सीमा विवाद के बीच मुकरोह में असम का सर्वे रुका, निवासी मेघालय का हिस्सा होने का दावा करते हैं असम-मेघालय सीमा पर स्थित विवादित गाँव मुकरोह में सोमवार घरों से जानकारी जुटाने की कार्रवाई को स्थानीय खासी निवासियों ने रोक दिया। उनका पक्ष है कि गाँव असम या करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में नहीं, बल्कि मेघालय में आता है। शिलांग: असम और मेघालय की सीमा पर बसे विवादित गाँव मुकरोह में सोमवार असम के अधिकारियों को घर-घर जानकारी जुटाने की कार्रवाई करने नहीं दिया गया। स्थानीय निवासियों ने कहा कि इलाका मेघालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, असम के अंतर्गत नहीं। घर-घर जानकारी संकलन पर आपत्ति असम सरकार के अधिकारी गाँव के घरों से जनसंख्या-संबंधी विवरण इकट्ठा कर रहे थे। यह कार्रवाई केवल इलाके का दौरा नहीं थी, बल्कि अलग-अलग घरों से जानकारी लेने से जुड़ी थी। मेघालय में बस्ती को मुकरोह और असम में मोकरू कहा जाता है। स्थानीय खासी समुदाय के लोगों ने अधिकारियों की मौजूदगी का विरोध किया और गणना में सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। उनके विरोध के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। उनका पक्ष है कि मुकरोह न तो असम के प्रशासनिक नियंत्रण में है और न ही करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल (KAAC) के अधिकार क्षेत्र में आता है। गणनाकर्ता को नुकसान पहुंचाने का आरोप मुठभेड़ के दौरान एक गणनाकर्ता को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप सामने आया। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी, इसलिए धमकी से जुड़ा आरोप स्थापित नहीं माना जा सकता। मेघालय से मदद के पुराने संबंध निवासी मेघालय प्रशासन से अपने लंबे समय से जुड़े होने की बात करते हैं और कहते हैं कि सालों से उन्हें राज्य की ओर से सरकारी सहायता मिलती रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवासीय लाभ मिलने का खास हवाला दिया। उनका दावा है कि असम की ओर से ऐसी समान सहायता नहीं मिली। यही संबंध उनके लिए मेघालय से अपनी प्रशासनिक पहचान जोड़ने का आधार बनता है। सीमा विवाद फिर चर्चा में स्थानीय समुदाय का मानना है कि वह न करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल और न असम प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसी विचार ने घरों से जानकारी संकलन के विरोध को दिशा दी। सोमवार की घटना ने मुकरोह की विवादित हैसियत को फिर से ध्यान में ला दिया है। गाँव अभी भी असम और मेघालय के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापक सीमा विवाद का हिस्सा है। इसका आप पर असर इस घटना का सबसे सीधा असर मुकरोह के निवासियों की प्रशासनिक पहचान, अधिकार-क्षेत्र और सरकारी सहायता तक उनकी पहुंच से जुड़े उनके दावों पर पड़ता है। • भारत में: सीमा विवाद वाले इलाकों में कोई घर-घर जानकारी अभ्यास स्थानीय लोगों के लिए केवल गणना नहीं, बल्कि अधिकार-क्षेत्र स्वीकार करने का सवाल बन सकता है। इसलिए अधिकारियों को ऐसी कार्रवाई से पहले राज्य की सीमा और स्थानीय प्रशासनिक दावों की स्पष्टता को ध्यान में रखना पड़ता है। • मेघालय और असम में: मुकरोह के निवासी खुद को मेघालय का हिस्सा मानते हैं, मेघालय से सरकारी मदद और प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासीय लाभ का हवाला देते हैं, और असम से समान सहायता न मिलने की बात करते हैं। उनका सहयोग से इनकार और गणनाकर्ता को नुकसान पहुंचाने का अपुष्ट आरोप दिखाते हैं कि यहां अधिकार-क्षेत्र और सरकारी लाभों को लेकर तनाव तुरंत प्रभावित हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ घटना का तुरंत कारण असम के अधिकारियों का सोमवार को मुकरोह के घरों से जनसंख्या-संबंधी जानकारी इकट्ठी करना था। स्थानीय निवासियों ने इसे असम के अधिकार-क्षेत्र को स्वीकारने जैसा माना, जो उनके दावे के विपरीत है। असम-मेघालय सीमा विवाद की कानूनी शुरुआत या अंतिम सीमांकन इस जानकारी में नहीं बताया गया है। • अधिकार-क्षेत्र का टकराव: खासी निवासियों का कहना है कि गाँव न असम और न करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में है। इसी आधार पर उन्होंने अधिकारियों की उपस्थिति का विरोध किया और जानकारी देने से इनकार किया। • मेघालय से लंबे संबंध: निवासी कहते हैं कि उनका मेघालय प्रशासन से सालों पुराना संबंध है और उन्हें वहां से सरकारी सहायता मिलती रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासीय लाभ का खास जिक्र किया और असम से ऐसी समान सहायता न मिलने का दावा किया। • क्या पहले भी ऐसा हुआ: उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि इससे पहले भी ऐसा ही जानकारी संकलन रोका गया था। लेकिन मुकरोह की हैसियत पहले से विवादित है और गाँव असम-मेघालय के लंबे सीमा विवाद का हिस्सा है। • आगे क्या होगा: सोमवार की घटना ने मुकरोह के विवादित दर्जे और लंबे सीमा विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। आगे कोई बैठक, घोषणा या प्रशासनिक कदम उठेगा या नहीं, इसका विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है। सवाल-जवाब 1. मुकरोह में सोमवार कौन सी कार्रवाई रोकी गई? असम के अधिकारियों को घरों से जनसंख्या-संबंधी जानकारी इकट्ठी करने से रोका गया। स्थानीय निवासियों ने अधिकारियों के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया। 2. मुकरोह गाँव कहां स्थित है? गाँव असम और मेघालय की सीमा पर स्थित है और उसकी प्रशासनिक हैसियत विवादित है। 3. गाँव को असम और मेघालय में किस नाम से जाना जाता है? मेघालय में इसे मुकरोह कहा जाता है, जबकि असम में इसी बस्ती को मोकरू कहा जाता है। 4. निवासियों ने जानकारी संकलन में सहयोग क्यों नहीं किया? उनका दावा है कि गाँव असम या करबी आंगलोंग ऑटोनॉमस काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में नहीं, बल्कि मेघालय में आता है। इसलिए उन्होंने अधिकारियों का विरोध किया। 5. क्या गणनाकर्ता को धमकी देने का आरोप साबित हुआ? नहीं। एक गणनाकर्ता को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप लगा, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। 6. निवासियों ने मेघालय से किस सहायता का हवाला दिया? उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवासीय लाभ मिलने की बात कही। उनका दावा है कि असम से ऐसी समान सहायता नहीं मिली। 7. मुकरोह का मामला किस बड़े विवाद से जुड़ा है? यह असम और मेघालय के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापक सीमा विवाद का हिस्सा है। सोमवार की घटना ने गाँव की विवादित हैसियत को फिर चर्चा में ला दिया। https://trendkia.com/assam/sima-vivada-ke-bicha-mukroh-men-assam-ka-sarve-ruka-nivasi-meghalaya-ka-hissa-hone-ka-dava-karate-hain-32487 TrendKia — Har trend, sabse pehle.