सिलीगुड़ी कॉरिडोर से गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन ले जाना बड़ी चुनौती, दो से तीन गुना बढ़ सकता है खर्च असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, चिकन नेक कहे जाने वाले संकरे सिलीगुड़ी गलियारे से बुलेट ट्रेन निकालना सबसे जटिल इंजीनियरिंग कार्य होगा, जिससे परियोजना लागत कई गुना बढ़ सकती है। असम की राजधानी गुवाहाटी को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी इंजीनियरिंग बाधा सिलीगुड़ी कॉरिडोर बनकर उभरी है। पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोड़ने वाले इस बेहद संकरे भूभाग को आमतौर पर 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि इस रणनीतिक गलियारे के जरिए एक अलग और समर्पित हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक तैयार करना तकनीकी रूप से सबसे कठिन चरणों में से एक होगा। इस भौगोलिक चुनौती से निपटने के लिए अपनाए जाने वाले निर्माण मॉडल के आधार पर पूरी परियोजना की लागत दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है। संकरे गलियारे में बुनियादी ढांचे की भारी कमी सिलीगुड़ी गलियारे की भौगोलिक बनावट बेहद संवेदनशील और सीमित है। हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि यह इलाका कुछ जगहों पर केवल 22 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि कुछ बेहद संकरे हिस्सों में इसकी चौड़ाई घटकर महज 16 किलोमीटर रह जाती है। इतने सीमित स्थान में नए भारी बुनियादी ढांचे के लिए जगह तलाशना अपने आप में एक बड़ा काम है। वर्तमान में इसी संकरी पट्टी से होकर एक राष्ट्रीय राजमार्ग और पहले से मौजूद पारंपरिक रेलवे लाइन गुजरती है। ऐसे में उसी सीमित जमीन पर एक और नया हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक बिछाना निर्माण एजेंसियों के लिए बेहद जटिल साबित होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बुलेट ट्रेन को पुराने या मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं दौड़ाया जा सकता। हाई-स्पीड संचालन के लिए पूरी तरह से अलग, आधुनिक और समर्पित ट्रैक नेटवर्क की जरूरत होती है। इसलिए सामान्य पटरियों के विस्तार से यह काम नहीं चल सकता, बल्कि एक नए रूट का निर्माण अनिवार्य है। अंडरग्राउंड ट्रैक या एलिवेटेड स्ट्रक्चर का विकल्प चिकन नेक के संकरे और व्यस्त हिस्से को सुरक्षित रूप से पार करने के लिए मुख्य रूप से दो तकनीकी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पूरे रणनीतिक हिस्से में या तो जमीन के नीचे से अंडरग्राउंड रेलवे सुरंग बनाई जाएगी या फिर जमीन के ऊपर से विशाल एलिवेटेड खंभों पर ऊंचा स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। दोनों ही निर्माण प्रणालियां सामान्य रेलवे निर्माण की तुलना में कई गुना अधिक जटिल और खर्चीली हैं। इसी कारण से परियोजना का शुरुआती बजट सामान्य अनुमानों से दो से तीन गुना तक उछल सकता है। तकनीकी डिजाइन, ट्रैक का सटीक रूट एलाइनमेंट और अंतिम निर्माण पद्धति अभी तय नहीं हुई है। हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि वह अपनी आगामी नई दिल्ली यात्रा के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ इन सभी तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करेंगे। प्रारंभिक रुकावटों के बाद मिली थी मंजूरी शुरुआती योजना में इस उत्तरी हाई-स्पीड कॉरिडोर को केवल सिलीगुड़ी तक ही सीमित रखने का प्रस्ताव था। असम तक इसके विस्तार का विचार पहले बहुत दूर की बात लगता था और कभी आम मांग भी नहीं रहा था। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जुलाई में उनके लिखित अनुरोध और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ व्यक्तिगत बैठक के बाद केंद्र ने इस प्रस्ताव के महत्व को समझा और परियोजना को पूर्वोत्तर के असम तक बढ़ाने की हरी झंडी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि जब यह कॉरिडोर पूरा होगा, तो गुवाहाटी से दिल्ली की यात्रा आठ घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। असम में उभरते हाई-टेक उद्योगों के लिए दिल्ली और दो राज्यों की राजधानियों तक उड़ान जैसी सस्ती और तेज कनेक्टिविटी व्यापार व रोजगार के नए अवसर तैयार करेगी। हालांकि, मंजूरी मिलना केवल प्रक्रिया की शुरुआत है। अभी विस्तृत सर्वे, सटीक रूट प्लानिंग और इस्तेमाल होने वाली हाई-स्पीड तकनीक का चयन किया जाना बाकी है। इसका आप पर असर गुवाहाटी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन पूर्वोत्तर और देश के प्रमुख महानगरों के बीच यात्रा के समय में भारी कटौती करेगी। • भारत में: नई दिल्ली से पूर्वोत्तर के बीच हाई-स्पीड रेल संपर्क बनने से दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन तेज और सुगम हो जाएगा। इससे देश के अन्य हिस्सों के उद्यमियों और पर्यटकों के लिए पूर्वोत्तर के बाजारों तक पहुंचना आसान होगा। • असम में: गुवाहाटी से दिल्ली की यात्रा आठ घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी, जिससे हवाई किराए के मुकाबले किफायती विकल्प मिलेगा। राज्य में स्थापित हो रहे नए हाई-टेक उद्योगों को तेज कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। • परियोजना की लागत: सिलीगुड़ी के संकरे हिस्से में टनल या एलिवेटेड ट्रैक बनने से बजट दो से तीन गुना तक बढ़ सकता है। भारी निर्माण लागत के कारण परियोजना की वित्तीय योजना और निर्माण समयसीमा पर असर पड़ सकता है। • दैनिक यात्री: यात्रियों को सामान्य ट्रेनों की तुलना में बहुत तेज और आधुनिक यात्रा अनुभव मिलेगा। टिकट बुकिंग और वास्तविक यात्रा संचालन के लिए अभी विस्तृत सर्वे और निर्माण कार्य पूरा होने का इंतजार करना होगा। ऐसा क्यों हुआ सिलीगुड़ी गलियारे की भौगोलिक बनावट और सीमित चौड़ाई के चलते बुलेट ट्रेन के निर्माण में गंभीर तकनीकी चुनौतियां खड़ी हुई हैं। • भौगोलिक बाधा: चिकन नेक का इलाका कई स्थानों पर घटकर केवल 16 से 22 किलोमीटर चौड़ा रह जाता है। इतनी संकरी पट्टी में एक नया और अलग हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर बिछाने के लिए खाली जमीन बेहद सीमित है। • मौजूदा बुनियादी ढांचा: इस संकरे क्षेत्र से पहले से ही एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और एक पारंपरिक रेल लाइन गुजर रही है। पहले से मौजूद इन बुनियादी ढांचों के बीच तीसरी समर्पित लाइन जोड़ना तकनीकी रूप से बेहद पेचीदा काम बन गया है। • समर्पित ट्रैक की अनिवार्यता: बुलेट ट्रेनें मौजूदा पारंपरिक रेल पटरियों पर नहीं चलाई जा सकतीं, जिसके लिए बिल्कुल नया स्वतंत्र नेटवर्क बनाना जरूरी है। जमीन की कमी के कारण या तो गहरी सुरंग बनानी होगी या फिर खंभों पर एलिवेटेड ट्रैक खड़ा करना होगा, जिससे लागत दो से तीन गुना बढ़ सकती है। • नीतिगत बदलाव: यह कॉरिडोर पहले केवल सिलीगुड़ी तक नियोजित था, लेकिन असम सरकार के अनुरोध के बाद केंद्र सरकार ने इसे गुवाहाटी तक बढ़ाने का फैसला किया। अब तकनीकी एलाइनमेंट और सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही अंतिम निर्माण कार्य का रास्ता साफ होगा। सवाल-जवाब 1. गुवाहाटी बुलेट ट्रेन परियोजना में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती क्या है? चिकन नेक कहे जाने वाले संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर से हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक निकालना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। 2. सिलीगुड़ी कॉरिडोर की चौड़ाई कितनी है? यह गलियारा कुछ हिस्सों में लगभग 22 किलोमीटर और कुछ बेहद संकरे स्थानों में केवल 16 किलोमीटर चौड़ा है। 3. संकरे गलियारे को पार करने के लिए किन निर्माण विकल्पों पर विचार हो रहा है? इस हिस्से को पार करने के लिए या तो जमीन के नीचे अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक या फिर ऊपर एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाने पर विचार किया जा रहा है। 4. इस तकनीकी चुनौती से परियोजना की लागत पर क्या असर पड़ सकता है? सिलीगुड़ी के हिस्से में चुने जाने वाले इंजीनियरिंग समाधान के आधार पर परियोजना लागत दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है। 5. क्या बुलेट ट्रेन मौजूदा रेलवे पटरियों पर चल सकती है? नहीं, बुलेट ट्रेन मौजूदा पटरियों पर नहीं चल सकती और इसके लिए पूरी तरह से अलग समर्पित नेटवर्क की जरूरत होती है। 6. बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद गुवाहाटी और दिल्ली के बीच यात्रा का समय कितना रह जाएगा? बुलेट ट्रेन शुरू होने पर गुवाहाटी से दिल्ली की यात्रा आठ घंटे से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। https://trendkia.com/assam/siliguri-corridor-se-guwahati-taka-bullet-train-le-jana-bari-chunauti-do-se-tina-guna-barha-sakata-hai-kharcha-55897 TrendKia — Har trend, sabse pehle.