असम के सोनपुर में दो लोग गिरफ्तार, छह कस्तूरी मृग ग्रंथियां बरामद असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में पुलिस ने अरुणाचल प्रदेश के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से छह कस्तूरी मृग ग्रंथियां बरामद की गईं, जिनका वजन लगभग 158 ग्राम है। असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अरुणाचल प्रदेश के दो लोगों को धर दबोचा। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई शनिवार को मेधिकुची इलाके में अंजाम दी गई। पुलिस ने मौके पर जाल बिछाकर दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से कस्तूरी मृग की छह ग्रंथियां बरामद की गईं, जिनका कुल वजन करीब 158 ग्राम बताया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और तस्करी का रूट पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान मोगा डोये और नोकफुआ वांग्सा के रूप में हुई है। इनमें से 48 वर्षीय मोगा डोये लोअर सियांग जिले के रहने वाले हैं, जबकि 44 वर्षीय नोकफुआ वांग्सा चांगलांग जिले के निवासी हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह अवैध खेप अरुणाचल प्रदेश से लाई गई थी और इसे असम के रास्ते आगे ले जाया जा रहा था। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस अवैध परिवहन का मुख्य गंतव्य स्थल कहां था और इसे किसे सौंपा जाना था। कस्तूरी की मांग और वन्यजीव संरक्षण कानून नर कस्तूरी मृग की ग्रंथि से निकलने वाला कस्तूरी पदार्थ अपने विशेष और लंबे समय तक टिकने वाले सेकेंट यानी सुगंध के लिए दुनिया भर में अत्यधिक प्रसिद्ध है। इस सुगंध का उपयोग विभिन्न प्रकार के महंगे इत्र और सुगंधित उत्पादों को तैयार करने में किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजारों में इस दुर्लभ वस्तु की कीमत काफी अधिक आंकी जाती है। भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत कस्तूरी मृग को एक अत्यंत लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। इस कानून के प्रावधानों के तहत वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों के व्यापार पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच सोनपुर पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) के नेतृत्व में गठित एक विशेष पुलिस दल ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बरामद की गई सामग्री का अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में बहुत अधिक मौद्रिक मूल्य हो सकता है। वर्तमान में पुलिस यह पता लगाने के लिए आगे की जांच में जुटी है कि यह प्रतिबंधित सामग्री वास्तव में किस सटीक प्रजाति से निकाली गई थी। इसके साथ ही जांचकर्ता यह भी खंगाल रहे हैं कि क्या यह जब्ती किसी बड़े और संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़ी हुई है या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय है। इसका आप पर असर वन्यजीव अंगों की अवैध तस्करी के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई से वन्यजीव अपराधों पर लगाम कसने में मदद मिलती है। • भारत में: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत लुप्तप्राय प्रजातियों के अंगों का व्यापार करने वालों को कड़ी कानूनी सजा और जेल का सामना करना पड़ता है। ऐसे कड़े कानूनों से दुर्लभ जीवों के अवैध शिकार पर प्रभावी रोक लगती है। • असम में: सोनपुर और कामरूप मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस ऐसे तस्करों के खिलाफ विशेष जाल बिछाकर सख्त निगरानी रख रही हैं। स्थानीय पुलिस की इस तरह की त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में संगठित वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क कमजोर होते हैं। ऐसा क्यों हुआ वन्यजीव अंगों के अवैध कारोबार के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी बेहद ऊंची कीमत और सुगंधित उद्योगों में इनकी मांग मुख्य कारण हैं। • अवैध मांग और मूल्य: नर कस्तूरी मृग की ग्रंथि से निकलने वाले कस्तूरी का उपयोग महंगे इत्र बनाने में होता है, जिससे काले बाजार में इसकी भारी कीमत मिलती है। • पारगमन मार्ग: अरुणाचल प्रदेश के जंगली क्षेत्रों से शिकार किए गए वन्यजीव अंगों को पड़ोसी राज्यों के रास्ते बाहर ले जाने के लिए तस्कर असम को एक ट्रांजिट रूट के रूप में उपयोग करते हैं। • खुफिया तंत्र की सक्रियता: पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को मिली सटीक गुप्त सूचना के आधार पर समय रहते जाल बिछाया गया, जिससे तस्करों को रंगे हाथों पकड़ा जा सका। सवाल-जवाब 1. यह गिरफ्तारी किस जिले में हुई? यह गिरफ्तारी असम के कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के सोनपुर इलाके के मेधिकुची में हुई। 2. कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? इस मामले में अरुणाचल प्रदेश के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 3. गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम क्या हैं? पकड़े गए आरोपियों के नाम मोगा डोये और नोकफुआ वांग्सा हैं। 4. उनके पास से क्या बरामद किया गया? उनके कब्जे से कस्तूरी मृग की छह ग्रंथियां बरामद की गईं जिनका वजन लगभग 158 ग्राम था। 5. कस्तूरी मृग किस कानून के तहत संरक्षित हैं? कस्तूरी मृग वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत संरक्षित हैं। https://trendkia.com/assam/tu-arunachal-mena-helda-vid-siksa-musk-deer-glaindsa-ina-assam-s-sonapur-39509 TrendKia — Har trend, sabse pehle.