जुबीन गर्ग की पहली बरसी पर असम में उमड़े प्रशंसक, मौत की जांच और न्याय की मांग तेज असमिया संगीत के दिग्गज जुबीन गर्ग के निधन को एक साल पूरा होने पर सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रशंसक और कलाकार पहुंचे। इस दौरान उनकी याद में गीत गाए गए और साथ ही मौत की निष्पक्ष जांच व न्याय की मांग दोहराई गई। गुवाहाटी के बाहरी इलाके सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में शनिवार को सैकड़ों की तादाद में लोग असमिया संगीत जगत के दिग्गज जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनके निधन को पूरा एक साल बीत चुका है। जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ था, वहीं बने एक अस्थायी स्मारक पर उनके प्रशंसक, परिवार के सदस्य और साथी कलाकार एकत्र हुए और उनके गाए गीतों को गुनगुनाकर उन्हें याद किया। तीन दिनों का स्मरणोत्सव और गायकों का जमावड़ा असम सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने जुबीन गर्ग के सम्मान में तीन दिवसीय स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया था। यह आयोजन गुरुवार से शुरू होकर शनिवार को उनकी पहली पुण्यतिथि पर संपन्न हुआ। पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में सैर के दौरान उनका निधन हो गया था। यह हादसा नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में उनकी निर्धारित प्रस्तुति से ठीक एक दिन पहले पेश आया था। उनके अचानक चले जाने से पूरे असम में गहरा शोक फैल गया था और लोगों ने लगातार उनकी मौत के कारणों की विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई थी। इस स्मरणोत्सव के एक दिन पहले मशहूर गायक अंगराग पाबोन महंता भी स्मारक स्थल पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग से मुलाकात की। स्मारक पर नए और युवा गायकों को जुबीन के गीत गाते देखकर पाबोन ने इसे एक बेहद खूबसूरत दृश्य बताया। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे इन नौजवान गायकों का हौसला बढ़ाएं और उनकी छोटी-मोटी गलतियों पर ज्यादा ध्यान न दें, क्योंकि कमियों को समय के साथ सुधारा जा सकता है। न्याय की मांग और आखिरी फिल्म की वापसी वरिष्ठ अभिनेता अरुण हजारिका भी जुबीन क्षेत्र में उपस्थित रहे। उन्होंने जुबीन गर्ग को अपने एक पड़ोसी के रूप में याद किया और बताया कि जब भी दोनों की मुलाकात होती थी, वे आपस में बातचीत किया करते थे। हजारिका ने जुबीन की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को फिर दोहराया, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंसाफ की इस प्रक्रिया में किसी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने असम के विभिन्न सिनेमाघरों में जुबीन गर्ग की अंतिम फिल्म रोई रोई बिनाले के दोबारा रिलीज किए जाने का स्वागत किया। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने X पर लिखा कि जुबीन हमेशा जनता के व्यक्ति और चहेते रॉकस्टार रहे हैं, जिन्होंने कठिन समय में लोगों की मदद की और अपनी उपस्थिति से खुशियां बिखेरीं। अधूरे स्मारक और अवकाश की मांग पर सवाल शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने इस अवसर पर राज्य सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं। उन्होंने मांग की कि 19 सितंबर को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए और इसे जुबीन दिवस के नाम से जाना जाए। इसके अलावा, गोगोई ने जुबीन गर्ग की मौत की जांच की रफ्तार पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इतने समय बाद भी जुबीन क्षेत्र का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और वहां अब तक चारदीवारी भी नहीं बन सकी है। इन सभी प्रशासनिक सवालों के बीच, पूरे असम से आए लोगों ने अपने प्रिय कलाकार के संगीत को जीवित रखने और सच सामने लाने का संकल्प दोहराया। इसका आप पर असर जुबीन गर्ग की पहली पुण्यतिथि ने असम में उनके सांस्कृतिक प्रभाव और उनकी मौत से जुड़े अनसुलझे सवालों को दोबारा चर्चा के केंद्र में ला दिया है। • असम में: सांस्कृतिक और सिनेमा प्रेमियों के लिए जुबीन गर्ग की अंतिम फिल्म रोई रोई बिनाले को राज्यभर के सिनेमाघरों में फिर से दिखाया जा रहा है। प्रशंसक बड़े पर्दे पर अपने पसंदीदा कलाकार की आखिरी प्रस्तुति देख सकते हैं। • जांच और जवाबदेही पर: स्थानीय जन प्रतिनिधियों और कलाकारों ने मौत की जांच में तेजी लाने और स्मारक स्थल के निर्माण को पूरा करने की मांग उठाई है। प्रशासन पर अब जुबीन क्षेत्र की चारदीवारी और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित करने का दबाव बढ़ेगा। • सार्वजनिक नीतियों पर: 19 सितंबर को जुबीन दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार के समक्ष रखा गया है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो भविष्य में असम में इस दिन सरकारी अवकाश देखने को मिल सकता है। • संगीत जगत पर: स्थापित कलाकारों ने नवोदित गायकों को मंच देने और उनकी गलतियों को नजरअंदाज कर उनका समर्थन करने का आह्वान किया है। इससे क्षेत्रीय सांस्कृतिक मंचों पर नए कलाकारों को अधिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम जुबीन गर्ग के आकस्मिक निधन की पहली बरसी और उसके बाद से अब तक उनकी मौत की जांच में स्पष्ट निष्कर्ष न मिलने की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। • सिंगापुर में आकस्मिक निधन: पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल से ठीक एक दिन पहले समुद्र में सैर के दौरान जुबीन गर्ग की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस आकस्मिक घटना से पूरे असम में गहरा सदमा पहुंचा था और प्रशंसकों के मन में कई अनुत्तरित सवाल खड़े हो गए थे। • जांच में देरी पर जनता का असंतोष: घटना के एक साल बीत जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया के ठोस नतीजे सार्वजनिक नहीं हो पाए हैं। यही वजह है कि स्मारक स्थल पर जुटी भीड़ और राजनीतिक नेताओं ने जांच की गति पर खुलकर सवाल उठाए। • अधूरा स्मारक स्थल: सोनापुर में जिस स्थान पर उनका अंतिम संस्कार हुआ था, वहां स्थायी और सुरक्षित स्मारक बनाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, एक साल बाद भी चारदीवारी न बनने के कारण प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। सवाल-जवाब 1. जुबीन गर्ग की पहली बरसी पर कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था? यह कार्यक्रम गुवाहाटी के बाहरी इलाके सोनापुर स्थित जुबीन क्षेत्र में आयोजित किया गया था, जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था। 2. जुबीन गर्ग का निधन कब और कहां हुआ था? उनका निधन 19 सितंबर को पिछले साल सिंगापुर में समुद्र की सैर के दौरान हुआ था। 3. इस स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किसने किया था? असम सरकार के सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने गुरुवार से शनिवार तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया था। 4. विधायक अखिल गोगोई ने सरकार के सामने क्या मांगें रखी हैं? उन्होंने 19 सितंबर को जुबीन दिवस के रूप में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने, मौत की जांच तेज करने और जुबीन क्षेत्र का निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की। 5. जुबीन गर्ग की कौन सी अंतिम फिल्म असम के सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज की गई है? उनकी आखिरी फिल्म रोई रोई बिनाले को असम के विभिन्न सिनेमाघरों में फिर से रिलीज किया गया है। https://trendkia.com/assam/zubeen-garg-ki-pahali-barasi-para-assam-men-umare-prashnsaka-mauta-ki-jancha-aura-nyaya-ki-manga-teja-34050 TrendKia — Har trend, sabse pehle.