गुरु का सिंह राशि में गोचर: 87 दिनों तक मेष, सिंह, धनु और कुंभ राशि के लिए करियर व धन के योग 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 के बीच गुरु सिंह राशि में संचरण और वक्री चाल चलेंगे, जिससे मेष, सिंह, धनु और कुंभ राशि के जातकों को प्रगति व आर्थिक लाभ के अवसर मिल सकते हैं। वैदिक ज्योतिष परंपरा में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, समृद्धि, उच्च विद्या और सौभाग्य का अधिष्ठाता ग्रह स्वीकार किया गया है। जब भी गुरु अपनी गति अथवा राशि बदलते हैं, तो उसका प्रभाव संपूर्ण मानव जीवन और सभी बारह राशियों पर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से पड़ता है। आगामी 31 अक्टूबर 2026 को गुरु ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस राशि परिवर्तन के बाद 13 दिसंबर 2026 को देवगुरु वक्री गति धारण करेंगे और फिर वक्री अवस्था में चलते हुए 25 जनवरी 2027 को पुनः कर्क राशि में लौट आएंगे। गणना के अनुसार दोनों तिथियों को मिलाकर यह पूरी समयावधि 87 दिन की बनती है। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर इस 87 दिवसीय अवधि के दौरान कुछ विशेष राशियों के जातकों को करियर, आजीविका और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। गुरु के राशि परिवर्तन और वक्री चाल का कालक्रम ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 को देवगुरु सिंह राशि में अपना संचरण आरंभ करेंगे। इसके बाद लगभग डेढ़ महीने तक मार्गी रहने के पश्चात 13 दिसंबर 2026 को गुरु वक्री होंगे। वक्री चाल का अर्थ ग्रह का पीछे की ओर गतिशील प्रतीत होना होता है। वक्री अवस्था में भ्रमण करते हुए 25 जनवरी 2027 को गुरु पुनः कर्क राशि की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे। इसके उपरांत गुरु की गति और स्थिति में आगे चलकर फिर परिवर्तन देखने को मिलेगा। 31 अक्टूबर 2026 से लेकर 25 जनवरी 2027 तक की कुल अवधि 87 दिनों की बैठती है। चूंकि देवगुरु इस पूरी समय सीमा में एक समान स्थिति अथवा एक ही राशि में स्थिर नहीं रहेंगे, इसलिए इन 87 दिनों का फलादेश सभी समय खंडों में एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि मार्गी और वक्री चरणों के अनुसार इसमें भिन्नता रहेगी। मेष राशि: रचनात्मकता और शिक्षा में प्रगति मेष राशि के जातकों के संदर्भ में गुरु का सिंह राशि में प्रवेश विद्या, प्रेम संबंध और कलात्मक कार्यों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जो जातक नौकरीपेशा हैं, उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में अपनी आंतरिक क्षमता और हुनर प्रदर्शित करने के बेहतरीन अवसर हाथ लग सकते हैं। उच्च अधिकारियों के बीच आपकी कार्यकुशलता की सराहना हो सकती है। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं अथवा सामान्य अध्ययन में लगे हैं, उनका मन एकाग्रचित्त होकर पठन-पाठन में लगेगा। वहीं व्यापार और स्वतंत्र व्यवसाय से जुड़े लोग अपने प्रतिष्ठान के लिए नई कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि धन और पूंजी निवेश के मामलों में किसी भी प्रकार की उतावली अथवा जल्दबाजी से बचना हितकर रहेगा। सिंह राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि और नए दायित्व गुरु का स्वयं सिंह राशि में ही गोचर होना इस राशि के मूल निवासियों के लिए विशेष ज्योतिषीय महत्व रखता है। इस गोचर काल में सिंह राशि के लोगों के आत्मविश्वास और आत्मबल में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। आजीविका के क्षेत्र में कार्यरत लोगों को अपने संस्थान में नए पद अथवा अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। यदि आप व्यापार करते हैं, तो अपने काम के विस्तार और नए बाजार तलाशने के अनुकूल संयोग निर्मित होंगे। इस दौरान अपने दैनिक कार्यों को अधिक योजनाबद्ध और अनुशासित तरीके से पूरा करने पर विशेष ध्यान देना श्रेयस्कर रहेगा। इसके साथ ही जीवन अथवा कारोबार से जुड़े बड़े निर्णयों में बिना सोचे-समझे कदम बढ़ाने के बजाय भलीभांति विचार-विमर्श करके आगे बढ़ना आवश्यक होगा। धनु राशि: उच्च शिक्षा और करियर में उन्नति के मार्ग धनु राशि के अधिपति स्वयं देवगुरु बृहस्पति ही हैं, इसलिए जब उनका गोचर मित्र राशि सिंह में होता है, तो धनु राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इस अवधि में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत छात्रों, लंबी यात्राओं की योजना बना रहे लोगों और अपने करियर को नई दिशा देने के इच्छुक जातकों को उत्साहजनक अवसर मिल सकते हैं। जो लोग काफी समय से नई नौकरी की तलाश में जुटे हैं, उन्हें उपयुक्त रोजगार के प्रस्ताव मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। व्यापारिक वर्ग के लोगों के लिए इस कालखंड में बने नए संपर्क और व्यावसायिक रिश्ते भविष्य में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। यद्यपि इन सभी सकारात्मक संभावनाओं को वास्तविक सफलता में बदलने के लिए निरंतर कठोर परिश्रम और लगन की दरकार रहेगी। कुंभ राशि: व्यावसायिक साझेदारी और टीमवर्क का लाभ कुंभ राशि के जातकों की कुंडली के अनुसार गुरु का यह गोचर मुख्य रूप से कार्यक्षेत्र और साझेदारी से संबंधित मामलों को प्रभावित करेगा। जो लोग पार्टनरशिप या साझेदारी में व्यापार संचालित कर रहे हैं, उन्हें नए व्यापारिक साझेदारों के साथ मिलकर काम करने के अनुकूल मौके मिल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों के लिए अपने सहकर्मियों और टीम के सदस्यों के साथ सामंजस्य बनाकर कार्य करना आर्थिक और पदोन्नति के नजरिए से बेहद लाभप्रद रहेगा। हालांकि किसी भी नई व्यावसायिक संधि, अनुबंध या साझेदारी में शामिल होने से पूर्व उसके समस्त नियमों, शर्तों और दस्तावेजों को बारीकी से समझ लेना अनिवार्य होगा, ताकि आगे चलकर किसी असमंजस का सामना न करना पड़े। 13 दिसंबर को वक्री चाल का प्रभाव 13 दिसंबर 2026 की तिथि इस गोचर चक्र का एक प्रमुख मोड़ साबित होगी, क्योंकि इसी दिन देवगुरु बृहस्पति वक्री गति में आ जाएंगे। वैदिक ज्योतिष में वक्री ग्रह की स्थिति को पूर्व में किए गए कार्यों की समीक्षा, आत्ममंथन और पुराने निर्णयों पर दोबारा विचार करने का समय माना गया है। इस कालखंड के दौरान पहले से निर्धारित कुछ योजनाओं और रणनीतियों में फेरबदल या संशोधन करना पड़ सकता है। इसके बाद 25 जनवरी 2027 को जब गुरु पुनः कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, तब ग्रहों के समीकरण एक बार फिर बदलेंगे। इस प्रकार 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 के 87 दिनों का यह चरण आत्मसंयम, समीक्षा और सुनियोजित कर्म के समन्वय से विशेष फलदायक सिद्ध हो सकता है। इसका आप पर असर गुरु ग्रह के इस गोचर और वक्री चक्र से चार राशियों के जातकों को अपने करियर, शिक्षा और कार्यक्षेत्र में नई दिशा और लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। • मेष राशि के लिए: उच्च अध्ययन और रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। किसी भी नए वित्तीय निवेश में जल्दबाजी दिखाने से बचें। • सिंह राशि के लिए: कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां और पद मिलने के योग बनेंगे। बड़े निर्णयों को जल्दबाजी के बजाय सोच-विचार कर आगे बढ़ाएं। • धनु राशि के लिए: नौकरी तलाश रहे लोगों को नए और बेहतर अवसर मिल सकते हैं। सफलता को स्थायी बनाने के लिए लगातार मेहनत जरूरी रहेगी। • कुंभ राशि के लिए: नई साझेदारी और टीमवर्क से काम में स्पष्ट लाभ दिखाई देगा। किसी भी साझेदारी समझौते के नियम-शर्तों को पहले ही अच्छी तरह जांच लें। सवाल-जवाब 1. गुरु ग्रह का सिंह राशि में गोचर कब होगा? गुरु ग्रह 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। 2. गुरु ग्रह किस तारीख को वक्री होंगे? गुरु ग्रह 13 दिसंबर 2026 को वक्री चाल शुरू करेंगे। 3. गुरु वक्री अवस्था में कर्क राशि में कब लौटेंगे? गुरु वक्री गति में चलते हुए 25 जनवरी 2027 को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। 4. 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक कुल कितने दिन की अवधि बनती है? दोनों तिथियों को मिलाकर यह कुल 87 दिन की समयावधि बनती है। 5. इस गोचर से किन प्रमुख राशियों को लाभ मिलने की उम्मीद है? मेष, सिंह, धनु और कुंभ राशि के जातकों को करियर व आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर मिलने की संभावना है। 6. ज्योतिष में गुरु के वक्री होने का क्या अर्थ माना जाता है? वक्री गति को पूर्व कार्यों की समीक्षा, पुराने निर्णयों के पुनर्मूल्यांकन और रणनीतियों में सुधार के समय के रूप में देखा जाता है। https://trendkia.com/astrology/guru-ka-leo-men-gochara-87-dinon-taka-aries-leo-sagittarius-aura-aquarius-rashi-ke-lie-kariyara-va-dhana-ke-yoga-35268 TrendKia — Har trend, sabse pehle.