कोकराझार के सिखना ज्वह्वलाव नेशनल पार्क में विश्व गैंडा दिवस पर वनकर्मियों को बांटे गए फील्ड सुरक्षा उपकरण असम के कोकराझार स्थित सिखना ज्वह्वलाव नेशनल पार्क की उलटापानी रेंज में विश्व गैंडा दिवस मनाया गया, जहाँ वन्यजीव संरक्षण मजबूत करने के साथ वनकर्मियों को सुरक्षा किट बांटी गई। असम के कोकराझार जिले में स्थित सिखना ज्वह्वलाव राष्ट्रीय उद्यान के उलटापानी वन परिक्षेत्र में मंगलवार को विश्व गैंडा दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता और क्षमता विस्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करना तथा मैदानी स्तर पर काम करने वाले वनकर्मियों के संसाधनों में सुधार लाना था। कार्यक्रम में वन विभाग, स्थानीय ग्रामीण आबादी और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गैर सरकारी संस्थाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। संरक्षण रणनीति और जमीनी तैयारियों पर मंथन इस संगोष्ठी में हाल्टूगांव वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी पी.के. भुइयां, आरण्यक संस्था के महासचिव एवं कार्यकारी निदेशक डॉ बिभव कुमार तालुकदार, उलटापानी वन परिक्षेत्र अधिकारी मिंटू बोरो और एवरग्रीन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीब नार्जरी समेत कई प्रमुख अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में राष्ट्रीय उद्यान के भीतर मौजूद संरक्षण उपायों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और सुरक्षा प्रणाली को और प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने वनकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने, आधुनिक मैदानी उपकरण उपलब्ध कराने और प्रशासनिक समन्वय को धार देने की आवश्यकता जताई। मैदानी सुरक्षा कर्मियों को आवश्यक किट का वितरण वन सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने के संकल्प के तहत आरण्यक द्वारा उलटापानी रेंज के सुरक्षाकर्मियों को जरूरी फील्ड सामग्री का वितरण किया गया। कर्मचारियों को कठिन और प्रतिकूल मौसम में गश्त के दौरान राहत देने के उद्देश्य से मजबूत फील्ड जूते, उच्च गुणवत्ता वाले रेन गियर तथा रिचार्जेबल रेंजर टॉर्च प्रदान की गई। यह उपकरण ऊबड़-खाबड़ रास्तों, घने जंगलों और भारी बारिश के बीच पेट्रोलिंग करने वाले सुरक्षाकर्मियों की गतिशीलता, सुरक्षा और दक्षता को बढ़ाने में मदद करेंगे। सामूहिक भागीदारी से वन संपदा की निगरानी कार्यक्रम के दौरान इस बात को रेखांकित किया गया कि जंगलों और दुर्लभ वन्यजीवों की रक्षा केवल प्रशासनिक आदेशों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय समुदायों और विशेषज्ञों के मिले-जुले ज्ञान का उपयोग आवश्यक है। अवैध शिकार और वन क्षेत्र में होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए यह त्रिस्तरीय साझेदारी महत्वपूर्ण साबित होगी। इस पूरे आयोजन के समन्वय में बिनीता बरुवती, वसीमा बेगम, बिजीत बारो, मिजिंग बोरो और धनंजय मशाहारी की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसका आप पर असर यह पहल असम के सीमांत वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ाने से जुड़ी है। • राष्ट्रीय स्तर पर: भारत में दुर्लभ वन्यजीवों और विशेषकर गैंडों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा से देश की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलती है। नागरिकों के लिए यह वनों और वन्यजीव संपदा के संरक्षण में जन-भागीदारी के महत्व को दर्शाता है। • कोकराझार और असम में: स्थानीय वनकर्मियों को आधुनिक टॉर्च, रेन गियर और जूते मिलने से घने जंगलों में उनकी गश्त अधिक सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगी। आसपास के ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह कार्यक्रम विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय उद्यान में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों को बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आयोजित किया गया। • भौगोलिक और मौसमी चुनौतियां: उलटापानी परिक्षेत्र का भूभाग अत्यंत दुर्गम है और भारी बारिश व घने जंगलों के बीच नियमित निगरानी के लिए विशेष उपकरणों की सख्त दरकार रहती है। उचित फील्ड जूतों और रोशनी के बिना रात में गश्त करना कर्मचारियों के लिए जोखिम भरा रहता था। • सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने की जरूरत: राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिलने के बाद सिखना ज्वह्वलाव में वन्यजीव संरक्षण के मानकों को ऊंचा उठाने और आधुनिक प्रबंधन लागू करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। वन विभाग के सीमित संसाधनों की पूर्ति के लिए नागरिक संगठनों का आगे आना एक महत्वपूर्ण कड़ी है। • सामुदायिक सहयोग की भूमिका: जंगलों की प्रभावी रक्षा तब तक असंभव मानी जाती है जब तक आसपास के ग्रामीणों और वन प्रशासन के बीच लगातार संवाद न हो, जिसे इस बैठक के जरिए एक मंच पर लाया गया। सवाल-जवाब 1. विश्व गैंडा दिवस का यह कार्यक्रम असम में कहाँ आयोजित हुआ? यह आयोजन असम के कोकराझार जिले में स्थित सिखना ज्वह्वलाव राष्ट्रीय उद्यान के उलटापानी वन परिक्षेत्र में हुआ। 2. वनकर्मियों को कौन-से सुरक्षा उपकरण बांटे गए? कर्मियों को कठिन मौसम में काम करने के लिए फील्ड शूज, रेन गियर और रिचार्जेबल रेंजर टॉर्च प्रदान की गई। 3. सुरक्षा किट का वितरण किस संस्था द्वारा किया गया? वन्यजीव संरक्षण संगठन आरण्यक द्वारा यह आवश्यक सामग्री वितरित की गई। 4. बैठक में किन मुख्य विषयों पर चर्चा हुई? वन्यजीव संरक्षण को कड़ा करने, कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने, फील्ड लॉजिस्टिक्स सुधारने और स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बढ़ाने पर चर्चा हुई। https://trendkia.com/assam/kokrajhar-ke-sikhna-jwhwlao-national-park-men-world-rhino-day-para-vanakarmiyon-ko-bante-gae-philda-suraksha-upakarana-36964 TrendKia — Har trend, sabse pehle.