# सितंबर ११ को सिनेमाघरों में उतरेगी बहुप्रतीक्षित असमिया फिल्म महाबाहु द ब्रह्मपुत्र

> प्रंजल प्रातिम चेटिया के निर्देशन में बनी असमिया फिल्म महाबाहु द ब्रह्मपुत्र अब ग्यारह सितंबर को रिलीज होगी। यह फिल्म ब्रह्मपुत्र नदी और उसके तटवर्ती इलाकों के संघर्षों पर आधारित है।

**Type:** article · **Category:** असम · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/assam/sitnbara-ko-sinemagharon-men-utaregi-bahupratikshita-assam-iya-philma-mahabahu-the-brahmaputra-31035 · **Language:** Hindi
**Tags:** असमिया फिल्म, महाबाहु द ब्रह्मपुत्र, प्रंजल प्रातिम चेटिया, ब्रह्मपुत्र नदी, जुबीन गर्ग, असम सिनेमा, सितंबर रिलीज

असमिया सिनेमा प्रेमियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। बहुप्रतीक्षित फिल्म **महाबाहु द ब्रह्मपुत्र** अब आगामी ग्यारह सितंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह पूरी कहानी ब्रह्मपुत्र नदी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसमें इस विशाल जलधारा के किनारे जीवन गुजारने वाले आम लोगों के कड़े संघर्षों को बेहद करीब से दर्शाया गया है।

 

## निर्माण और शुरुआती रुकावटें

इस प्रोजेक्ट को मनोरीजित एंटरटेनमेंट के बैनर तले लौहित्या आर्ट्स के सहयोग से तैयार किया गया है। फिल्म के लेखक, निर्देशक और मुख्य अभिनेता की भूमिका प्रंजल प्रातिम चेटिया ने खुद निभाई है। मूल रूप से इस फिल्म को उन्नीस जून को सिनेमाघरों में आना था, लेकिन असम में आई भीषण बाढ़ की गंभीर स्थिति और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते इसकी रिलीज टाल दी गई थी।

 

## नाम के मायने और सात साल का सफर

फिल्म के निर्देशक प्रंजल प्रातिम चेटिया ने बताया कि शीर्षक महाबाहु इस नदी के विराट स्वरूप और कथा के मूल भाव को सटीक रूप से परिभाषित करता है। उन्होंने साझा किया कि इस नाम में एक असीम विशालता महसूस होती है जो सीधे दर्शकों को फिल्म के कथ्य से जोड़ देती है। ब्रह्मपुत्र पर आधारित फिल्म बनाने का साहसिक कदम उठाने से लेकर आज तक का यह सात साल का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। इस दौरान कोविड महामारी से लेकर भयंकर बाढ़ जैसी कई आपदाओं का सामना करना पड़ा और अंततः ग्यारह सितंबर की तारीख पक्की हो गई।

 

## वैज्ञानिक अभियान और बाढ़ की विभीषिका

कथा का मुख्य केंद्र शिवसागर है। कहानी एक वैज्ञानिक दल के सफर का अनुसरण करती है जो शक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी में आगे बढ़ता है और इसकी अप्रत्याशित धाराओं के बीच आने वाली मुश्किलों का सामना करता है। यह महाकाय नदी पर्दे पर एक तरफ जहां बेहद खूबसूरत और मनमोहक नजर आती है, वहीं दूसरी तरफ इसका आक्रामक रूप इंसानी सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेता है। इसके साथ ही पटकथा में बाढ़ की विवश करने वाली सच्चाई को भी समाहित किया गया है, जो स्थानीय निवासियों के जीवन को हर साल प्रभावित करती है।

 

## डॉ भूपेन हजारिका से जुड़ाव और खास स्क्रीनिंग

निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि महाबाहु शब्द का सीधा जुड़ाव दिग्गज संगीतकार डॉ भूपेन हजारिका से है। फिल्म की पहली सार्वजनिक स्क्रीनिंग दिवंगत हजारिका की जयंती के खास अवसर पर आयोजित की गई थी। इस फिल्म को जुबीन गर्ग की मधुर आवाज से भी सजाया गया है, जिससे इसका संगीत और अधिक समृद्ध हो जाता है। पूरी टीम ने इसे एक नई और अनूठी शैली में गढ़ा है ताकि दर्शकों को कुछ अलग अनुभव मिल सके।

 

## कलाकार और तकनीकी टीम

फिल्म में मुख्य अभिनेता के विपरीत प्रीति के कोंगाना ने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है। कलाकारों की इस सूची में जादुमोनी दत्ता, दिल्ली के एनएसडी से प्रशिक्षित रंगमंच कलाकार पालाश प्रातिम मेच, राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार सेवन सिंह येइन, प्रयास, गिगी प्रभात दत्ता, दियाश्री और पल्लवी गोहाई पाठक जैसे अनुभवी तथा नए कलाकार शामिल हैं। अभिनेत्री कोंगाना का कहना है कि यह फिल्म असम के लोगों की प्रमुख समस्याओं और हर साल आने वाली बाढ़ को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है।

 फिल्म के निर्माण से जुड़े अन्य प्रमुख लोगों में निर्माता मोनूज सांगबुन फुकन शामिल हैं, जबकि प्रंजल प्रातिम चेटिया सह-निर्माता हैं। इसके अलावा बिद्युत कोंवार, आकाश दुवोरीज और हेमंत फुकन सहायक निर्माता के रूप में जुड़े हैं, और समीर दत्ता ने कार्यकारी निर्माता की भूमिका निभाई है।

 

## संगीत और तकनीकी पक्ष

इस फिल्म का संगीत शंकुराज कोंवार, सव्वी सबरवाल और सुकुमार दत्ता ने मिलकर तैयार किया है। गानों में जुबीन गर्ग, दीपलिना डेका, शंकुराज कोंवार, पापोरी गोगोई, सीमांत शेखर और गरिमा क्रिस्टी जैसी बेहतरीन आवाज़ें सुनने को मिलेंगी, जबकि पृष्ठभूमि का संगीत सुकुमार दत्ता ने दिया है। चलचित्र का फिल्मांकन रिपु कश्यप और राजा गोगोई ने किया है, और संपादन की जिम्मेदारी तापोष फुकन ने संभाली है। नृत्य निर्देशन आशिम गोगोई और पवित्र बोराह का है।

## इसका आप पर असर
फिल्म की रिलीज से स्थानीय फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय संस्कृति को नया मंच मिलेगा।

- **भारत में:** असम की क्षेत्रीय संस्कृति और वहाँ की भौगोलिक चुनौतियों से देश के बाकी हिस्सों के दर्शक रूबरू हो सकेंगे।

- **असम में:** स्थानीय सिनेमाघरों और कलाकारों को इस फिल्म के प्रदर्शन से बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

- **दर्शकों के लिए:** फिल्म प्रेमी ब्रह्मपुत्र की पृष्ठभूमि पर बनी इस नई कहानी का आनंद सिनेमाघरों में उठा सकेंगे।

- **समय सीमा:** फिल्म निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ग्यारह सितंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।

- **व्यावहारिक प्रभाव:** क्षेत्रीय सिनेमा के प्रति दर्शकों की रुचि बढ़ेगी और स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म की रिलीज में देरी का मुख्य कारण क्षेत्र में आई गंभीर बाढ़ और अन्य प्रशासनिक स्थितियां थीं।

- **बाढ़ की स्थिति:** मूल रूप से जून में आने वाली फिल्म को असम के बाढ़ संकट के कारण आगे बढ़ाना पड़ा।

- **सात वर्ष की मेहनत:** कोरोना महामारी और अन्य बाधाओं के बावजूद निर्देशक ने इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा किया।

- **सांस्कृतिक महत्व:** डॉ भूपेन हजारिका की जयंती पर पहली स्क्रीनिंग रखकर इस रचना को विशेष सम्मान दिया गया।

- **नदी का प्रभाव:** ब्रह्मपुत्र के विशाल स्वरूप और स्थानीय जीवन के संघर्षों को पर्दे पर उतारने का यह अनूठा प्रयास है।

## सवाल-जवाब

### 1. महाबाहु द ब्रह्मपुत्र फिल्म कब रिलीज होगी?
यह फिल्म ग्यारह सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

### 2. फिल्म के निर्देशक कौन हैं?
इस फिल्म के लेखक और निर्देशक प्रंजल प्रातिम चेटिया हैं।

### 3. फिल्म की रिलीज पहले क्यों टाल दी गई थी?
असम में आई भीषण बाढ़ की स्थिति और अन्य कारणों से इसे पहले स्थगित किया गया था।

### 4. फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई है?
प्रंजल प्रातिम चेटिया और प्रीति के कोंगाना ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं।

### 5. फिल्म का संगीत किसने तैयार किया है?
इसका संगीत शंकुराज कोंवार, सव्वी सबरवाल और सुकुमार दत्ता ने तैयार किया है।

## प्रेरणा और सबक
यह सफर दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी लगातार मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

- **दृढ़ संकल्प:** सात वर्षों तक तमाम बाधाओं का सामना करते हुए अपनी रचनात्मक दृष्टि पर अडिग रहना।

- **संकट प्रबंधन:** महामारी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बीच काम जारी रखना और सही समय का इंतजार करना।

- **सांस्कृतिक जुड़ाव:** अपनी कला को अपनी संस्कृति और स्थानीय महापुरुषों की विरासत से जोड़कर रखना।

- **सहयोग की भावना:** विभिन्न कलाकारों और तकनीशियनों को एक साथ लाकर एक साझा उद्देश्य के लिए काम करना।

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