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  "title": "15 अगस्त 2026 का पंचांग: हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस पर जानें शुभ योग, पूजा विधि और राहुकाल",
  "summary": "15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हरियाली तीज और शनिवार व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शिव योग का प्रभाव रहेगा।",
  "content": "15 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक और राष्ट्रीय दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जा रहा है। इस दिन देश भर में 80वां स्वतंत्रता दिवस उल्लासपूर्वक मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर सनातन परंपरा में आस्था का प्रतीक माना जाने वाला हरियाली तीज का व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। पंचांगीय गणना के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शाम 05:28 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। इस पूरे दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और तैतिल करण का संयोग बना रहेगा। इसके साथ ही सूर्योदय के समय शिव योग विद्यमान रहेगा, जो प्रातः 07:09 बजे समाप्त होकर सिद्ध योग में परिवर्तित हो जाएगा। शनिवार का दिन होने के कारण इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के साथ-साथ शनिदेव महाराज के पूजन एवं व्रत का भी विशेष फल प्राप्त होगा।\n\nहरियाली तीज का धार्मिक महत्व और पूजन विधि\nहरियाली तीज का पावन पर्व मुख्य रूप से दांपत्य जीवन में प्रेम, सुहाग और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक अत्यंत कठोर एवं निश्छल तपस्या की थी। उनकी इस अगाध भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सावन शुक्ल तृतीया के दिन ही उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। इसके अतिरिक्त शनिवार का दिन होने के कारण शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का भी उत्तम अवसर है। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं। शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करके शनिदेव का ध्यान करना चाहिए। पूजा के समय शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल, काला वस्त्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद शनि मंत्रों का जाप और आरती की जाती है। मंदिर जाकर सरसों का तेल चढ़ाना तथा निर्धन एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, वस्त्र और तिल का दान करना जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाता है।\n\n15 अगस्त 2026 की पंचांगीय तिथियां और नक्षत्र\nपंचांग के प्रमुख अंगों की बात करें तो 15 अगस्त 2026 को तृतीया तिथि शाम 05:28 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि लागू होगी। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र 16 अगस्त की भोर में 03:25 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात हस्त नक्षत्र का प्रवेश होगा। करण में तैतिल करण प्रातः 06:02 बजे तक रहेगा, जिसके बाद गर करण शाम 05:28 बजे तक बना रहेगा। योग की दृष्टि से प्रातः 07:09 बजे तक शिव योग रहेगा और उसके बाद सिद्ध योग का सुंदर संयोग निर्मित होगा। चंद्र राशि परिवर्तन की बात करें तो चंद्रमा आरंभ में सिंह राशि में विराजमान रहेंगे और उसके बाद कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं भगवान शिव का वास शाम 05:28 बजे तक सभा में रहेगा, जिसके बाद उनका वास क्रीड़ा में होगा।\n\nसूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ मुहूर्त की समय सारणी\n15 अगस्त को प्रातः 06:07 बजे सूर्योदय होगा और सायंकाल 06:55 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं चंद्रोदय का समय प्रातः 08:25 बजे रहेगा और चंद्रास्त रात 08:43 बजे होगा। किसी भी शुभ अथवा मांगलिक कार्य के संपादन के लिए पंचांग के शुभ मुहूर्त अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 04:25 बजे से 05:08 बजे तक रहेगा। सर्वकार्य सिद्धि प्रदान करने वाला अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक उपलब्ध रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02:38 बजे से 03:31 बजे तक रहेगा। सायंकालीन गोधूलि मुहूर्त शाम 07:01 बजे से 07:23 बजे तक रहेगा। अमृत काल का उत्तम समय रात 08:18 बजे से 09:53 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि की पूजा के लिए निशिता मुहूर्त रात 12:05 बजे से 12:48 बजे (16 अगस्त) तक रहेगा। इसके अतिरिक्त प्रातः 05:51 बजे से अगले दिन 16 अगस्त की भोर में 03:25 बजे तक रवि योग का शुभ प्रभाव भी बना रहेगा।\n\nअशुभ मुहूर्त और दिशाशूल का विवरण\nशास्त्रों के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत में अशुभ समय का त्याग करना श्रेयस्कर होता है। 15 अगस्त को राहुकाल प्रातः 09:09 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा, जिस दौरान कोई भी नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगण्ड काल दोपहर 02:05 बजे से 03:44 बजे तक रहेगा। गुलिक काल प्रातः 05:51 बजे से 07:30 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त का समय प्रातः 05:51 बजे से 06:44 बजे तक रहेगा। वर्ज्य काल प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। वहीं भद्रा काल प्रातः 05:05 बजे से 16 अगस्त की शाम 05:52 बजे तक बना रहेगा। यात्रा की दृष्टि से इस दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए पूर्व दिशा की ओर अनावश्यक यात्रा करने से बचना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: 15 अगस्त 2026 को देश के स्वतंत्रता दिवस के साथ हरियाली तीज और शनिवार व्रत का विशेष संगम हो रहा है, जिससे यह दिन आध्यात्मिक पूजा-पाठ के लिए विशेष फलदायी रहेगा।\n\nव्रत और पूजा के लिए: पूजा या नया कार्य शुरू करने से पूर्व राहुकाल (सुबह 09:09 से 10:47 बजे) का विशेष ध्यान रखें और अभिजीत या विजय मुहूर्त का ही उपयोग करें।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. 15 अगस्त 2026 को कौन-कौन से मुख्य पर्व और व्रत हैं?\n15 अगस्त 2026 को देश का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। इसके साथ ही हरियाली तीज और शनिवार व्रत का पावन संयोग भी रहेगा।\n\n2. 15 अगस्त 2026 को राहुकाल का समय क्या रहेगा?\nइस दिन राहुकाल प्रातः 09:09 बजे से सुबह 10:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।\n\n3. हरियाली तीज की तृतीया तिथि कब तक समाप्त होगी?\nपंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 15 अगस्त को शाम 05:28 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी।\n\n4. 15 अगस्त 2026 को अभिजीत मुहूर्त का समय क्या है?\nसर्वकार्य सिद्धि के लिए उपयुक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।\n\n5. 15 अगस्त 2026 को किस दिशा में दिशाशूल रहेगा?\nपंचांग के अनुसार 15 अगस्त 2026 को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए।",
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  "category": "राशिफल",
  "publishedAt": "2026-08-14",
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    "हरियाली तीज 2026",
    "15 अगस्त 2026 पंचांग",
    "राहुकाल समय",
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