# सावन तृतीया पर अखंड सौभाग्य का पर्व: 15 अगस्त को हरियाली तीज का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी सावधानियां

> सावन शुक्ल तृतीया तिथि पर 15 अगस्त को हरियाली तीज मनाई जाएगी। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा, विशेष मुहूर्त और व्रत के नियमों की संपूर्ण जानकारी यहां पढ़ें।

**Type:** article · **Category:** राशिफल · **Published:** 2026-08-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/astrology/savana-tritiya-para-akhnda-saubhagya-ka-parva-15-agasta-ko-hariyali-teej-ka-vrata-janen-shubha-muhurta-puja-vidhi-aura-jaruri-sava-16391 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाली तीज 2026, हरियाली तीज व्रत विधि, सावन तृतीया शुभ मुहूर्त, शिव पार्वती पूजा, सोलह श्रृंगार

सावन महीने का सबसे पवित्र और उमंग से भरा त्योहार हरियाली तीज इस वर्ष 15 अगस्त, शनिवार को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। इस बार तृतीया तिथि की शुरुआत और उदया तिथि के आधार पर व्रत की तारीख तय की गई है, जिससे पूजा-अर्चना का विशेष फल प्राप्त होगा।

## हरियाली तीज 2026 की तिथि और उदया तिथि की गणना
पंचांग गणना के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट तक प्रभावी रहेगी। शास्त्रों में सूर्योदय के समय व्याप्त रहने वाली तिथि यानी उदया तिथि को व्रत-त्योहार के लिए सर्वोपरि माना जाता है। 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मौजूद रहने के कारण हरियाली तीज का व्रत और पूजन शनिवार, 15 अगस्त को ही रखा जाएगा। पूरे दिन भक्तिमय वातावरण में शिव-पार्वती की विशेष आराधना की जाएगी।

## हरियाली तीज का धार्मिक महत्व और सोलह श्रृंगार
हरियाली तीज का पर्व प्राकृतिक सुंदरता, प्रेम और पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं प्रात काल से ही व्रत की तैयारी में जुट जाती हैं। सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में सुंदर मेहंदी रचाती हैं और हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं। हरा रंग सावन की हरियाली और जीवन में खुशहाली का संदेश देता है। अनेक स्थानों पर महिलाएं बगीचों में झूला झूलती हैं और पारंपरिक तीज गीत गाकर अपनी खुशी का इजहार करती हैं। मान्यता है कि इसी तिथि को माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।

## उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुभ मुहूर्त का विशेष संयोग
इस बार हरियाली तीज के अवसर पर कई अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। पंचांग के अनुसार, इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का शुभ प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही शिव योग और सिद्ध योग का अद्भुत संयोग भी निर्मित हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इन योगों में की गई पूजा-अर्चना और मंत्र जाप का कई गुना अधिक फल मिलता है।

पूजा-अर्चना के लिए दिनभर कई विशिष्ट मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जो स्नान और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है। दोपहर में अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 7 बजकर 06 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा, जबकि अमृत काल का समय रात 8 बजकर 18 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इन शुभ समयों में पूजा करना विशेष फलदायी होगा।

## पूजा की संपूर्ण विधि और आवश्यक सामग्री
हरियाली तीज के दिन पूजा की तैयारी पहले से कर लेना अत्यंत लाभकारी रहता है। पूजा सामग्री में बेलपत्र, ताजे फूल, फल, धूप, दीप, अक्षत, रोली और प्रसाद की व्यवस्था अवश्य करें। इसके अतिरिक्त माता पार्वती के लिए श्रृंगार सामग्री जैसे चुनरी, चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी की व्यवस्था की जानी चाहिए।

पूजा के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश का ध्यान करें और उनका पूजन करें। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, चंदन और जल अर्पित करें तथा माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाएं। पूजा के दौरान हरियाली तीज की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या वाचन करें। अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें और परिवार के कल्याण तथा अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।

## व्रत के नियम और ध्यान रखने योग्य बातें
हरियाली तीज का व्रत रखते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना आवश्यक माना जाता है। पूजा के दौरान जल्दबाजी या तनाव से बचें और शांत मन से ईश्वर का ध्यान करें। यह पर्व दांपत्य प्रेम से जुड़ा है, इसलिए इस दिन घर-परिवार में किसी प्रकार के कलह या विवाद से दूर रहें। पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति पूर्ण सम्मान और स्नेह का भाव रखना चाहिए।

इसके साथ ही किसी भी व्यक्ति का अपमान करने या कटु वचन बोलने से बचें। वाणी पर संयम रखें और सकारात्मक सोच बनाए रखें। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर जबरन निर्जला रहने के बजाय सेहत के अनुकूल फलाहारी व्रत भी रखा जा सकता है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार नियम तय करके पूजा पूरी निष्ठा से करनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
**श्रद्धालुओं और व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए प्रभाव:**

- **पूजा और मुहूर्त की योजना:** उदया तिथि और 15 अगस्त के शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर महिलाएं सुबह से ही पूजा सामग्री और व्रत की तैयारी समय पर कर सकती हैं।
- **स्वास्थ्य और व्रत का संतुलन:** निर्जला या फलाहार व्रत का चयन अपनी सेहत के अनुसार करके महिलाएं बिना किसी शारीरिक परेशानी के पूजा पूरी कर सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. हरियाली तीज 2026 का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को उदया तिथि के आधार पर रखा जाएगा।

### 2. सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय क्या है?
तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी।

### 3. हरियाली तीज पर कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?
इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ शिव योग और सिद्ध योग का विशेष संयोग बन रहा है।

### 4. हरियाली तीज पर पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजित मुहूर्त 15 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।

### 5. क्या हरियाली तीज पर केवल निर्जला व्रत रखना ही जरूरी है?
नहीं, निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं है; महिलाएं स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार फलाहार व्रत भी रख सकती हैं।

### 6. हरियाली तीज की पूजा में सर्वप्रथम किसकी आराधना की जाती है?
पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान और पूजन किया जाता है, जिसके बाद शिव-पार्वती की आराधना होती है।

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