तेमाल
हॉस्टल के छात्र लगभग एक सप्ताह तक अनजाने में उसी दूषित पानी का इस्तेमाल अपनी दैनिक जरूरतों के लिए करते रहे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि हॉस्टल मेस में छात्रों का भोजन पकाने के लिए भी इसी टंकी के दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही थी। इसके चलते हॉस्टल में रहने वाले कई विद्यार्थियों को पेट संबंधी गंभीर संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

## जालुकबारी अस्पताल में भर्ती कराए गए छात्र
स्वास्थ्य बिगड़ने पर 50 से अधिक छात्रों को तुरंत उपचार के लिए जालुकबारी स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचे छात्रों में से कुछ की हालत में सुधार हुआ है, जबकि कई अन्य छात्र अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। कुछ प्रभावित छात्रों को डिहाइड्रेशन और संक्रमण से उबारने के लिए इंट्रावेनस फ्लूइड्स चढ़ाए जा रहे हैं, वहीं कुछ अन्य छात्रों को दवाएं देकर उनके कमरों में आराम करने की सलाह दी गई है।

## नियमित जांच और मेंटेनेंस पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने कॉलेज प्रशासन की व्यवस्थाओं पर आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्रों ने इस बात पर कड़ा रोष जताया है कि पीने और खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली पानी की टंकियों की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती। हॉस्टल के निवासियों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में कई दिनों तक दूषित जल की आपूर्ति जारी रहना बेहद गंभीर विफलता है, जिससे सैकड़ों छात्रों का जीवन खतरे में पड़ गया।

## इसका आप पर असर
हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थानों में रहने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए यह घटना जल स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति तत्काल सतर्कता बरतने की मांग करती है।

- **असम और गुवाहाटी में:** कॉलेज प्रशासन और हॉस्टल प्रबंधन को सभी पानी की टंकियों की तत्काल सफाई, क्लोरीनेशन और ढक्कनों की सीलिंग सुनिश्चित करनी होगी ताकि छात्र संक्रमण के खतरे से बच सकें। छात्र मेस या नलों का पानी सीधे पीने के बजाय व्यक्तिगत स्तर पर उबला हुआ या प्रमाणित फिल्टर का पानी ही इस्तेमाल करें।
- **देशभर के छात्रों के लिए:** हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को पानी के रंग या गंध में थोड़ा सा भी बदलाव महसूस होने पर तुरंत वार्डन को सूचित करना चाहिए और बिना देरी किए उसका उपयोग बंद कर देना चाहिए। सामूहिक मेस के खाने और पीने के पानी की गुणवत्ता पर छात्र समितियों को नियमित नजर रखनी चाहिए।
- **संक्रमण के लक्षणों पर:** दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद उल्टी, दस्त या बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स का समय पर सेवन बेहद जरूरी है।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधकों को हर महीने टंकियों के निरीक्षण का आधिकारिक लॉग तैयार करना होगा ताकि लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके। ढीले या टूटे हुए वॉटर टैंक लिड्स को तत्काल बदलना अनिवार्य होना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना हॉस्टल परिसर में नियमित स्वच्छता निरीक्षण के अभाव और ओवरहेड वॉटर टैंकों की सुरक्षा में भारी चूक के कारण घटित हुई। समय पर मेंटेनेंस न होने से दूषित पानी कई दिनों तक सीधे इस्तेमाल में बना रहा।

- **प्रत्यक्ष कारण:** हॉस्टल नंबर 7 की छत पर रखी पानी की टंकी का ढक्कन खुला या क्षतिग्रस्त होने की संभावना के चलते बंदर अंदर गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। शव लगभग एक सप्ताह तक पानी में सड़ता रहा, जिससे पूरी जल आपूर्ति में हानिकारक बैक्टीरिया फैल गए।
- **लापरवाही की स्थितियां:** कॉलेज परिसर में पानी की टंकियों की साप्ताहिक या पाक्षिक नियमित जांच का कोई प्रभावी तंत्र काम नहीं कर रहा था। नलों से असामान्य दुर्गंध आने के बाद ही प्रशासन ने टंकी का ढक्कन खोलकर देखने की जहमत उठाई।
- **जांच और आगे की प्रक्रिया:** घटना के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों और कॉलेज प्रबंधन ने टंकी की सफाई तथा प्रभावित छात्रों के इलाज पर ध्यान केंद्रित किया है। परिसर में सभी वॉटर स्टोरेज यूनिट्स की व्यापक सुरक्षा ऑडिट की मांग तेज हो गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना किस कॉलेज और हॉस्टल में हुई?
यह घटना गुवाहाटी स्थित असम इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल नंबर 7 में सामने आई है।

### 2. पानी की टंकी में क्या मिला था?
हॉस्टल नंबर 7 की पानी की स्टोरेज टंकी के अंदर एक मृत बंदर का शव पाया गया था।

### 3. इस घटना में कितने छात्र बीमार पड़े?
दूषित पानी के इस्तेमाल के कारण 50 से अधिक छात्र बीमार पड़ गए।

### 4. बीमार छात्रों को इलाज के लिए कहाँ ले जाया गया?
छात्रों को उपचार के लिए जालुकबारी स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया।

### 5. दूषित पानी का उपयोग किन कार्यों में किया गया था?
छात्रों ने इस पानी का उपयोग दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ हॉस्टल मेस में खाना पकाने के लिए भी किया था।

### 6. टंकी में शव के कितने दिनों तक रहने का अंदेशा है?
बंदर का शव लगभग एक हफ्ते तक पानी की टंकी के अंदर मौजूद रहने की बात सामने आई है।

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