गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का जीर्णोद्धार, 16 नवंबर से एमएमसीएच में शिफ्ट होंगी ज्यादातर मेडिकल सेवाएं असम स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएचसी के जीर्णोद्धार कार्य के लिए अधिकांश चिकित्सा सेवाओं को गुवाहाटी के पानबाजार स्थित एमएमएचसी में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। यह पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी और 16 नवंबर से नई जगह पर कामकाज शुरू हो जाएगा। असम के स्वास्थ्य विभाग ने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH) की अधिकांश चिकित्सा सेवाओं को गुवाहाटी के पानबाजार स्थित महेंद्र मोहन चौधरी अस्पताल (MMCH) में स्थानांतरित करने की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मौजूदा परिसर में बड़े पैमाने पर मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम किया जाना है, जिसके चलते यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर न पड़े। 16 नवंबर से शुरू होंगी सेवाएं स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरी योजना का आधिकारिक ऐलान किया। उन्होंने जानकारी दी कि विभाग की योजना के मुताबिक रिलोकेशन की यह पूरी प्रक्रिया आगामी 15 नवंबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाएगी। इसके ठीक अगले दिन यानी 16 नवंबर से इस अस्थायी वैकल्पिक सुविधा केंद्र पर नियमित रूप से कामकाज और चिकित्सा सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। किन विभागों को किया जाएगा शिफ्ट अशोक सिंघल ने स्पष्ट किया कि इस शिफ्टिंग अभियान के दायरे में लगभग सभी प्रमुख चिकित्सा विभाग शामिल होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ चुनिंदा यूनिट्स को इस अस्थायी व्यवस्था से बाहर रखा जा सकता है, जिन्हें मौजूदा परिसर में ही संचालित किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिलोकेशन के इस बड़े दौर में मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और इलाज बिना किसी बाधा के जारी रहे। मरीजों के भारी दबाव पर चर्चा सरकारी अस्पतालों में टेस्ट रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि मेडिकल कॉलेजों में मरीजों का भारी हुजूम उमड़ता है जो प्रबंधन क्षमता से कहीं अधिक है। उन्होंने माना कि जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या में भारी उछाल आता है, तो रिपोर्ट आने में मामूली देरी होना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मेडिकल malpractice की कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन एक पत्रकार द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद उन्होंने इस मामले की गहराई से जांच कराने का पूरा आश्वासन दिया है। दैनिक ओपीडी और डायलिसिस का विस्तार अशोक सिंघल ने बताया कि गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हर दिन लगभग 3,000 आउटपेशेंट आते हैं, जिससे यहां के बुनियादी ढांचे और डायग्नोस्टिक सुविधाओं पर भारी दबाव बना रहता है। इस भारी भीड़ और सीमित संसाधनों के असंतुलन के कारण ही कई बार टेस्ट परिणामों में विलंब जैसी स्थितियां बनती हैं। इसके अलावा, उन्होंने राज्य सरकार की अन्य स्वास्थ्य पहलों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले तीन महीनों के भीतर पूरे असम में 30 से अधिक नए डायलिसिस सेंटर खोले गए हैं ताकि राज्य के दूरदराज के मरीजों को भी बेहतर इलाज आसानी से मिल सके। इसका आप पर असर असम में स्वास्थ्य सेवाओं के इस बड़े फेरबदल से मरीजों और उनके तीमारदारों को अपनी तय मुलाकातों और जांच के लिए नए पते पर जाना होगा। • भारत भर में: देश भर के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के दौरान मरीजों को वैकल्पिक परिसरों में जाना पड़ता है। इस तरह के बदलाव से थोड़े समय के लिए प्रशासनिक सामंजस्य की जरूरत पड़ती है। • गुवाहाटी में: जीएमएचसी के मरीजों को 16 नवंबर से पानबाजार स्थित एमएमएचसी पहुंचना होगा, जहां रोजाना आने वाले करीब 3,000 ओपीडी मरीजों को नई व्यवस्था के अनुसार इलाज मिलेगा। • स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: रिलोकेशन के शुरुआती दिनों में विभागों को ढूंढने और टेस्ट रिपोर्ट मिलने में हल्का व्यवधान आ सकता है। मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे अस्पताल जाने से पहले नए शेड्यूल की जानकारी अवश्य ले लें। • डायलिसिस सेवाएं: राज्यभर में पिछले तीन महीनों में खोले गए 30 से अधिक नए डायलिसिस केंद्रों से गुर्दे के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने से बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम हुआ है। ऐसा क्यों हुआ असम सरकार ने मौजूदा परिसरों के जीर्णोद्धार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज की सेवाओं को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। अस्पतालों में भारी भीड़ और संसाधनों की कमी के चलते यह कदम उठाया गया है। • जीर्णोद्धार की आवश्यकता: मौजूदा जीएमएचसी परिसर में भवनों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण का कार्य बेहद जरूरी हो गया था। इसके बिना आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार संभव नहीं था। • मरीजों का भारी दबाव: अस्पताल में रोजाना लगभग 3,000 आउटपेशेंट आते हैं, जिससे उपलब्ध संसाधनों और डायग्नोस्टिक लैब पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। • रिपोर्ट में देरी के कारण: जब ओपीडी में मरीजों की संख्या संसाधनों की निर्धारित क्षमता से अधिक हो जाती है, तो टेस्ट परिणामों को प्रोसेस करने में स्वाभाविक रूप से समय लगता है। • स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: राज्य सरकार चिकित्सा सेवाओं तक आम जनता की पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसके तहत पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक नए डायलिसिस केंद्र खोले गए हैं। सवाल-जवाब 1. जीएमएचसी की चिकित्सा सेवाएं किस अस्पताल में शिफ्ट की जा रही हैं? जीएमएचसी की अधिकांश चिकित्सा सेवाओं को गुवाहाटी के पानबाजार स्थित महेंद्र मोहन चौधरी अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। 2. यह स्थानांतरण प्रक्रिया कब तक पूरी हो जाएगी? रिलोकेशन की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है और नई जगह पर कामकाज 16 नवंबर से शुरू होगा। 3. इस बदलाव की घोषणा किसने की? इस योजना की घोषणा असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। 4. जीएमएचसी में रोजाना कितने आउटपेशेंट आते हैं? जीएमएचसी में हर दिन लगभग 3,000 आउटपेशेंट आते हैं, जिससे बुनियादी ढांचे पर काफी दबाव रहता है। 5. पिछले तीन महीनों में असम में कितने नए डायलिसिस सेंटर खुले हैं? राज्य भर में पिछले तीन महीनों के दौरान 30 से अधिक नए डायलिसिस केंद्र खोले गए हैं। 6. क्या सभी विभागों को एमएमएचसी में शिफ्ट किया जा रहा है? लगभग सभी विभागों को शिफ्ट किया जा रहा है, हालांकि कुछ चुनिंदा यूनिट्स अस्थायी व्यवस्था से बाहर रह सकती हैं। https://trendkia.com/assam/guwahati-medical-college-to-relocate-services-to-mmch-by-november-16-for-major-renovation-51865 TrendKia — Har trend, sabse pehle.