जुबीन गर्ग की मौत के मामले में गुवाहाटी में प्रदर्शन, असम सचिवालय के बाहर सौ से अधिक लोग हिरासत में गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में न्याय की मांग कर रहे सौ से अधिक लोगों को असम सचिवालय के पास पुलिस ने रोक लिया और बसों में भरकर वहां से हटा दिया। असम की राजधानी गुवाहाटी में उस समय गहमागहमी मच गई जब पुलिस ने सचिवालय के बाहर मानवाधिकार श्रृंखला बनाने की कोशिश कर रहे सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। प्रदर्शनकारियों को वहां से बसों में बैठाकर हटा दिया गया, जो पिछले साल सिंगापुर में लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की मौत के मामले में दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे थे। इस आयोजन का आह्वान किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं किया गया था, बल्कि इसे एक जन आंदोलन बताया गया था। अखिल गोगोई की अपील पर जुटे थे लोग राइजोर दल के प्रमुख और सिदसार विधायक अखिल गोगोई ने नागरिकों से सचिवालय के बाहर जुटने का आह्वान किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रदर्शन के लिए अनुमति भी मांगी थी। विभिन्न दलों और संगठनों के लोग हाथों में तख्तियां लेकर वहां पहुंचे थे जिन पर जुबीन गर्ग के लिए न्याय की मांग लिखी हुई थी, लेकिन सुरक्षा बलों ने किसी भी तरह के धरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और सभी को हिरासत में ले लिया। यह पूरा घटनाक्रम पिछले सप्ताह गुवाहाटी के बाहरी इलाके में स्थित जुबीन क्षेत्र नामक श्मशान घाट पर हुई एक बैठक के बाद सामने आया था। एक और चार्जशीट और कानूनी लड़ाई उस बैठक में एक इक्कीस सदस्यीय समिति का गठन किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार पर पूरक चार्जशीट दाखिल करने का दबाव बनाना, दोषियों के लिए मिसाल कायम करने वाली सजा की मांग करना और जमानत पाने वाले आरोपियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाना था। इस सिलसिले में गायक की मृत्यु के बाद पूरे राज्य में साठ से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई थीं और राज्य पुलिस के सीआईडी के विशेष जांच दल ने इस मामले की कमान संभाली थी। पिछले साल दिसंबर के महीने में जांच दल ने गुवाहाटी की एक अदालत में सात लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था, जिनमें से चार लोगों पर हत्या के गंभीर आरोप दर्ज हैं। न्यायालय में जमानत और आरोपियों की सूची आरोपियों की इस सूची में पूर्वोत्तर भारत महोत्सव के मुख्य आयोजक श्यामकनु महंत, गायक के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, बैंड के सदस्य अमृतप्रभा महंत और शेखर ज्योति गोस्वामी, उनके चचेरे भाई और निलंबित डीएसपी संदीपोन गर्ग, तथा व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी नन्देश्वर बोरा और परेश बैश्य शामिल हैं। इनमें से अमृतप्रभा महंत और संदीपोन गर्ग को गुवाहाटी उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है और वे न्यायिक हिरासत से बाहर आ चुके हैं। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि वह इस आदेश को देश के सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी, जबकि इस मामले में पहली शिकायत दर्ज कराने वाले मोरीगांव के वकील रतुल बोरा ने भी शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। दोनों सुरक्षा अधिकारियों को सितंबर के महीने में आय से अधिक संपत्ति के एक अन्य मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन वे गायक की मौत के सिलसिले में अब भी जेल के अंदर बंद हैं। सिंगापुर की जांच और सिंगापुर की अदालत के निष्कर्ष दूसरी ओर, सिंगापुर में हुई आधिकारिक जांच में किसी भी तरह की साजिश या फाउल प्ले के सबूत नहीं मिले थे। वहां की अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि गायक ने अत्यधिक मात्रा में शराब पी रखी थी और लाजरस द्वीप के पास समुद्र में तैरते समय लाइफ जैकेट पहनने से इनकार करने के कारण वे डूब गए थे। हालांकि, असम के अधिकारियों का यह स्पष्ट कहना है कि सिंगापुर की अदालत के उन निष्कर्षों से राज्य में चल रही कानूनी कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधानसभा में यह बयान दिया था कि जुबीन गर्ग की मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सीधी और स्पष्ट हत्या का मामला है। इसका आप पर असर इस घटना का असर स्थानीय स्तर पर यातायात और जनजीवन पर पड़ा है क्योंकि सचिवालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। • असम में: आम नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों के दौरान यातायात पाबंदियों और सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने राजधानी क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी है। • कानूनी स्तर पर: इस मामले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। इससे राज्य में न्याय की मांग कर रहे समर्थकों को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा घटनाक्रम सिंगापुर में लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग की रहस्यमय मृत्यु और उसके बाद कानूनी तथा राजनीतिक स्तर पर उठे विवादों के कारण सामने आया है। • समुद्री दुर्घटना: पिछले साल सितंबर में सिंगापुर में तैरने के दौरान गायक की डूबने से मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके प्रशंसकों और परिजनों ने साजिश का संदेह जताया था। • प्राथमिकी और गिरफ्तारी: राज्य भर में साठ से अधिक पुलिस शिकायतें दर्ज होने के बाद सीआईडी ने जांच की और दिसंबर में सात लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। • जमानत आदेश: उच्च न्यायालय द्वारा कुछ आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद जनता और राजनीतिक नेताओं में असंतोष फैल गया, जिसके चलते सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन का यह नया दौर शुरू हुआ। सवाल-जवाब 1. जुबीन गर्ग की मौत कहां और कब हुई थी? जुबीन गर्ग की मौत पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरने के दौरान हुई थी। 2. सचिवालय के बाहर प्रदर्शन का आह्वान किसने किया था? राइजोर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई ने सचिवालय के बाहर मानवाधिकार श्रृंखला बनाने का आह्वान किया था। 3. सीआईडी ने अदालत में कितने लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी? विशेष जांच दल ने दिसंबर में गुवाहाटी की एक अदालत में सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 4. किन आरोपियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिली है? अमृतप्रभा महंत और संदीपोन गर्ग को गुवाहाटी उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। 5. असम के मुख्यमंत्री ने इस मामले को क्या बताया है? मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधानसभा में कहा था कि जुबीन गर्ग की मौत एक सीधी और स्पष्ट हत्या का मामला है। https://trendkia.com/assam/over-100-detained-outside-assam-secretariat-seeking-justice-for-zubeen-garg-49842 TrendKia — Har trend, sabse pehle.