# पेरू के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में चुनी गई असमिया फिल्म मोई एती निशाचोर, अमेरिका में भी मिला नामांकन

> राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक विद्युत कोतकी की डार्क कॉमेडी 'मोई एती निशाचोर' को पेरू के ट्रूजिलो अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म समारोह और कैलिफोर्निया के सिनेजॉय व्यूअर्स वॉयस फीचर फिल्म मुकाबले के लिए चुना गया है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/peru-ke-antararashtriya-philma-mahotsava-men-chuni-gai-assamese-philma-moi-eti-nixhasor-america-men-bhi-mila-namankana-41782 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोई एती निशाचोर, विद्युत कोतकी, असमिया सिनेमा, ट्रूजिलो फिल्म महोत्सव, सिनेजॉय फिल्म फेस्टिवल, गुणमोनी बरुआ, अनुराधा शर्मा पुजारी

असम की सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि को पर्दे पर उकेरने वाली असमिया डार्क कॉमेडी फिल्म 'मोई एती निशाचोर' वैश्विक मंचों पर नई पहचान बना रही है। इस फिल्म का चयन पेरू में आयोजित होने वाले ट्रूजिलो अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म समारोह में प्रदर्शन के लिए किया गया है। इसके साथ ही कैलिफोर्निया के सैन जोस में आयोजित सिनेजॉय व्यूअर्स वॉयस फीचर फिल्म प्रतियोगिता में भी इस फिल्म ने नामांकन हासिल किया है। इस दोहरी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि ने पूर्वोत्तर भारतीय सिनेमा को वैश्विक परिदृश्य पर मजबूती से सामने रखा है।

## पेरू और कैलिफोर्निया के समारोहों में भागीदारी
फिल्म के निर्देशक विद्युत कोतकी ने इस चयन पर प्रसन्नता जताते हुए इसे पूरी निर्माण टीम के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने साझा किया कि 'मोई एती निशाचोर' सिनेजॉय व्यूअर्स वॉयस फिल्म फेस्टिवल के मुख्य प्रतियोगिता वर्ग में दर्शकों के सामने पेश की जाएगी। सैन जोस का यह आयोजन कॉन्क्वेस्ट फिल्म फेस्टिवल के सहयोग से संचालित एक दर्शक आधारित ऑनलाइन फिल्म मुकाबला है। पारंपरिक फिल्म समीक्षकों या चुनिंदा जूरी सदस्यों पर निर्भर रहने के बजाय यह मंच सामान्य दर्शकों को वोटिंग के जरिए विजेता चुनने का अवसर प्रदान करता है।

## कहानी का ताना-बाना और नैतिक सवाल
यह फिल्म कोडुवा नाम के एक चतुर ग्रामीण चोर के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सामाजिक उथल-पुथल, पूर्वाग्रहों और कठिन परिस्थितियों के बीच हास्य तथा करुणा के सहारे अपनी राह बनाता है। कोतकी के अनुसार, कहानी मानवीय जुझारूपन और नैतिक द्वंद्व को उजागर करते हुए दर्शकों के सामने यह तीखा सवाल छोड़ती है कि वास्तव में समाज का असली चोर कौन है। इस मुख्य किरदार को जाने-माने रंगमंच कलाकार गुणमोनी बरुआ ने जीवंत किया है, जबकि असमिया सिनेमा जगत के कई जाने-माने और उभरते हुए कलाकार अन्य सहयोगी भूमिकाओं में नजर आते हैं।

## सच्ची घटना पर आधारित निर्माण और पूर्व में मिले सम्मान
फिल्म का कथानक वरिष्ठ पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी द्वारा दर्ज की गई एक वास्तविक घटना से प्रेरित है। इस सिनेमाई प्रयास को नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने प्रोडक्शन हाउस रेड रिवर और ब्लू हिल्स के सहयोग से निर्मित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फिल्म को पहले भी कई प्रमुख सम्मान हासिल हो चुके हैं। वर्ल्डफेस्ट ह्यूस्टन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में इसने सर्वश्रेष्ठ डार्क कॉमेडी और सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार अपने नाम किया था। इसके अलावा फिल्म को कैलिफोर्निया के इंडीफेस्ट फिल्म अवार्ड्स और शिकागो के क्राउन पॉइंट इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में कुल तीन पुरस्कार मिले, जबकि अमेरिका के एकोलेड ग्लोबल फिल्म कॉम्पिटिशन में इसे एक्सीलेंस स्पेशल मेंशन से नवाजा गया।

## इसका आप पर असर
क्षेत्रीय सिनेमा प्रेमियों और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए यह उपलब्धि वैश्विक मंचों तक पहुँचने के नए रास्ते दर्शाती है।

- **पूर्वोत्तर और असम में:** असमिया कहानियों को दक्षिण अमेरिका और अमेरिका के प्रतिष्ठित मंचों पर स्थान मिलने से स्थानीय संस्कृति और कलाकारों का मनोबल बढ़ेगा। इससे राज्य के उभरते पटकथा लेखकों और निर्देशकों को अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण के नए अवसर मिल सकते हैं।
- **स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के लिए:** दर्शकों द्वारा संचालित डिजिटल फिल्म महोत्सव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र सिनेमा को बड़ी पहचान दिला रहे हैं। इससे छोटे बजट की क्षेत्रीय फिल्मों को पारंपरिक वितरकों के बिना भी वैश्विक दर्शक वर्ग हासिल करने का सीधा रास्ता मिलता है।
- **सिनेमा दर्शकों के लिए:** ऑनलाइन प्रतियोगिताओं के जरिए आम दर्शक भी वैश्विक स्तर पर फिल्मों को देखकर अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। इसके माध्यम से सार्थक और वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियों को व्यापक प्रोत्साहन मिलता है।
- **कलाकारों और निर्देशकों के लिए:** अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिलने से स्थानीय रंगमंच और सिनेमा के कलाकारों को राष्ट्रीय व वैश्विक परियोजनाओं में काम के नए अवसर मिलते हैं। इससे भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के प्रति वैश्विक दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह फिल्म अपनी अनूठी डार्क कॉमेडी शैली, वास्तविक घटना से प्रेरित कथानक और मानवीय संवेदनाओं को छूने वाले दृष्टिकोण के कारण अंतरराष्ट्रीय चयनकर्ताओं को आकर्षित करने में सफल रही है।

- **मजबूत और संवेदनशील कथानक:** वरिष्ठ पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी की वास्तविक घटना पर आधारित यह कहानी सामाजिक अशांति के बीच एक चोर के नजरिए से समाज की विसंगतियों को हास्य और करुणा के साथ उजागर करती है।
- **प्रतिष्ठित संस्थानों का समर्थन:** नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और अनुभवी प्रोडक्शन हाउसों के सहयोग ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी और निर्माण मानकों के अनुरूप तैयार करने में मदद की।
- **पूर्व में मिली सफलता:** फिल्म को पहले ही वर्ल्डफेस्ट ह्यूस्टन, इंडीफेस्ट और क्राउन पॉइंट जैसे समारोहों में कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिसने चयन समितियों के बीच इसकी विश्वसनीयता को मजबूत किया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म 'मोई एती निशाचोर' को किस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में चुना गया है?
इस फिल्म को पेरू के ट्रूजिलो अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म समारोह में प्रदर्शन के लिए चुना गया है।

### 2. अमेरिका में इस फिल्म को किस प्रतियोगिता में नामांकन मिला है?
कैलिफोर्निया के सैन जोस में आयोजित सिनेजॉय व्यूअर्स वॉयस फीचर फिल्म प्रतियोगिता में इसे नामांकित किया गया है।

### 3. फिल्म के निर्देशक कौन हैं और कहानी किस पर आधारित है?
इसके निर्देशक विद्युत कोतकी हैं और यह वरिष्ठ पत्रकार अनुराधा शर्मा पुजारी द्वारा लिखी गई एक सच्ची घटना पर आधारित है।

### 4. फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई है?
फिल्म में मुख्य किरदार कोडुवा की भूमिका जाने-माने रंगमंच अभिनेता गुणमोनी बरुआ ने निभाई है।

### 5. इस फिल्म का निर्माण किन संस्थाओं ने मिलकर किया है?
इसे नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने प्रोडक्शन हाउस रेड रिवर और ब्लू हिल्स के साथ मिलकर तैयार किया है।

### 6. फिल्म ने पहले कौन-कौन से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं?
फिल्म ने वर्ल्डफेस्ट ह्यूस्टन 2026 में सर्वश्रेष्ठ डार्क कॉमेडी और सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार जीता था, साथ ही इंडीफेस्ट और क्राउन पॉइंट उत्सवों में भी सम्मान हासिल किए हैं।

## प्रेरणा और सबक
स्थानीय पृष्ठभूमि और सीमित संसाधनों के बावजूद वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का यह सफर स्वतंत्र कलाकारों के लिए प्रेरणादायक है।

- **माटी से जुड़ी कहानियों की ताकत:** अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक वास्तविकताओं को प्रामाणिकता से प्रस्तुत करने वाली कहानियां भाषा की सीमाओं से परे वैश्विक दर्शकों तक पहुंचती हैं।
- **सहयोग और संस्थागत साझेदारी:** सरकारी संस्थाओं और स्वतंत्र निर्माताओं के एकजुट होने से गुणवत्तापूर्ण क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक मंच मिल सकता है।
- **दृढ़ संकल्प और निरंतरता:** एक के बाद एक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भाग लेकर पुरस्कार जीतना यह सिखाता है कि निरंतर प्रयास से छोटी परियोजनाओं को भी बड़ी पहचान दिलाई जा सकती है।

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