# एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार वाहनों को मिल सकती है चालान से राहत, नितिन गडकरी ने अफसरों को दिए निर्देश

> केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार और तय सीमा से 20 प्रतिशत तक ऊपर चलने पर चालान न भेजने का निर्देश दिया है। हालांकि, यह व्यवस्था केवल एक्सप्रेसवे के चालान नियमों को व्यावहारिक बनाने के लिए सुझाई गई है और आधिकारिक गति सीमा नहीं बदली गई है।

**Type:** article · **Category:** ऑटो · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/auto/eksapresave-para-teja-raphtara-vahanon-ko-mila-sakati-hai-chalana-se-rahata-nitin-gadkari-ne-aphasaron-ko-die-nirdesha-53469 · **Language:** Hindi
**Tags:** नितिन गडकरी, एक्सप्रेसवे स्पीड लिमिट, ओवरस्पीडिंग चालान, सड़क परिवहन मंत्रालय, हाईवे सुरक्षा, ट्रैफिक नियम

देश के आधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर सफर करने वाले निजी और व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए राहत भरा प्रशासनिक परामर्श सामने आया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यातायात और राजमार्ग अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चलने वाली गाड़ियों पर ओवरस्पीडिंग का चालान या नोटिस नहीं भेजा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तय गति सीमा से 20 प्रतिशत अधिक रफ्तार पर गाड़ी चलाने वालों को भी दंडात्मक कार्रवाई से छूट देने का सुझाव साझा किया है। हालांकि, इस निर्देश का आशय यह कतई नहीं है कि राष्ट्रीय स्तर पर गति सीमा में कोई औपचारिक वैधानिक बढ़ोतरी कर दी गई है।

## सीआईआई सम्मेलन में भविष्य की सड़कों पर चर्चा
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के एक उद्योग सम्मेलन में देश के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के विकास पर चर्चा करते हुए नितिन गडकरी ने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि तेज रफ्तार के लिए डिजाइन किए गए कॉरिडोर पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति के लिए चालान जारी करने की व्यवस्था उचित नहीं है। मंत्री ने 20 प्रतिशत अतिरिक्त बफर मार्जिन का प्रस्ताव रखा, जिसका व्यावहारिक अर्थ यह निकलता है कि जिन आधुनिक एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा तय है, वहां 144 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पर तुरंत चालान नहीं काटा जाना चाहिए। इस छूट का मुख्य उद्देश्य कैमरों और सेंसरों के मामूली तकनीकी अंतर के कारण ड्राइवरों को होने वाली असुविधा को खत्म करना है।

## राष्ट्रीय स्तर पर गति सीमा में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं
चालकों को यह समझना आवश्यक है कि केंद्रीय मंत्री की यह बात केवल एक्सप्रेसवे पर स्वचालित चालान जारी करने की कार्यप्रणाली को तर्कसंगत बनाने तक सीमित है। इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि सरकार ने वैधानिक गति सीमाओं को संशोधित कर दिया है। यह विशेष राहत देश के सामान्य राष्ट्रीय या राज्यीय राजमार्गों पर प्रभावी नहीं होगी। सामान्य राजमार्गों, बाईपास मार्गों और सिंगल या डबल लेन सड़कों पर वाहन चालकों को वहां के निर्धारित गति संकेतों और स्थानीय यातायात नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।

## शहरी और क्षेत्रीय एक्सप्रेसवे के अपने कड़े नियम
नितिन गडकरी द्वारा सुझाया गया यह फॉर्मूला सभी एक्सप्रेसवे पर आंख मूंदकर लागू नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए, दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेसवे अथवा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे जैसे घने शहरी कॉरिडोर पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे का मानक लागू नहीं होता है। इन मार्गों पर कारों के लिए अधिकतम अनुमेय गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा तय है। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में घने कोहरे और कम दृश्यता के चलते सुरक्षा कारणों से इस सीमा को और घटाकर 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक कर दिया जाता है। इसलिए प्रत्येक मार्ग पर स्थापित डिजिटल गति पट्टिकाओं का ध्यान रखना अनिवार्य रहेगा।

## तकनीकी विसंगतियों को दूर करने के लिए बफर मार्जिन
इस नीतिगत निर्देश की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि एक्सप्रेसवे पर मामूली गति अंतर अथवा स्वचालित स्पीड कैमरों की तकनीकी कमियों के कारण बेकसूर चालकों को भारी जुर्माना भुगतना पड़ रहा था। गाड़ी चलाते समय कुछ सेकंड के लिए गति का थोड़ा बढ़ जाना स्वाभाविक होता है, जिसे देखते हुए व्यवस्था को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाने के लिए यह बफर मार्जिन तय करने की सलाह दी गई है।

## तेज गति के दौरान सड़क सुरक्षा पर विशेष सतर्कता
प्रशासनिक अधिकारियों और परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि चालान में मिलने वाली इस प्रस्तावित छूट को लापरवाही से गाड़ी चलाने का लाइसेंस नहीं माना जा सकता। तेज रफ्तार से सफर तय करने पर किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति में दुर्घटना की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। यात्रियों की जान-माल की रक्षा के लिए लेन अनुशासन का कड़ाई से पालन करना, आगे चल रहे वाहनों से पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखना और सड़क परिस्थितियों के अनुसार संयमित गति में चलना सबसे महत्वपूर्ण है।

## इसका आप पर असर
एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले निजी और व्यावसायिक वाहन चालकों को ऑटोमैटिक कैमरों के गैर-जरूरी चालानों से बड़ी राहत मिलेगी।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटा की गति और 20 प्रतिशत अतिरिक्त बफर मिलने से तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कटने वाले चालानों में कमी आएगी। इससे लंबी दूरी का सफर तय करने वाले चालकों का समय बचेगा और मामूली ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माने का डर खत्म होगा।
- **सामान्य हाईवे पर:** यह छूट केवल आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए सुझाई गई है और आम राष्ट्रीय व राज्यीय हाईवे पर लागू नहीं होगी। सामान्य सड़कों पर गाड़ी चलाने वालों को वहां के पुराने गति संकेतों और स्थानीय सीमाओं के अनुसार ही वाहन चलाना होगा।
- **दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में:** दिल्ली-नोएडा और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को यह 120 का फॉर्मूला नहीं मिलेगा। वहां कारों के लिए 100 किमी प्रति घंटा और सर्दियों में कोहरे के समय 75 किमी प्रति घंटा की सख्त सीमा का पालन जारी रखना होगा।
- **चालक सुरक्षा पर:** चालान न कटने का मतलब अनियंत्रित रफ्तार की खुली छूट नहीं है। 140 किमी प्रति घंटा के आसपास वाहन का नियंत्रण खोने और दुर्घटना का जोखिम काफी बढ़ जाता है, इसलिए सुरक्षित दूरी और सही लेन का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
स्वचालित निगरानी कैमरों द्वारा मामूली गति अंतर पर बेकसूर चालकों को चालान भेजे जाने की शिकायतों के बाद यह प्रशासनिक निर्देश दिया गया है।

- **तकनीकी विसंगतियां और शिकायतें:** एक्सप्रेसवे पर स्थापित ऑटोमैटिक स्पीड कैमरों की कैलिब्रेशन त्रुटियों और कुछ ही सेकंड के मामूली गति अंतर पर चालान कटने की लगातार शिकायतें आ रही थीं। केंद्रीय मंत्री ने इस व्यवस्था को ड्राइवरों के लिए अधिक व्यावहारिक और न्यायसंगत बनाने के लिए बफर मार्जिन की जरूरत बताई।
- **हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार:** देश में विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे का जाल बिछाया जा चुका है जो 120 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक की गति के लिए सुरक्षित रूप से डिजाइन किए गए हैं। ऐसे उन्नत मार्गों पर पुराने और अत्यधिक कड़े चालान नियमों के चलते यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
- **प्रशासनिक स्तर पर लागू होना बाकी:** यह निर्देश एक उद्योग सम्मेलन में दिया गया सुझाव और परामर्श है जिसे जमीन पर उतारने के लिए अभी तकनीकी और कानूनी दिशा-निर्देश जारी होने हैं। विभिन्न राज्यों की ट्रैफिक पुलिस और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सॉफ्टवेयर और कैमरों की सेटिंग बदले जाने के बाद ही यह वास्तविक रूप ले सकेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. नितिन गडकरी ने एक्सप्रेसवे पर चालान को लेकर क्या निर्देश दिया है?
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति और तय सीमा से 20 प्रतिशत अधिक रफ्तार पर चालान या नोटिस न काटे जाएं।

### 2. क्या एक्सप्रेसवे पर आधिकारिक स्पीड लिमिट बढ़ाकर 144 किमी प्रति घंटा कर दी गई है?
नहीं, आधिकारिक स्पीड लिमिट में कोई वैधानिक बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि चालान प्रणाली को व्यावहारिक बनाने के लिए केवल 20 प्रतिशत का बफर मार्जिन देने का सुझाव दिया गया है।

### 3. क्या यह 120 किमी प्रति घंटा का नियम देश के सभी हाईवे पर लागू होगा?
नहीं, यह छूट केवल आधुनिक एक्सप्रेसवे पर लागू होगी और सामान्य राष्ट्रीय या राज्यीय हाईवे पर चालकों को वहां के निर्धारित गति संकेतों का ही पालन करना होगा।

### 4. क्या दिल्ली-नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी 120 की रफ्तार से गाड़ी चला सकते हैं?
नहीं, दिल्ली-नोएडा और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर यह फॉर्मूला लागू नहीं होगा, वहां कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और सर्दियों में कोहरे के समय 75 किमी प्रति घंटा ही रहेगी।

### 5. यह छूट देने के पीछे क्या मुख्य कारण बताया गया है?
एक्सप्रेसवे पर मामूली गति अंतर और स्वचालित स्पीड कैमरों की तकनीकी कमियों के कारण चालकों को मिलने वाले अवांछित चालानों की शिकायतों को दूर करने के लिए यह निर्देश दिया गया है।

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