# मंगल 24 सितंबर से पुष्य नक्षत्र में करेंगे प्रवेश, 17 अक्टूबर तक 4 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

> ग्रहों के सेनापति मंगल 24 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र में रहेंगे, जिससे चार राशियों के जातकों को करियर, धन और पारिवारिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतनी होगी।

**Type:** article · **Category:** राशिफल · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/astrology/mars-24-september-se-pushya-nakshatra-men-karenge-pravesha-17-october-taka-4-rashiyon-ki-barha-sakati-hain-mushkilen-36270 · **Language:** Hindi
**Tags:** मंगल गोचर, पुष्य नक्षत्र, शनि, मिथुन राशिफल, कर्क राशिफल, तुला राशिफल, मकर राशिफल, ज्योतिषीय उपाय

वैदिक ज्योतिष में सेनापति का दर्जा प्राप्त मंगल देव 24 सितंबर 2026 को पुष्य नक्षत्र में अपना गोचर आरंभ करने जा रहे हैं। इस नक्षत्र में मंगल की उपस्थिति 17 अक्टूबर तक बनी रहेगी। पुष्य नक्षत्र के स्वामी ग्रह शनि देव हैं, जिन्हें न्याय, कर्म और सख्त अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। वहीं दूसरी ओर मंगल साहस, पराक्रम, शारीरिक ऊर्जा, रक्त और भूमि से जुड़े मामलों के प्रतिनिधि ग्रह हैं। जब अग्नि तत्व के स्वामी मंगल का प्रवेश शनि के नक्षत्र में होता है, तो मंगल की तीव्र और उग्र ऊर्जा पर शनि का अनुशासनात्मक प्रभाव पड़ता है। इस मेल से जातक की आक्रामकता संतुलित होती है और वह अपने लक्ष्यों की ओर व्यवस्थित ढंग से कदम बढ़ाता है। यह नक्षत्र परिवर्तन सभी राशियों को अलग-अलग रूप में प्रभावित करेगा, जहां कुछ के लिए यह समय अनुकूल रहेगा, वहीं चार विशेष राशियों के जातकों के लिए यह दौर मानसिक तनाव और व्यावहारिक अड़चनों से भरा साबित हो सकता है।

## मिथुन राशि: आत्मविश्वास में गिरावट और पारिवारिक तनाव की चुनौती
मिथुन राशि के जातकों के लिए 24 सितंबर से 17 अक्टूबर तक की अवधि आंतरिक ऊर्जा और मनोबल के लिहाज से परीक्षा लेने वाली साबित हो सकती है। इस नक्षत्र गोचर के दौरान जातकों को अपने भीतर आत्मविश्वास और सक्रियता की भारी कमी महसूस हो सकती है। जो भी कार्य आप हाथ में लेंगे, उसमें मनचाही सफलता पाने के लिए सामान्य से अधिक संघर्ष और प्रयास करने की आवश्यकता पड़ेगी।

कार्यक्षेत्र में नौकरीपेशा लोगों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों या बॉस के साथ किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, बहस अथवा तकरार में पड़ने से पूरी तरह बचना चाहिए। कार्यस्थल पर जरा सी भी असहमति आपकी पेशेवर छवि पर नकारात्मक असर डाल सकती है और भविष्य के अवसरों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा जो लोग लंबे समय से नई नौकरी की तलाश में जुटे हुए हैं, उनका इंतजार अभी कुछ और समय के लिए लंबा खिंच सकता है। आर्थिक मोर्चे पर भी अनावश्यक और आकस्मिक खर्चों की बढ़ोतरी मानसिक चिंता और बेचैनी पैदा कर सकती है। घरेलू जीवन में वाणी और संवाद पर संयम रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कटु शब्दों के कारण परिवार में कलह और विवाद की परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

## कर्क राशि: आर्थिक दबाव, कर्ज का जोखिम और योजनाओं में रुकावट
कर्क राशि के जातकों को इस गोचर अवधि के दौरान अपने निर्धारित लक्ष्यों और परियोजनाओं को पूरा करने में अप्रत्याशित बाधाओं व अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। वित्तीय दृष्टिकोण से यह समय काफी जटिल और सतर्कता भरा रहने वाला है। इस समय अंतराल में आपकी नियमित आय की तुलना में व्यय का अनुपात कहीं अधिक बढ़ सकता है। यदि खर्चों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो धन की तंगी के चलते कर्ज या उधारी लेने तक की नौबत आ सकती है।

किसी भी नए व्यवसाय, व्यापारिक सौदे, निवेश अथवा नई परियोजना की शुरुआत के लिए यह समय बिल्कुल भी अनुकूल नहीं माना गया है। इसलिए सभी महत्वपूर्ण योजनाओं और नए आरंभों को फिलहाल कुछ समय के लिए स्थगित कर देना ही बुद्धिमानी होगी। वहीं विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अपनी पढ़ाई में सफलता अर्जित करने और इच्छित परिणाम पाने के लिए अत्यधिक कठिन परिश्रम व एकाग्रता दिखानी होगी, क्योंकि ध्यान भटकने की आशंका बनी रहेगी।

## तुला राशि: करियर में छूटे अवसर और दांपत्य जीवन में गलतफहमियां
तुला राशि के जातकों के सामने इस दौरान आजीविका और करियर में आगे बढ़ने के कई मौके तो उपस्थित होंगे, लेकिन परिस्थितियों या निर्णय की कमी के कारण आप उन अवसरों का सही समय पर पूर्ण लाभ उठाने से चूक सकते हैं। यदि आप वर्तमान नौकरी को बदलने या नए क्षेत्र में कदम रखने का विचार कर रहे हैं, तो यह समय बदलाव के लिए अनुकूल नहीं है, इसलिए वर्तमान स्थिति में ही बने रहना बेहतर रहेगा।

व्यापार से जुड़े जातकों के लिए कारोबारी परिस्थितियां कुछ कमजोर रह सकती हैं और बाजार में लेन-देन धीमा पड़ सकता है। अपनी मेहनत के अनुसार अपेक्षित परिणाम न मिलने से मन में निरंतर असंतोष और निराशा का भाव बना रह सकता है। अचानक सामने आने वाले अप्रत्याशित खर्च आपकी पूरी वित्तीय योजना और घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। निजी जीवन के मोर्चे पर वैवाहिक संबंधों में गलतफहमी, विचारों का टकराव या आपसी अनबन बढ़ने की प्रबल आशंका है, इसलिए जीवनसाथी के साथ संवाद में धैर्य और समझदारी का परिचय दें।

## मकर राशि: कानूनी विवाद, आर्थिक खींचतान और क्रोध पर नियंत्रण की जरूरत
मकर राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में संचरण धन कमाने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के संदर्भ में काफी संघर्षपूर्ण रह सकता है। इस पूरी समयावधि में आपके नियमित कार्यों और योजनाओं में एक के बाद एक विघ्न व रुकावटें आ सकती हैं। कोई भी काम सुगमता से संपन्न नहीं होगा, बल्कि काफी मशक्कत, रुकावटों और दौड़-धूप के बाद ही पूरा हो सकेगा।

इस दौर में कोर्ट-कचहरी, मुकदमेबाजी या कानूनी उलझनों के चक्कर काटने की स्थिति बन सकती है। इसलिए कानूनी मामलों या किसी भी सामाजिक व व्यक्तिगत विवाद से अपने आप को पूरी तरह दूर रखें। अपने क्रोध, चिड़चिड़ेपन और उत्तेजना पर सख्त नियंत्रण बनाए रखें, क्योंकि ग्रह परिस्थितियां प्रतिकूल बनी हुई हैं और जरा सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। अनाप-शनाप, बेहिसाब और व्यर्थ के खर्चों की भरमार रहने वाली है, जिससे जातक मानसिक रूप से काफी असहज और तनावग्रस्त महसूस कर सकते हैं।

## मंगल के नकारात्मक प्रभाव कम करने के लिए प्रमुख उपाय
मंगल के शनि के नक्षत्र में संचरण के दौरान यदि किसी जातक को अत्यधिक प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है, तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुछ सरल और प्रभावी उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है

- मंगलवार के दिन पूरे विधि-विधान से व्रत का पालन करना मंगल ग्रह की शांति और शुभता के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है।
- प्रत्येक मंगलवार को पवनपुत्र हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना करें और श्रद्धापूर्वक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें, जिससे साहस और मानसिक संतुलन बना रहता है।
- जरूरतमंद लोगों को लाल मसूर की दाल अथवा अन्य लाल रंग की वस्तुओं जैसे लाल वस्त्र आदि का दान करना मंगल के अशुभ प्रभावों को दूर करने में अत्यंत फलदायी माना गया है।

## इसका आप पर असर
मंगल के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश से मिथुन, कर्क, तुला और मकर राशि के लोगों के बजट, कार्यस्थल के माहौल और व्यक्तिगत रिश्तों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

- **करियर और नौकरी:** कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से टकराव टालें और नई नौकरी में बदलाव को फिलहाल टाल दें। धैर्य रखने से आपकी पद प्रतिष्ठा सुरक्षित रहेगी।
- **आर्थिक प्रबंधन:** 24 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच अनावश्यक और आकस्मिक खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखें। बजट का पालन करने से आपको कर्ज लेने की स्थिति से बचाव मिलेगा।
- **नया व्यवसाय या निवेश:** कर्क और तुला राशि के लोग किसी नए प्रोजेक्ट या बड़े वित्तीय निवेश की शुरुआत अभी न करें। योजनाओं को कुछ हफ्तों के लिए टालना आर्थिक नुकसान से बचाएगा।
- **पारिवारिक और वैवाहिक संबंध:** बातचीत के दौरान अपनी वाणी और गुस्से पर पूरी तरह संयम बरतें। शांत रहकर संवाद करने से गलतफहमियां और रिश्ते में कलह दूर रहेगी।
- **कानूनी और अदालती मामले:** मकर राशि के लोग किसी भी तरह के झगड़े या विवाद से दूरी बनाकर रखें। अदालती उलझनों से बचने के लिए कागजी और व्यावहारिक मामलों में सतर्क रहें।

## ऐसा क्यों हुआ
वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार जब उग्र स्वभाव वाले मंगल का प्रवेश न्याय और अनुशासन के स्वामी शनि के नक्षत्र पुष्य में होता है, तो ऊर्जा और कर्म के मध्य खींचतान उत्पन्न होती है।

- **नक्षत्र और ग्रह का स्वभाव:** मंगल अग्नि तत्व, गति और आक्रामकता का प्रतीक हैं जबकि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि स्थिरता और अनुशासन के कारक हैं। इस भिन्नता के कारण जातक की स्वाभाविक कार्यशैली में बाधाएं और विलंब देखने को मिलते हैं।
- **ऊर्जा का संतुलन:** शनि के नक्षत्र में आने से मंगल की प्रचंड ऊर्जा नियंत्रित होती है, जिससे कुछ जातकों में आलस्य या आत्मविश्वास की कमी महसूस हो सकती है। यह स्थिति कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से मतभेद और संघर्ष को जन्म देती है।
- **व्यय और प्रतिकूल योग:** जिन राशियों के भावों से यह नक्षत्र प्रतिकूल संबंध बनाता है, वहां आकस्मिक खर्च और योजनाओं में देरी होती है। उचित तालमेल न बैठने से आर्थिक तनाव और पारिवारिक असहमति की नौबत आती है।

## सवाल-जवाब

### 1. मंगल पुष्य नक्षत्र में कब प्रवेश कर रहे हैं?
मंगल 24 सितंबर 2026 को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 17 अक्टूबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे।

### 2. पुष्य नक्षत्र के स्वामी ग्रह कौन हैं?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र के स्वामी ग्रह शनि देव हैं।

### 3. इस नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों को सतर्क रहना चाहिए?
मिथुन, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

### 4. मंगल के अशुभ प्रभाव को शांत करने के मुख्य उपाय क्या हैं?
मंगलवार का व्रत रखना, हनुमान चालीसा का पाठ करना और लाल मसूर की दाल का दान करना लाभकारी उपाय हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._