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  "type": "article",
  "title": "गुवाहाटी में शोध उत्कृष्टता के लिए 80 संकाय सदस्यों और शोधार्थियों को मिले 67.48 लाख रुपये के पुरस्कार",
  "summary": "असम डाउन टाउन यूनिवर्सिटी ने अपने वार्षिक समारोह में 80 शिक्षकों और शोधकर्ताओं को कुल 67,48,327 रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की। डॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता चुना गया।",
  "content": "असम के गुवाहाटी में उच्च शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक भव्य आयोजन में कुल 80 संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और शोध अध्येताओं को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। असम डाउन टाउन यूनिवर्सिटी द्वारा मंगलवार को आयोजित एमिनेंस इन रिसर्च अवार्ड्स और रिसर्च रिवॉर्ड सेरेमनी 2026 के मंच से विभिन्न श्रेणियों में कुल 67,48,327 रुपये की प्रोत्साहन राशि बांटी गई। यह पुरस्कार शोध प्रकाशनों, वैज्ञानिक संदर्भों यानी साइटेशन्स, पेटेंट, बाहरी फंडिंग से संचालित परियोजनाओं, शोध पुस्तकों, पुस्तक अध्यायों, प्रतिष्ठित क्यू1 पत्रिकाओं में शोध पत्रों और डॉक्टरेट स्तर के अध्ययनों के आधार पर प्रदान किए गए।\n\n \n\nप्रतिष्ठित वैज्ञानिक व्याख्यान और वैश्विक साझेदारी\n\nसमारोह के उद्घाटन सत्र में डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट्स लेक्चर सीरीज के तहत मुख्य व्याख्यान का आयोजन हुआ। यह व्याख्यान द इको नेटवर्क की संस्थापक और ग्लोबल डायरेक्टर डॉ. शैनन बी. ओल्सन ने प्रस्तुत किया, जो नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (एनसीबीएस), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) से भी जुड़ी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक डॉ. ओल्सन वर्तमान में एनसीबीएस, टीआईएफआर में एक संकाय सदस्य के रूप में कार्यरत हैं और निरंतर शोध तथा अकादमिक कार्यों में संलग्न हैं। उन्होंने कार्यक्रम में अपने विचार साझा करने के साथ-साथ विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार और सम्मान पत्र भी सौंपे।\n\n \n\nसंस्थान में शोध संस्कृति और ज्ञान सृजन पर जोर\n\nविश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नारायण चंद्र तालुकदार ने इस अवसर पर अपने संबोधन में संस्थान के अकादमिक ढांचे में शोध के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. तालुकदार ने स्पष्ट किया कि शोध कार्य विश्वविद्यालय के अकादमिक वातावरण का एक अनिवार्य और केंद्रीय हिस्सा है। उन्होंने कहा, \"ये पुरस्कार हमारे शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अध्येताओं के निरंतर परिश्रम को मान्यता देने और ज्ञान सृजन में उनके विविध योगदान को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस वर्ष शामिल की गई श्रेणियों की विविधता विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में चल रही व्यापक शोध गतिविधियों को दर्शाती है।\"\n\n \n\nडॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता को मिला सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता का खिताब\n\nव्यक्तिगत उपलब्धियों की श्रेणी में फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता सबसे आगे रहे। उन्हें 7,23,500 रुपये का सर्वोच्च व्यक्तिगत शोध पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें वर्ष 2026 के लिए बेस्ट रिसर्चर यानी सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के रूप में नामित किया गया, जिसके तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त नकद राशि, एक स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र दिया गया। यह सम्मान प्रकाशनों, साइटेशन्स, पेटेंट और वित्तपोषित परियोजनाओं में उनके समग्र उत्कृष्ट प्रदर्शन के मूल्यांकन के आधार पर दिया गया।\n\n \n\nनवाचार, पेटेंट और उभरते शोधकर्ताओं की उपलब्धियां\n\nकंप्यूटर और तकनीकी क्षेत्र में हुए अनुसंधानों को भी व्यापक रूप से पुरस्कृत किया गया। फैकल्टी ऑफ कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत प्रतिम बैरागी को सबसे अधिक स्वीकृत पेटेंट दर्ज कराने के लिए बेस्ट इनोवेटर अवार्ड 2026 से नवाजा गया। इसके साथ ही, युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जाने वाले इमर्जिंग रिसर्चर अवार्ड में पुरुष वर्ग का सम्मान फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर (रिसर्च फैकल्टी) डॉ. प्रकाश किशोर हाजम को मिला। वहीं महिला वर्ग में यह पुरस्कार फैकल्टी ऑफ कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दुलुमणि दास को प्रदान किया गया।\n\n \n\nउच्च प्रभाव कारक और पुस्तकों के प्रकाशन में मान्यता\n\nवैज्ञानिक शोध पत्रों की गुणवत्ता और उनकी स्वीकार्यता को आंकने के लिए हाई इम्पैक्ट फैक्टर पब्लिकेशन अवार्ड दिए गए। पुरुष वर्ग में यह सम्मान फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हिमांग्शु डेका को मिला। महिला वर्ग में इसी संकाय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सृजिता चक्रवर्ती को 10.4 इम्पैक्ट फैक्टर वाले प्रतिष्ठित शोध पत्र के प्रकाशन के लिए सम्मानित किया गया। अकादमिक लेखन और पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में फैकल्टी ऑफ अलाइड हेल्थ साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीब मंडल को एक्सीलेंस इन बुक चैप्टर पब्लिकेशन अवार्ड मिला। वहीं एक्सीलेंस इन बुक पब्लिकेशन अवार्ड 2026 संयुक्त रूप से फैकल्टी ऑफ हेल्थ साइंसेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कृष्णखी चौधरी और फैकल्टी ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दीपांकर सैकिया को दिया गया।\n\n \n\nअनुदान, साइटेशन और शोधार्थियों की विशेष श्रेणियां\n\nशोध की प्रासंगिकता और व्यापक प्रभाव को मापने वाली श्रेणियों में फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन प्रो. (डॉ.) सैकत सेन को मूल्यांकन अवधि के दौरान सर्वाधिक उद्धरण दर्ज करने पर हाइएस्ट साइटेशन इम्पैक्ट अवार्ड 2026 प्रदान किया गया। दूसरी ओर, बाहरी स्रोतों से सबसे अधिक मूल्य का शोध अनुदान जुटाने के लिए डॉ. प्रकाश किशोर हाजम को हाइएस्ट रिसर्च ग्रांट अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। क्लेरिवेट के अंतर्गत सर्वाधिक संख्या और गुणवत्ता वाले शोध पत्रों के लिए फैकल्टी ऑफ कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बरण्या बिकाश हजारिका को हाइएस्ट क्यू1 पब्लिकेशन अवार्ड 2026 दिया गया। वहीं, पीएचडी स्तर पर उत्कृष्ट शोध पत्रिकाओं, प्रस्तुतियों और पेटेंट योगदान के लिए फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के प्रोजेक्ट रिसर्च साइंटिस्ट-I परवेज अलोम बरभुइया को बेस्ट रिसर्च स्कॉलर अवार्ड 2026 से नवाजा गया। सभी पुरस्कृत विद्वानों को नकद राशि के साथ स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।\n\nइसका आप पर असर\nइस पुरस्कार वितरण समारोह से पूर्वोत्तर भारत में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के माहौल को सीधा प्रोत्साहन मिलता है।\n\n• भारत में: निजी और राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन देने की प्रवृत्ति मजबूत होगी। इससे संकाय सदस्यों और छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध पत्र और पेटेंट दाखिल करने की प्रेरणा मिलती है।\n• असम में: गुवाहाटी और आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध संस्कृति और बाहरी अनुदान आकर्षित करने की क्षमता बढ़ेगी। इससे स्थानीय शोधकर्ताओं को अपने काम को वैश्विक मंच तक ले जाने के लिए आर्थिक और संस्थागत समर्थन मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअसम डाउन टाउन यूनिवर्सिटी ने अपने संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं द्वारा ज्ञान सृजन, बौद्धिक संपदा और वैश्विक शोध प्रकाशन में दिए गए योगदान को मान्यता देने के लिए यह वार्षिक पुरस्कार समारोह आयोजित किया। विश्वविद्यालय अपने अकादमिक माहौल में अनुसंधान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर मूल्यांकन करता है।\n\n• सीधा कारण: वर्ष 2026 की समीक्षा अवधि के दौरान संकाय सदस्यों द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों, उद्धरणों, प्राप्त पेटेंट और स्वीकृत शोध अनुदानों का संचयी मूल्यांकन किया गया था। इस प्रदर्शन के आधार पर पात्र शोधकर्ताओं को नकद प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया।\n• सहायक परिस्थितियां: विश्वविद्यालय ने नवाचार, पेटेंट, क्यू1 प्रकाशन और पुस्तक लेखन जैसी कई श्रेणियां बनाकर सभी विषयों के शोधकर्ताओं को अपनी विशेषज्ञता साबित करने का अवसर दिया।\n• भावी दिशा: इस तरह के प्रोत्साहनों के बाद संस्थान में बाहरी वित्तपोषित परियोजनाओं और उच्च प्रभाव कारक वाली पत्रिकाओं में प्रकाशनों की संख्या बढ़ने की उम्मीद की जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असम डाउन टाउन यूनिवर्सिटी द्वारा कुल कितनी पुरस्कार राशि बांटी गई?\nविश्वविद्यालय द्वारा एमिनेंस इन रिसर्च अवार्ड्स 2026 समारोह में कुल 67,48,327 रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई।\n\n2. इस समारोह में कितने शिक्षकों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया?\nसमारोह के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल 80 संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और शोध अध्येताओं को सम्मानित किया गया।\n\n3. सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता का पुरस्कार किसे मिला और उन्हें कितनी राशि मिली?\nडॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता को बेस्ट रिसर्चर 2026 चुना गया और उन्हें 7,23,500 रुपये का सर्वोच्च व्यक्तिगत शोध पुरस्कार तथा 50,000 रुपये की अतिरिक्त सम्मान राशि मिली।\n\n4. कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान किसने दिया?\nद इको नेटवर्क की संस्थापक और एनसीबीएस-टीआईएफआर की संकाय सदस्य डॉ. शैनन बी. ओल्सन ने उद्घाटन व्याख्यान दिया।\n\n5. बेस्ट इनोवेटर अवार्ड 2026 किस आधार पर और किसे दिया गया?\nसर्वाधिक स्वीकृत पेटेंट हासिल करने के लिए फैकल्टी ऑफ कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के डॉ. प्रशांत प्रतिम बैरागी को यह पुरस्कार दिया गया।\n\n6. 10.4 इम्पैक्ट फैक्टर वाले प्रकाशन के लिए किसे सम्मानित किया गया?\nफैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सृजिता चक्रवर्ती को इस उच्च इम्पैक्ट फैक्टर वाले प्रकाशन के लिए पुरस्कृत किया गया।\n\nप्रेरणा और सबक\nडॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता और अन्य युवा शोधकर्ताओं की उपलब्धियां दिखाती हैं कि निरंतर मेहनत और शोध के प्रति समर्पण से कैसे अकादमिक उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।\n\n• सख्त परिश्रम से पहचान: डॉ. पार्थ प्रतिम दत्ता द्वारा 7.23 लाख रुपये से अधिक का व्यक्तिगत पुरस्कार और बेस्ट रिसर्चर खिताब जीतना यह सिखाता है कि नियमित प्रकाशन और पेटेंट पर ध्यान केंद्रित करने से बड़ा सम्मान मिलता है।\n• नवाचार को प्राथमिकता: डॉ. प्रशांत प्रतिम बैरागी द्वारा अधिकतम स्वीकृत पेटेंट हासिल करना साबित करता है कि व्यावहारिक समस्याओं के तकनीकी समाधान तलाशना आवश्यक है।\n• शुरुआती दौर से समर्पण: पीएचडी छात्र परवेज अलोम बरभुइया को मिला बेस्ट रिसर्च स्कॉलर सम्मान दर्शाता है कि करियर के शुरुआती चरण में शोध पत्र और पेटेंट पर किया गया काम भविष्य की नींव मजबूत करता है।",
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  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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