जापानी ऑटो दिग्गज सुजुकी घटाएगी वाहन विकास का समय, चीनी प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर देने की बड़ी रणनीति सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने 2030 तक नई कारों के विकास समय को 48 महीने से घटाकर 24 महीने करने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें भारतीय बाजार विस्तार का प्रमुख केंद्र रहेगा। वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में चीनी विनिर्माताओं की तेज रफ्तार को देखते हुए जापानी वाहन निर्माता सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने अपने कामकाज के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव करने का फैसला किया है। टोक्यो में शुक्रवार को बोलते हुए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तोशिहिरो सुजुकी ने घोषणा की कि 2030 तक नए मॉडलों को विकसित करने की समयसीमा लगभग आधी कर दी जाएगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी नई कार को तैयार करने में 40 से 48 महीने का वक्त लगता है, जिसे आने वाले वर्षों में घटाकर सिर्फ 24 महीने पर लाने की तैयारी है। जापानी निर्माता का मानना है कि चीनी कंपनियों की असाधारण गति के सामने टिके रहने के लिए पारंपरिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदलना ही एकमात्र रास्ता है। चीनी प्रतिस्पर्धियों से बदलता वैश्विक परिदृश्य दशकों तक वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग में जापानी कार्यकुशलता और जर्मन इंजीनियरिंग को अंतिम मानक समझा जाता रहा। हालांकि बीवायडी, लीपमोटर और शाओमी जैसी आधुनिक चीनी कंपनियों ने इस समीकरण को पूरी तरह उलट दिया है। सॉफ्टवेयर केंद्रित डिजाइन, तेज सॉफ्टवेयर अपडेट्स, अत्यंत तीव्र विकास चक्र और उन्नत बैटरी तकनीक के बूते इन कंपनियों ने दुनिया भर के पारंपरिक ऑटो निर्माताओं के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इन नए पैमानों की वजह से स्थापित कंपनियों को अपनी इंजीनियरिंग और उत्पादन रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पैरेलल डेवलपमेंट मॉडल से काम में आएगी तेजी नए वाहनों को तैयार करने की रफ्तार बढ़ाने के लिए सुजुकी ने एक नई प्रणाली शुरू करने की योजना बनाई है जिसे 'पैरेलल डेवलपमेंट' नाम दिया गया है। पुरानी व्यवस्था में योजना, डिजाइनिंग, उत्पादन तकनीक, गुणवत्ता जांच और पार्ट्स खरीद जैसे विभाग क्रमिक रूप से एक के बाद एक काम करते थे, जिससे काफी समय बर्बाद होता था। नए सिस्टम के तहत ये सभी विभाग परियोजना की शुरुआत से ही एक साथ समानांतर रूप से काम करेंगे। इसके अलावा डिजिटल स्पेस में पुराने डिजाइन मानकों, मूल्यांकन के अनुभवों और सड़कों पर दौड़ रही वास्तविक कारों से हासिल आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। साझा मॉड्यूल्स का दायरा बढ़ाकर डिजाइन से लेकर असेंबली लाइन तक के काम को एक साथ कस्टमाइज किया जाएगा। इन बदलावों के जरिए कंपनी विकास दक्षता में 30 प्रतिशत और उत्पादन दक्षता में 50 प्रतिशत सुधार हासिल करना चाहती है, जो विशेषकर साझा प्लेटफॉर्म वाली गाड़ियों पर लागू होगा। भारत बनेगा सुजुकी की वैश्विक रणनीति की धुरी सुजुकी ने पूर्व में 2012 में अमेरिकी बाजार और फिर 2018 में चीनी बाजार से अपने कदम पीछे खींच लिए थे। इस पृष्ठभूमि में भारत अब कंपनी के लिए सबसे अहम और सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। जिम्नी जैसी लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी तैयार करने वाली यह दिग्गज ऑटोमेकर भारतीय परिचालन को तेजी से विस्तार देने में जुटी है। योजना के अनुसार, भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को मौजूदा तीन मिलियन यूनिट सालाना से कम के स्तर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक चार मिलियन यूनिट सालाना पर पहुंचाया जाएगा। सुजुकी का अनुमान है कि भारतीय कार बाजार आने वाले कुछ दशकों में आकार में दोगुना या तिगुना हो सकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीक को जापान और भारत के बीच साझा किया जाएगा, जबकि वाहनों का विनिर्माण क्षेत्रीय जरूरतों के हिसाब से ढाला जाएगा। इसका आप पर असर सुजुकी द्वारा विकास चक्र को आधा करने से भारतीय वाहन खरीदारों को ज्यादा तेजी से नए मॉडल और आधुनिक फीचर्स वाली गाड़ियां मिल सकेंगी। • भारत में प्रभाव: भारतीय ग्राहकों को जापानी और वैश्विक स्तर के नए फीचर्स, उन्नत तकनीक और बेहतर गाड़ियां काफी कम समय में उपलब्ध होंगी। इसके अलावा देश में नए मॉडलों के लॉन्च का इंतजार भी काफी घट जाएगा। • उत्पादन और रोजगार: भारत में उत्पादन क्षमता 40 लाख यूनिट सालाना होने से देश में वाहनों की स्थानीय असेंबली और कंपोनेंट सप्लाई चेन मजबूत होगी। इससे घरेलू स्तर पर विनिर्माण और ऑटो पार्ट्स क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन होगा। • कीमत और मुकाबला: निर्माण और विकास लागत में सुधार होने से नई गाड़ियों के दाम प्रतिस्पर्धी बने रहने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को किफायती बजट में बेहतर सेफ्टी और सॉफ्टवेयर से लैस वाहन मिलेंगे। • वैश्विक गुणवत्ता: भारत और जापान के बीच साझा तकनीकी प्रक्रियाओं से भारतीय सड़कों के लिए तैयार होने वाले वाहन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरेंगे। इससे खरीदारों को टिकाऊ और भरोसेमंद गाड़ियां मिलेंगी। ऐसा क्यों हुआ सुजुकी ने यह फैसला वैश्विक बाजार में उभरती नई चुनौतियों और चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियों की तेज विकास रफ्तार का मुकाबला करने के लिए लिया है। • सीधा कारण: बीवायडी, शाओमी और लीपमोटर जैसी चीनी कंपनियों द्वारा अत्यंत तीव्र विकास चक्र और नई बैटरी तकनीक पेश करने से स्थापित कंपनियों पर भारी दबाव बना है। इन नए पैमानों के चलते सुजुकी को अपने पारंपरिक 40 से 48 महीने के विकास चक्र को घटाना पड़ा। • बाजार की स्थिति: सॉफ्टवेयर आधारित डिजाइन और बार-बार होने वाले डिजिटल अपडेट्स ने पूरी दुनिया में कार निर्माण के पुराने तौर-तरीकों को बदल दिया है। पुरानी क्रमिक प्रक्रिया की जगह सभी विभागों को एक साथ काम करने वाली पैरेलल प्रणाली में बदलना जरूरी हो गया था। • रणनीतिक पृष्ठभूमि: सुजुकी ने 2012 में अमेरिका और 2018 में चीन का बाजार छोड़ दिया था, जिसके बाद भारत उसका प्रमुख आधार बन गया। भारतीय बाजार के अगले कुछ दशकों में दो से तीन गुना बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए कंपनी ने यहां क्षमता विस्तार और तेज मॉडल रोलआउट की योजना बनाई है। सवाल-जवाब 1. सुजुकी ने नई कार विकसित करने के समय को कितना घटाने का लक्ष्य रखा है? सुजुकी अपने मौजूदा 40 से 48 महीने के वाहन विकास समय को घटाकर 2030 तक सिर्फ 24 महीने करने की योजना बना रही है। 2. सुजुकी के सीईओ तोशिहिरो सुजुकी ने यह बयान कहां दिया? कंपनी के सीईओ तोशिहिरो सुजुकी ने शुक्रवार को टोक्यो में यह आधिकारिक घोषणा की। 3. कंपनी किन प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए यह कदम उठा रही है? सुजुकी यह कदम बीवायडी, लीपमोटर और शाओमी जैसी तेजी से उभरती चीनी वाहन कंपनियों को टक्कर देने के लिए उठा रही है। 4. पैरेलल डेवलपमेंट मॉडल क्या है? यह एक ऐसी कार्यप्रणाली है जिसमें योजना, डिजाइन, उत्पादन, गुणवत्ता और खरीद विभाग एक के बाद एक काम करने के बजाय शुरुआत से ही एक साथ समानांतर काम करेंगे। 5. दक्षता में सुधार को लेकर सुजुकी के क्या लक्ष्य हैं? कंपनी का लक्ष्य विकास दक्षता में 30 प्रतिशत और उत्पादन दक्षता में 50 प्रतिशत तक सुधार हासिल करना है। 6. भारत में सुजुकी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की क्या योजना है? सुजुकी भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को मौजूदा तीन मिलियन यूनिट से कम के स्तर से बढ़ाकर 2030 तक चार मिलियन यूनिट सालाना करना चाहती है। 7. सुजुकी ने अमेरिकी और चीनी बाजार कब छोड़े थे? सुजुकी ने अमेरिकी बाजार 2012 में और चीनी बाजार 2018 में छोड़ दिया था। https://trendkia.com/auto/japanese-auto-giant-suzuki-ghatayegi-vahan-vikas-ka-samay-chinese-pratidwandwiyon-ko-takkar-dene-ki-badi-ranniti-38584 TrendKia — Har trend, sabse pehle.