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  "title": "चीन में ईवी बाजार ने पकड़ी तेज रफ्तार, भारत के मुकाबले आंकड़े हैं बेहद आगे",
  "summary": "चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री कुल कार बाजार के 65 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जबकि भारत में ईवी की कुल हिस्सेदारी अभी सीमित दायरे में ही है।",
  "content": "चीन में ऑटोमोबाइल बाजार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और वहां बिकने वाली कुल कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में देश के भीतर कुल 1.54 मिलियन कारों की बिक्री दर्ज की गई, जिनमें से 65.2 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक या प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों का था। यह आंकड़ा इससे पिछले महीने के 65.1 प्रतिशत के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है। पारंपरिक ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता तेजी से पेट्रोल और डीजल गाड़ियों से किनारा कर रहे हैं। पेट्रोल इंजन वाली कारों की बिक्री में साल-दर-साल आधार पर 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में यह गिरावट महज 10 प्रतिशत तक सीमित रही है।\n\nवाहन चालकों में बैटरी खत्म होने का डर यानी रेंज एंग्जायटी काफी कम हो चुकी है। इसके अलावा बाजार में सैकड़ों नए विकल्प उपलब्ध हैं और आधुनिक तकनीक ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। इसके विपरीत, भारत के ऑटो बाजार पर नजर डालें तो वहां इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल हिस्सेदारी अभी लगभग 8 से 10 प्रतिशत के बीच ही टिकी हुई है। इस भारतीय आंकड़े में भी दोपहिया और तिपहिया वाहनों का योगदान सबसे ज्यादा है, जबकि पैसेंजर कारों के सेगमेंट में यह हिस्सेदारी और भी कम है। दोनों एशियाई देशों की मौजूदा स्थिति की तुलना करने पर यह स्पष्ट रूप से समझ आता है कि चीन सरकारी नीतियों, बुनियादी ढांचे के विकास और मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर भारत से काफी आगे निकल चुका है।\n\nचीन की पैसेंजर कार एसोसिएशन के आंकड़ों से यह बात सामने आती है कि नए ऊर्जा वाहनों की कुल बाजार हिस्सेदारी लगातार 60 प्रतिशत के ऊपर बनी हुई है। खरीदार अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों से मिलने वाले आर्थिक और व्यावहारिक फायदों को पूरी तरह से अपना चुके हैं। देश भर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बढ़कर करोड़ों की संख्या तक पहुंच गया है। बैटरी निर्माण की लागत में कमी आई है और BYD, Geely तथा Leapmotor जैसी घरेलू कंपनियां बाजार पर पूरी तरह से हावी हैं। ईरान के पास पैदा हुए संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिसने इस बदलाव की रफ्तार को और अधिक तेज कर दिया है। कुल ऑटोमोबाइल बाजार के सुस्त रहने के बावजूद ईवी की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि पेट्रोल गाड़ियां तेजी से चलन से बाहर हो रही हैं।\n\nभारत के मोर्चे पर बात करें तो वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री 2.45 मिलियन यूनिट के आंकड़े को पार कर गई, जिससे कुल ऑटो बिक्री में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8.3 प्रतिशत दर्ज की गई। देश में स्कूटर, बाइक और तिपहिया वाहनों के स्तर पर ईवी की पैठ काफी मजबूत हो चुकी है, लेकिन चार पहिया पैसेंजर कारों के मामले में यह संख्या अभी भी 4 से 8 प्रतिशत के दायरे में सिमटी हुई है। टाटा, महिंद्रा और एमजी जैसी प्रमुख कंपनियां इस दिशा में प्रयास कर रही हैं, लेकिन कुल बिक्री का वॉल्यूम अभी भी काफी छोटा है। हालांकि सरकार की तरफ से पीएलआई योजना और विभिन्न राज्यों के प्रोत्साहन से कुछ मदद जरूर मिली है, फिर भी चार्जिंग का बुनियादी ढांचा सीमित है और शुरुआती खरीद लागत अभी भी उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा बनी हुई है।\n\nचीन ने पिछले कई वर्षों से लगातार मजबूत सब्सिडी, व्यापक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू स्तर पर मजबूत सप्लाई चेन तैयार करके यह मुकाम हासिल किया है, जहां उसकी बाजार हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। इसके मुकाबले भारत अभी अपने शुरुआती दौर से गुजर रहा है। चीन में वाहन चालकों की रेंज एंग्जायटी लगभग समाप्त हो चुकी है, जबकि भारत में यह समस्या आज भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। ईरान जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम चीन को और अधिक आक्रामक तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर प्रेरित कर रहे हैं, जबकि भारत में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर थोड़ा अलग और धीमा रहता है।\n\nयदि भारत सरकार और वाहन निर्माता मिलकर मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने, देश के भीतर ही बैटरी का उत्पादन बढ़ाने और किफायती मॉडल बाजार में उतारने पर अपना ध्यान केंद्रित करें, तो आने वाले कुछ वर्षों में यह देश भी अपनी रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकता है। फिलहाल की स्थिति यह है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा ईवी बाजार बना हुआ है और भारत को इस क्षेत्र में अपनी स्थिति सुधारने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।\n\nइसका आप पर असर\nचीन और भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में चल रहे इस बड़े अंतर का असर नीति निर्माताओं, वाहन निर्माताओं और आम उपभोक्ताओं की खरीद योजनाओं पर सीधा पड़ता है।\n\n• भारत में: खरीदारों के लिए शुरुआती कीमत अधिक होना और सीमित चार्जिंग नेटवर्क अभी भी पेट्रोल-डीजल से ईवी पर स्विच करने में बड़ी बाधा बने हुए हैं। टाटा, महिंद्रा और एमजी जैसी कंपनियों के प्रयासों के बावजूद पैसेंजर कारों में ईवी की पैठ 4 से 8 प्रतिशत के बीच ही सीमित है।\n• चीन में: बाजार का 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ईवी के पास होने से वहां पेट्रोल कारों की बिक्री में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ताओं के लिए चार्जिंग पॉइंट करोड़ों में उपलब्ध हैं और रेंज एंग्जायटी लगभग खत्म हो चुकी है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nचीन में ईवी की बंपर बिक्री और भारत की तुलना में उसकी तेज बढ़त के पीछे कई ठोस नीतियां और बाजार की स्थितियां जिम्मेदार हैं।\n\n• मजबूत सरकारी नीतियां: चीन ने पिछले कई वर्षों से भारी सब्सिडी, सुनियोजित बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और स्थानीय सप्लाई चेन पर काम करके यह मुकाम हासिल किया है।\n• ईंधन की कीमतें और संकट: ईरान जैसे देशों से जुड़े वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और तेल संकट ने पारंपरिक ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं, जिससे लोग तेजी से ईवी अपना रहे हैं।\n• बुनियादी ढांचे का विस्तार: चीन में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क करोड़ों की संख्या तक पहुंच चुका है, जबकि भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी शुरुआती और सीमित अवस्था में है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अगस्त 2026 में चीन में कुल कितनी कारें बिकीं?\nअगस्त 2026 में चीन में कुल 1.54 मिलियन कारों की बिक्री दर्ज की गई।\n\n2. चीन में अगस्त 2026 के दौरान ईवी की हिस्सेदारी कितनी थी?\nचीन में बिकी कुल कारों में से 65.2 प्रतिशत हिस्सा प्योर इलेक्ट्रिक या प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों का था।\n\n3. भारत में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल ईवी बिक्री कितनी रही?\nभारत में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल ईवी बिक्री 2.45 मिलियन यूनिट के पार चली गई।\n\n4. भारत में कुल ऑटो बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी कितनी है?\nभारत में कुल ऑटो बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 8.3 प्रतिशत दर्ज की गई।\n\n5. चीन में पेट्रोल कारों की बिक्री में कितनी गिरावट आई?\nचीन में पेट्रोल कारों की बिक्री साल-दर-साल आधार पर 40 प्रतिशत गिर गई है।\n\n6. भारत में पैसेंजर कार सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी कितनी है?\nभारत में पैसेंजर कारों के भीतर ईवी की पैठ 4 से 8 प्रतिशत के बीच ही है।\n\n7. चीन के बाजार में कौन सी स्थानीय कंपनियां हावी हैं?\nचीन के ऑटो बाजार में BYD, Geely और Leapmotor जैसी घरेलू कंपनियां प्रमुख रूप से हावी हैं।",
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  "category": "ऑटो",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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