# लखटकिया से आमिर खान की पसंद तक, भारतीय बाजार में इन पांच गाड़ियों को मिला सुपरफ्लॉप का तमगा

> भारतीय कार बाजार अपनी अलग प्राथमिकताओं और उम्मीदों के लिए जाना जाता है, जहां कई बार बड़े ब्रांड्स के महत्वाकांक्षी मॉडल भी ग्राहकों को लुभाने में नाकाम रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** ऑटो · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/auto/lakhtakiya-se-aamir-khan-ki-pasand-tak-bharatiya-bajar-mein-in-panch-gadiyon-ko-mila-superflap-ka-tamga-57912 · **Language:** Hindi
**Tags:** टाटा नैनो, डैटसन गो, महिंद्रा क्वांतो, शेवरले एंजॉय, निसान टेरानो, ऑटो बाजार

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित बाजारों में शुमार है। यहां किसी भी गाड़ी की कामयाबी केवल किसी बड़े ब्रांड के नाम या आकर्षक विज्ञापनों पर टिकी नहीं होती है, बल्कि यह ग्राहकों की सामाजिक प्रतिष्ठा, वैल्यू-फॉर-मनी सोच और दैनिक उपयोग की कसौटी पर परखी जाती है। हमारे देश में कार को केवल एक जगह से दूसरी जगह जाने का जरिया नहीं माना जाता, बल्कि इसे परिवार की तरक्की और समाज में रुतबे का प्रतीक समझा जाता है। कई बार वैश्विक स्तर पर झंडे गाड़ने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी भारी-भरकम निवेश और बड़े दावों के साथ अपने मॉडल उतारे, लेकिन वे यहां के खरीदारों की नब्ज समझने में पूरी तरह असफल रहीं। गलत पोजिशनिंग, बेमेल डिजाइन, खराब बिल्ड क्वालिटी और कमजोर रणनीतियों के कारण कई चर्चित गाड़ियां बाजार में औंधे मुंह गिर गईं। आइए उन पांच गाड़ियों पर नजर डालते हैं जो लॉन्च के वक्त काफी चर्चा में थीं, लेकिन बाद में इतिहास के पन्नों में खो गईं।

## टाटा नैनो
टाटा मोटर्स ने साल 2009 में लगभग 1 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत के साथ दुनिया की सबसे किफायती कार के तौर पर टाटा नैनो को पेश किया था। इसका कॉम्पैक्ट एग-शेप डिजाइन भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक और दोपहिया वाहन चालकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था ताकि वे आसानी से कार में अपग्रेड कर सकें। इसके पिछले हिस्से में 624cc का ट्विन-सिलेंडर पेट्रोल इंजन लगाया गया था और इसका केबिन स्पेस भी काफी बेहतर था। हालांकि, इसे दुनिया की सबसे सस्ती कार के रूप में विज्ञापित करना ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। भारत में गाड़ी खरीदना सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा एक भावुक फैसला होता है, इसलिए लोग इस पर 'सस्ती गाड़ी' का लेबल लगवाने से बचने लगे। शुरुआती दौर में सामने आई आग लगने की घटनाओं और सुरक्षा को लेकर खड़े हुए सवालों ने इसकी बिक्री को गहरी चोट पहुंचाई। उस समय इस मॉडल को देश की लखटकिया कार के नाम से जाना जाने लगा था।

## डैटसन गो
निसान ने साल 2014 में अपने ऐतिहासिक सब-ब्रांड डैटसन को भारत में दोबारा जीवित करते हुए डैटसन गो हैचबैक को लगभग 3.12 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर उतारा। इसका डिजाइन काफी शार्प और स्पोर्टी रखा गया था, जिसमें आगे की तरफ हेक्सागोनल ग्रिल और अंदर पर्याप्त केबिन स्पेस मिलता था। इसमें 1.2-लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया था और यह बेहतरीन माइलेज का दावा करती थी। हालांकि, उत्पादन लागत में कटौती करने के चक्कर में कंपनी ने इसके इंटीरियर को बेहद साधारण और फीका बना दिया। इसमें बंद रहने वाला ग्लवबॉक्स तक नहीं दिया गया था और इसके बाहरी बॉडी पैनल बेहद पतले और कमजोर थे। ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में इसे शून्य-स्टार सुरक्षा रेटिंग प्राप्त हुई, जिसने इसके कमजोर ढांचे की पोल खोल दी। मारुति सुजुकी और हुंडई जैसी कंपनियों के कड़े और कड़े मुकाबले के आगे यह गाड़ी टिक नहीं पाई।

## महिंद्रा क्वांतो
महिंद्रा ने साल 2012 में कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में टैक्स लाभ हासिल करने के उद्देश्य से 4-मीटर से छोटी महिंद्रा क्वांतो को बाजार में उतारा, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग 5.99 लाख रुपये रखी गई थी। इसका आगे का हिस्सा काफी हद तक महिंद्रा जाइलो से मिलता-जुलता था, जबकि पीछे के हिस्से को काटकर इसे छोटा किया गया था। इस अजीबोगरीब और बेमेल बॉक्स-कट डिजाइन की वजह से यह गाड़ी देखने में काफी अटपटी लगती थी। इसमें 1.5-लीटर का mHawk ट्विन-टर्बो डीजल इंजन और पीछे जंप सीटों के साथ 7-सीटर लेआउट दिया गया था। भारी लैडर-फ्रेम चेसिस और ऊंची बॉडी की बनावट के कारण इसमें अत्यधिक बॉडी-रोल और अनियंत्रित राइड क्वालिटी की समस्या देखने को मिलती थी। खराब आराम और बेढंगे लुक के चलते ग्राहकों ने इसे पूरी तरह नकार दिया।

## शेवरले एंजॉय
जनरल मोटर्स ने साल 2013 में बजट एमपीवी सेगमेंट में मारुति अर्टिगा को कड़ी टक्कर देने के इरादे से शेवरले एंजॉय को लगभग 5.49 लाख रुपये की आक्रामक कीमत पर लॉन्च किया था। इसका डिजाइन कंपनी के चीनी साझेदार एसएआईसी के प्लेटफॉर्म पर आधारित था, जो देखने में बेहद साधारण, सपाट और किसी कमर्शियल वैन जैसा प्रतीत होता था। इसमें 7 और 8-सीटर बैठने की क्षमता, 1.3-लीटर का डीजल इंजन और बड़ा केबिन इसकी मुख्य खूबियां थीं। लेकिन बेहद घटिया प्लास्टिक सामग्री, केबिन के भीतर आने वाली तेज आवाज और सुरक्षा के मोर्चे पर कमजोर ढांचा ग्राहकों को रास नहीं आया। ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में इसे भी शून्य स्टार मिले। इसका वैन जैसा बनावट और बाजार में बेहद कमजोर रीसेल वैल्यू इसके असफल होने के प्रमुख कारण बने।

## निसान टेरानो
रेनो-निसान गठबंधन के तहत डस्टर की जबरदस्त सफलता के बाद निसान ने साल 2013 में निसान टेरानो को लगभग 9.59 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पेश किया। डिजाइन के मामले में यह आक्रामक हनीकॉम्ब ग्रिल, स्लीक हेडलैम्प्स और मस्कुलर स्टांस के कारण डस्टर की तुलना में अधिक प्रीमियम दिखाई देती थी। इसमें 1.5-लीटर का dCi डीजल इंजन मिलता था और इसका सस्पेंशन तथा राइड हैंडलिंग का अनुभव शानदार था। हालांकि, कंपनी ने बिना किसी बड़े आंतरिक या तकनीकी बदलाव के इसे डस्टर से करीब 1 लाख रुपये ज्यादा महंगी कीमत पर बेचा। ग्राहकों को वही पुराना केबिन और इंजन अधिक दाम चुकाकर खरीदना फायदे का सौदा नहीं लगा। इसके अलावा, निसान का सीमित सर्विस नेटवर्क भी इसकी राह में एक बड़ा रोड़ा बन गया और यह बाजार में अपनी जगह नहीं बना सकी।

## इसका आप पर असर
भारतीय ऑटो बाजार में असफल वाहनों का यह इतिहास खरीदारों के लिए यह सबक देता है कि केवल कम कीमत या बड़े ब्रांड नाम के भरोसे गाड़ी खरीदने से बचना चाहिए और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

- **भारत में:** वाहन खरीदारों को अब किसी भी नई कार का चुनाव करते समय केवल शुरुआती कीमत या लुक देखने के बजाय उसकी क्रैश टेस्ट रेटिंग, रीसेल वैल्यू और आफ्टर-सैल सर्विस नेटवर्क की जांच जरूर करनी चाहिए। यह सतर्कता उपभोक्ताओं को किसी भी भविष्य के वित्तीय घाटे या रखरखाव की परेशानियों से बचा सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
कई बहुचर्चित वाहन भारतीय बाजार में इसलिए असफल रहे क्योंकि निर्माताओं ने स्थानीय खरीदार की प्राथमिकताओं, सामाजिक अपेक्षाओं और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ठीक से नहीं समझा। गलत प्राइसिंग स्ट्रेटजी और कमजोर बॉडी स्ट्रक्चर ने इन मॉडल्स की नाकामी में अहम भूमिका निभाई।

- **गलत ब्रांड पोजिशनिंग:** टाटा नैनो को सबसे सस्ती कार के रूप में प्रचारित किए जाने के कारण उपभोक्ताओं में सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी हिचकिचाहट पैदा हो गई, जिससे वे इससे दूर रहने लगे।
- **सुरक्षा मानकों की अनदेखी:** डैटसन गो और शेवरले एंजॉय जैसी गाड़ियों को ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में शून्य स्टार रेटिंग मिली, जिससे उनकी कमजोर बनावट उजागर हो गई और ग्राहकों का भरोसा टूट गया।
- **अजीबोगरीब डिजाइन और बनावट:** महिंद्रा क्वांतो और शेवरले एंजॉय का बेमेल और वैन जैसा लुक ग्राहकों को लुभा नहीं पाया, जबकि निसान टेरानो को अपनी मूल सहयोगी गाड़ी से महंगे दाम पर बेचे जाने के कारण घाटा उठाना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. टाटा नैनो को किस वर्ष लॉन्च किया गया था?
टाटा नैनो को साल 2009 में लगभग 1 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर लॉन्च किया गया था।

### 2. डैटसन गो को किस कंपनी ने बाजार में उतारा था?
डैटसन गो को निसान ने साल 2014 में लगभग 3.12 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर पेश किया था।

### 3. महिंद्रा क्वांतो में किस इंजन का इस्तेमाल किया गया था?
महिंद्रा क्वांतो में 1.5-लीटर का mHawk ट्विन-टर्बो डीजल इंजन दिया गया था।

### 4. शेवरले एंजॉय को किस गाड़ी को टक्कर देने के लिए उतारा गया था?
शेवरले एंजॉय को मारुति अर्टिगा को टक्कर देने के लिए लगभग 5.49 लाख रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया था।

### 5. निसान टेरानो की शुरुआती कीमत कितनी थी?
निसान टेरानो को लगभग 9.59 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पेश किया गया था।

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