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  "title": "गुवाहाटी में सार्वजनिक बस नेटवर्क को सुधारने पर मंथन, पूर्वका संवाद में नए अध्ययन के साथ सामने आए जमीनी संकट",
  "summary": "गुवाहाटी के कनकलाल बरुआ सभागार में आयोजित पूर्वका संवाद 2026 में शहर के बस तंत्र की कमजोरियों, प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने नई रिपोर्ट जारी कर व्यापक सुधारों की वकालत की।",
  "content": "असम की राजधानी में दैनिक आवागमन को सुगम बनाने के मकसद से शहरी गतिशीलता के जानकारों, सरकारी योजनाकारों और शोधकर्ताओं ने एक साझा मंच पर विचार साझा किए। पूर्वका फाउंडेशन की ओर से आयोजित पूर्वका संवाद 2026 के दौरान कनकलाल बरुआ सभागार में आयोजित विचार सत्रों में बस सेवाओं की मौजूदा स्थिति, वायु प्रदूषण की जमीनी हकीकत, यातायात जाम और बार-बार होने वाले जलभराव से निपटने के उपायों पर गहन विमर्श हुआ। इसी परिचर्चा के बीच शहर के बस आधारित सार्वजनिक परिवहन ढांचे की वास्तविक स्थिति को रेखांकित करने वाली विशेष शोध रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें यात्रियों की रोजमर्रा की परेशानियों और बस संचालकों की आर्थिक बाधाओं का ब्योरा सामने रखा गया है।\n\nशोध रिपोर्ट में उजागर हुए बस सेवा के जमीनी संकट\nकार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के तौर पर जारी किए गए अध्ययन दस्तावेज में गुवाहाटी के बस आधारित सार्वजनिक आवागमन तंत्र का तकनीकी एवं व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इस विस्तृत दस्तावेज को तैयार करने के लिए यात्रियों, बस से सफर न करने वाले नागरिकों और बस संचालन से जुड़े कर्मियों तथा मालिकों से सीधे बातचीत कर प्राथमिक आंकड़े जुटाए गए। शोध के अनुसार बस सेवा आज भी शहर के आम नागरिकों के लिए अपेक्षाकृत किफायती विकल्प बनी हुई है, लेकिन समय सारिणी की अनिश्चितता, बस अड्डों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव, अंतिम छोर तक जुड़ाव न होना और यात्रा के दौरान सुरक्षा व सहजता की कमी के चलते बड़ी संख्या में लोग बसों से दूरी बना रहे हैं।\n\nअध्ययन में केवल यात्रियों की दिक्कतों तक सीमित न रहकर बस मालिकों और परिचालक दल पर पड़ने वाले वित्तीय दबावों को भी सामने रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक अनिश्चितताओं और परिचालन खर्च के चलते निजी ऑपरेटरों के लिए नियमों के तहत नियमित सेवाएं देना कठिन हो जाता है। इन विसंगतियों को दूर करने के लिए अध्ययन में छोटी, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाएं पेश की गईं। इनमें बसों के मार्गों का तार्किक पुनर्गठन, कड़े प्रवर्तन के जरिए अनधिकृत ठहराव रोकना, निगरानी व्यवस्था दुरुस्त करना और बस स्टॉप के ढांचे का आधुनिकीकरण शामिल है, ताकि पूरी प्रणाली को सभी तबकों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सके।\n\nशहरी योजना और बस सुधार पर विशेषज्ञों का मंथन\nथिंक बसेस नाम से आयोजित पहले पैनल सत्र का संचालन टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिनंदन सैकिया ने किया। इस विमर्श में असम परिवहन विभाग की सहायक आयुक्त तामसिन आफताब, असम सरकार के नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय के सहायक निदेशक शुभाशीष बोरा, दिल्ली से आए आईसीटी इंडिया के अशप्रीत सेठी, जीआईजेड इंडिया की राना अमानी और आईआईटी गुवाहाटी के निपज्योति भारद्वाज ने भाग लिया।\n\nपैनल में शामिल वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि परिवहन तंत्र और नगर नियोजन को अलग-अलग देखने के बजाय एक दूसरे से जुड़ी व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि निजी वाहनों पर अत्यधिक निर्भरता घटाने के लिए पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ जैसे बुनियादी ढांचों का विकास और विभिन्न सरकारी महकमों के बीच आपसी तालमेल अनिवार्य है। इसके अलावा एक ही मार्ग पर एक साथ कई बसों के आ जाने यानी बंचिंग की समस्या और मनमाने ठहराव पर लगाम लगाने के लिए रूट रैशनलाइजेशन और निरंतर निगरानी तंत्र तैयार करने की आवश्यकता बताई गई। परिचर्चा में उपस्थित जानकारों ने सार्वजनिक परिवहन को साझा जनसंपत्ति बताते हुए इसमें सभी संस्थानों और आम जनता की सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया।\n\nप्रदूषण की असलियत और बाढ़ के बीच यातायात की चुनौती\nदोपहर बाद के सत्रों में तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर दो विशेष व्याख्यान पेश किए गए। आईसीटी इंडिया के दीपंकर काकती ने ऑन रोड वाहन उत्सर्जन के आंकड़ों पर आधारित अपनी प्रस्तुति में बताया कि प्रयोगशाला परीक्षणों और सड़क पर वाहनों से निकलने वाले वास्तविक धुएं के स्तर में बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अनियंत्रित उत्सर्जन का सीधा नुकसान जनस्वास्थ्य को हो रहा है, जिसे रोकने के लिए सड़कों पर उत्सर्जन की सख्त निगरानी और शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को तेजी से अपनाने की नीति बनानी होगी।\n\nआईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने अपने वक्तव्य में शहर में लगने वाले जाम, बारिश के दौरान पैदा होने वाले शहरी जलभराव और कमजोर सार्वजनिक बस प्रणाली के त्रिकोणीय संकट को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक डेटा आधारित नियोजन और विभिन्न शहरी प्राधिकरणों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित नहीं होगा, तब तक बाढ़ और जाम की दोहरी मार से शहर की गतिशीलता को मुक्त नहीं कराया जा सकता। कॉटन यूनिवर्सिटी के डॉ. राहुल महंता ने शहरी विकास, जलवायु अनुकूलन और समावेशी परिवहन के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे, जबकि आईआईबीएम गुवाहाटी के डॉ. अभिजीत शर्मा ने भूमि नीति और यातायात ढांचे के आपसी प्रभाव पर बात की।\n\nनागरिकों की रोजमर्रा की आपबीती और सांस्कृतिक प्रस्तुति\nकार्यक्रम का अंतिम परिचर्चा सत्र आम शहरवासियों के अनुभवों पर केंद्रित रहा, जिसका संचालन डॉ. सीमांत कलिता ने किया। इस मंच पर वरिष्ठ नागरिकों, बस स्वामियों, एलजीबीटीक्यूआई+ समुदाय के कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और देखभाल करने वाले सेवा प्रदाताओं ने अपनी दैनिक चुनौतियां रखीं। इस संवाद में नीतिगत सिद्धांतों से आगे बढ़कर आम लोगों के जीवन की हकीकत सामने आई, जिसमें दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए पहुंच की कमी, महिलाओं की सुरक्षा, यात्रा का खर्च और विभिन्न वर्गों की गतिशीलता की भिन्न जरूरतों पर रोशनी डाली गई।\n\nसत्र के दौरान प्रसिद्ध मूक अभिनय कलाकार मिनंग्का डेका द्वारा स्थापित समूह निर्बाक के युवा कलाकारों ने एक हास्य और विचारोत्तेजक मूक नाटक पेश किया। इस प्रस्तुति में गुवाहाटी की बसों की अव्यवस्था और यात्रियों के दैनिक संघर्ष को व्यंग्यात्मक अंदाज में दर्शाया गया। पूर्वका संवाद 2026 को शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड, जीआईजेड इंडिया और एसीसीएमएस का सहयोग प्राप्त था, जबकि द इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन इंडिया इस आयोजन की नॉलेज पार्टनर रही। विमर्श का समग्र निष्कर्ष यही रहा कि केवल सरकारी एजेंसियों, सेवा प्रदाताओं और जनता के मिले-जुले प्रयासों से ही गुवाहाटी के परिवहन को पर्यावरण अनुकूल और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nगुवाहाटी में सार्वजनिक बस नेटवर्क के पुनर्गठन और बुनियादी ढांचे के उन्नयन से दैनिक यात्रियों को अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित सफर की सुविधा मिलने की उम्मीद है।\n\n• दैनिक यात्रियों के लिए: बसों के मार्गों का तार्किक पुनर्गठन होने से बस स्टॉप पर लंबे समय तक खड़े रहने और बसों की बंचिंग से छुटकारा मिलेगा। समय सारिणी नियमित होने से दफ्तर और कॉलेज जाने वाले लोगों के सफर का समय काफी घट सकेगा।\n• गुवाहाटी में: शहर के बस अड्डों पर शेल्टर और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ विकसित किए जाने की सिफारिश की गई है। इसके लागू होने से बारिश और धूप के दौरान यात्रियों को सड़कों पर खड़े होने से राहत मिलेगी।\n• वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए: बसों के भीतर सुरक्षा नियमों के सख्त क्रियान्वयन और चढ़ने-उतरने की व्यवस्था सुगम बनाने पर जोर दिया गया है। इससे सभी वर्गों के लिए सफर अधिक सुरक्षित और आरामदायक बन सकेगा।\n• निजी वाहन चालकों के लिए: सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ होने से सड़कों पर निजी कारों और दोपहिया वाहनों की संख्या में कमी आ सकती है। इससे शहर के व्यस्त चौराहों पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से निजात मिल सकेगी।\n• पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए: वाहनों के वास्तविक उत्सर्जन की निगरानी और शून्य-उत्सर्जन तकनीक अपनाने से हवा की गुणवत्ता सुधरेगी। इससे श्वसन संबंधी बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायता मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगुवाहाटी में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के मुकाबले सार्वजनिक बस नेटवर्क की गुणवत्ता कमजोर होने, अनियंत्रित उत्सर्जन और मानसूनी जलभराव के कारण यह परिचर्चा आयोजित की गई।\n\n• अध्ययन की आवश्यकता: शहर के बस ढांचे पर यात्रियों और बस ऑपरेटरों के अनुभवों को दर्ज करने वाले किसी समग्र दस्तावेज का अभाव था। पूर्वका फाउंडेशन ने पहली बार प्राथमिक सर्वेक्षण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की ताकि जमीनी समस्याओं की पहचान हो सके।\n• सड़क पर वास्तविक उत्सर्जन: प्रयोगशाला परीक्षणों और सड़क पर चलने वाले वाहनों के वास्तविक धुएं के उत्सर्जन में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। इस अंतर के कारण हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिसे नीतिगत बदलाव के जरिए नियंत्रित करना जरूरी हो गया था।\n• शहरी जलभराव और ट्रैफिक जाम: मानसून के दौरान गुवाहाटी में भारी जलभराव के चलते बस सेवाएं ठप हो जाती हैं और जाम विकराल रूप ले लेता है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर नियोजन और परिवहन विभागों के बीच बेहतर तालमेल की कमी महसूस की जा रही थी।\n• ऑपरेटरों पर आर्थिक दबाव: निजी बस मालिकों और कर्मचारियों को बढ़ती परिचालन लागत और अनियमित राजस्व का सामना करना पड़ रहा है। इस वित्तीय दबाव के चलते वे सेवाओं में सुधार और समयबद्धता बनाए रखने में असमर्थ साबित हो रहे थे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पूर्वका संवाद 2026 का आयोजन कहाँ और किसके द्वारा किया गया?\nइस कार्यक्रम का आयोजन गुवाहाटी स्थित गैर-लाभकारी संस्था पूर्वका फाउंडेशन द्वारा कनकलाल बरुआ सभागार में किया गया।\n\n2. इस कार्यक्रम में किस प्रमुख रिपोर्ट को जारी किया गया?\nकार्यक्रम में 'गुवाहाटी ऑन बोर्ड: इनसाइड द बस-बेस्ड पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम' नामक व्यापक शोध रिपोर्ट का विमोचन किया गया।\n\n3. शोध रिपोर्ट में यात्रियों द्वारा बस सेवा से बचने के क्या मुख्य कारण बताए गए?\nरिपोर्ट में सेवाओं की अनिश्चितता, बस स्टॉप पर बुनियादी ढांचे का अभाव, अंतिम छोर तक जुड़ाव न होना तथा सुरक्षा व आराम की कमी को मुख्य कारण बताया गया।\n\n4. वाहन उत्सर्जन को लेकर परिचर्चा में क्या अहम बात सामने आई?\nआईसीटी इंडिया की प्रस्तुति में बताया गया कि प्रयोगशाला परीक्षणों और सड़क पर वाहनों के वास्तविक उत्सर्जन के स्तर में बड़ा अंतर है, जिसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ता है।\n\n5. गुवाहाटी के ट्रैफिक के संबंध में आईआईटी गुवाहाटी के प्रोफेसर ने क्या चुनौती उठाई?\nप्रोफेसर अखिलेश कुमार मौर्य ने ट्रैफिक जाम, शहरी जलभराव और कमजोर सार्वजनिक बस प्रणाली की आपसी समस्याओं को रेखांकित करते हुए डेटा आधारित एकीकृत योजना की मांग की।\n\n6. पूर्वका संवाद 2026 में नॉलेज पार्टनर की भूमिका किस संगठन ने निभाई?\nद इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन इंडिया (आईसीटी इंडिया) ने इस आयोजन में नॉलेज पार्टनर के रूप में सहयोग दिया।",
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