{
  "type": "article",
  "title": "पर्यावरणविद् जाधव पायेंग की सेहत में सुधार, इलाज का पूरा खर्च उठाएगी असम सरकार",
  "summary": "जोरहाट के अस्पताल में भर्ती पद्मश्री जाधव पायेंग की हालत अब स्थिर है, वहीं राज्य सरकार ने उनके उपचार का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है।",
  "content": "पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए प्रख्यात पर्यावरणविद् जाधव पायेंग की सेहत में अब सुधार देखा जा रहा है। तेज बुखार, खांसी और जुकाम की समस्या बढ़ने के बाद उन्हें असम के जोरहाट स्थित जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अनुसार उनकी शारीरिक स्थिति अब पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। इस बीच राज्य के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने अस्पताल पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और महत्वपूर्ण घोषणा की।\n\nअस्पताल पहुंचे वन मंत्री, इलाज का खर्च उठाने का ऐलान\nवन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने शनिवार को अस्पताल पहुंचकर जाधव पायेंग से मुलाकात की और उनका इलाज कर रहे मेडिकल दल से विस्तृत चर्चा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उनके उपचार का संपूर्ण आर्थिक भार वहन करेगी। अस्पताल परिसर में बातचीत करते हुए जयंत मल्लाबरुआ ने कहा, \n “मैंने डॉक्टरों से बात की है और आज उनसे मुलाकात भी की। मैंने अस्पताल कर्मियों को निर्देश दिया है कि सारा खर्च राज्य सरकार उठाएगी और हम परिवार की हर संभव मदद करेंगे।”\n\nपर्यावरणविद् की बेटी मुनमुनी पायेंग ने भी पिता की हालत स्थिर होने की पुष्टि की है। उन्होंने उपचार में जुटे चिकित्सकों की टीम और सहायता के लिए आगे आए मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।\n\nऑक्सीजन स्तर गिरने के बाद आईसीयू में किया गया था शिफ्ट\nअस्पताल में भर्ती होने से पहले जाधव पायेंग कई दिनों से सर्दी, खांसी और तेज बुखार से जूझ रहे थे। गुरुवार को जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तो चिकित्सीय जांच के दौरान शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे पाया गया। सांस लेने में हो रही गंभीर तकलीफ को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया था। निरंतर निगरानी और सघन उपचार के बाद अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।\n\n1,360 एकड़ में तैयार किया था विशाल मोलाई जंगल\nजाधव पायेंग को दुनिया भर में ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने दशकों के अथक परिश्रम और पौधारोपण के दम पर ब्रह्मपुत्र नदी के एक बंजर रेतीले टीले को घने जंगल में तब्दील कर दिया था। जोरहाट में कोकिलामुख के निकट स्थित यह वन क्षेत्र ‘मोलाई फॉरेस्ट’ के नाम से विख्यात है, जो लगभग 1,360 एकड़ के विशाल दायरे में फैला हुआ है। उनके इस ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए देश-विदेश में उनका विशेष सम्मान किया जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nइस घटनाक्रम से पर्यावरण संरक्षण प्रेमियों को राहत मिली है और राज्य में सम्मानित हस्तियों की देखरेख को लेकर सरकारी तत्परता सामने आई है।\n\n• भारत में: देशभर के पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों के लिए पद्मश्री जाधव पायेंग का स्वास्थ्य सुधार राहत भरी खबर है। इससे यह भी दिखता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व्यक्तियों के संकट में प्रशासनिक तंत्र सहयोग के लिए सक्रिय रहता है।\n• असम में: जोरहाट और आसपास के लोगों के लिए स्थानीय धरोहर समान व्यक्तित्व के इलाज की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार ने ली है। इससे स्थानीय स्तर पर उनके परिवार और समर्थकों को किसी भी आर्थिक चिंता का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n• मरीजों के लिए: अस्पताल प्रशासन पर विशिष्ट निगरानी का दायित्व होने से स्वास्थ्य सुविधाओं की सजगता रेखांकित होती है। सामान्य नागरिकों में भी मौसमी बुखार और ऑक्सीजन स्तर गिरने पर तुरंत चिकित्सीय सलाह लेने की जागरूकता बढ़ती है।\n• पर्यावरण समुदाय के लिए: जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को यह भरोसा मिलता है कि उनके योगदान को शासन स्तर पर महत्व दिया जाता है। इससे भविष्य के संरक्षण अभियानों से जुड़े लोगों का मनोबल मजबूत रहता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजाधव पायेंग को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत मौसमी संक्रमण और अचानक ऑक्सीजन स्तर घटने की वजह से आई।\n\n• सीधा कारण: कई दिनों से लगातार तेज बुखार, खांसी और सर्दी के बाद शरीर में ऑक्सीजन संतृप्ति का स्तर तेजी से नीचे चला गया था। इसके चलते उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी और तुरंत अस्पताल पहुंचाना पड़ा।\n• आईसीयू में भर्ती की वजह: आपातकालीन जांच में जब ऑक्सीजन लेवल सामान्य से कम मिला, तो डॉक्टरों ने किसी भी जोखिम से बचने के लिए उन्हें आईसीयू में स्थानांतरित किया। वहां सघन चिकित्सीय निगरानी मिलने के बाद उनकी हालत संभली।\n• सरकारी सहायता का आधार: पर्यावरण संरक्षण में उनके असाधारण जीवनपर्यंत योगदान और पद्मश्री सम्मान को देखते हुए असम सरकार ने उनके इलाज का संपूर्ण आर्थिक दायित्व उठाने का फैसला किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जाधव पायेंग को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है?\nउन्हें असम के जोरहाट स्थित जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JMCH) में भर्ती कराया गया है।\n\n2. उन्हें अस्पताल में क्यों भर्ती कराना पड़ा था?\nतेज बुखार, खांसी और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरने के कारण उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया।\n\n3. क्या जाधव पायेंग की हालत अब खतरे से बाहर है?\nहां, डॉक्टरों और उनकी बेटी मुनमुनी पायेंग के अनुसार उनकी स्थिति अब पूरी तरह स्थिर है।\n\n4. असम सरकार ने उनके उपचार के संबंध में क्या घोषणा की है?\nअसम के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने घोषणा की है कि राज्य सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और परिवार की मदद करेगी।\n\n5. जाधव पायेंग किस बड़े पर्यावरण कार्य के लिए जाने जाते हैं?\nउन्होंने ब्रह्मपुत्र के रेतीले क्षेत्र में अकेले पेड़ लगाकर लगभग 1,360 एकड़ में फैला ‘मोलाई जंगल’ तैयार किया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nजाधव पायेंग का संपूर्ण जीवन निस्वार्थ सेवा, धैर्य और असीम संकल्प की अद्भुत मिसाल पेश करता है।\n\n• दृढ़ संकल्प की शक्ति: एक अकेले व्यक्ति ने कई दशकों तक लगातार पौधे लगाकर 1,360 एकड़ का घना जंगल तैयार कर दिया। यह सिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अटूट निष्ठा से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।\n• प्रकृति के प्रति निस्वार्थ समर्पण: बंजर जमीन को जीवनदायिनी प्रकृति में बदलना यह दर्शाता है कि पर्यावरण की रक्षा व्यक्तिगत स्तर से शुरू हो सकती है। हर व्यक्ति अपने छोटे प्रयासों से धरती को बेहतर बना सकता है।\n• धैर्य और निरंतरता: जंगल एक दिन में नहीं उगते; पायेंग की वर्षों की मेहनत सिखाती है कि स्थायी बदलाव के लिए लंबे समय तक निरंतर प्रयास जरूरी हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/assam/paryavaranavid-jadav-payeng-ki-sehata-men-sudhara-ilaja-ka-pura-kharcha-uthaegi-assam-sarakara-42782",
  "category": "असम",
  "publishedAt": "2026-10-04",
  "tags": [
    "जाधव पायेंग",
    "फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया",
    "जोरहाट मेडिकल कॉलेज",
    "जयंत मल्लाबरुआ",
    "असम",
    "मोलाई जंगल"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}