नितिन गडकरी का ऐलान: टोयोटा इसी महीने पेश करेगी पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाली इनोवा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी है कि टोयोटा इसी महीने 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलने वाली इनोवा का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश करने जा रही है। देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में वैकल्पिक ईंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन इसी महीने लोकप्रिय एमपीवी इनोवा का फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण पेश करने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। यह नया वाहन E100 यानी 100 प्रतिशत इथेनॉल की मदद से दौड़ने में पूरी तरह सक्षम होगा। नितिन गडकरी ने सभा को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी ही होगी, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तेजी से बढ़ी हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह अनुमान भी जताया कि अगले साल तक भारत में बिकने वाली कुल कारों में कम से कम 35-40 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी। ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के नए मानक ऊर्जा सुरक्षा के दीर्घकालिक रोडमैप पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का सबसे अहम ईंधन है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले वक्त में स्वच्छ हाइड्रोजन का शुद्ध निर्यातक देश बनकर उभर सकता है। वैकल्पिक ईंधनों को विधिक और तकनीकी समर्थन देने के लिए पिछले महीने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में कई अहम संशोधनों को अधिसूचित किया था। इस नए कानूनी प्रावधान के तहत E100 ईंधन से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को औपचारिक मंजूरी दी गई है। E100 मानक का सीधा अर्थ यह है कि संबंधित वाहन लगभग पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल के दम पर सड़कों पर फर्राटा भर सकते हैं। सामान्य और E20 इंजन वाली कारों पर सख्त पाबंदी सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नए तकनीकी नियमों की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से ऊपर और E100 तक के ईंधन का उपयोग हर वाहन में नहीं किया जा सकेगा। यह भारी इथेनॉल मिश्रण सिर्फ उन्हीं विशेष वाहनों के लिए मान्य होगा, जिन्हें विशेष तौर पर इस ईंधन के अनुरूप डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। यह व्यवस्था बाजार में मौजूद अन्य आम गाड़ियों पर लागू नहीं होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में E20 या सामान्य पेट्रोल पर चलने वाली गाड़ियां E85 अथवा E100 ग्रेड के ईंधन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी, क्योंकि ऐसा करने से उनके इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है। मानकों में संशोधन और फ्लेक्स फ्यूल का सफर मंत्रालय ने स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उत्सर्जन से जुड़ी तालिकाओं और परीक्षण के प्रावधानों में इस्तेमाल होने वाली वाहन श्रेणियों की सीमाओं, ईंधन के तकनीकी विनिर्देशों तथा संदर्भों में व्यापक संशोधन किए हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने इन तकनीकी परिवर्तनों से प्रभावित होने वाली हल्की पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के लिए अधिकतम वजन सीमा को 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम निर्धारित कर दिया है। भारतीय बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की शुरुआत की बात करें तो इसी वर्ष जून के महीने में मारुति सुजुकी इंडिया ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार को जनता के सामने पेश किया था। उस दौरान कंपनी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किया था, जो न्यूनतम E20 से लेकर अधिकतम E100 तक के किसी भी अनुपात वाले इथेनॉल ईंधन पर चलने में पूरी तरह समर्थ है। इसका आप पर असर 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों के आगमन से देश में पेट्रोल पर निर्भरता घटेगी और स्वच्छ परिवहन को गति मिलेगी। • भारत में: देश भर के वाहन चालकों के लिए भविष्य में पेट्रोल के मुकाबले सस्ते कृषि आधारित बायोफ्यूल के विकल्प खुलेंगे। इससे आयातित कच्चे तेल पर भारत का विदेशी मुद्रा खर्च घटेगा और घरेलू स्तर पर प्रदूषण स्तर में भी भारी कमी देखने को मिलेगी। • मौजूदा कार मालिकों पर: सामान्य पेट्रोल या E20 गाड़ियों में E85 या E100 ईंधन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जा सकेगा। सामान्य वाहन मालिकों को भारी इथेनॉल मिश्रण से बचना होगा, क्योंकि गैर-प्रमाणित इंजन में इसे डालने से तकनीकी खराबी और इंजन फेल होने का खतरा रहेगा। • इलेक्ट्रिक और स्वच्छ वाहन खरीदारों पर: अगले साल तक देश में बिकने वाली कुल कारों में 35 से 40 प्रतिशत गाड़ियां इलेक्ट्रिक होने का अनुमान है। नई कार खरीदने वाले ग्राहकों को पेट्रोल-डीजल के अलावा फ्लेक्स-फ्यूल और ईवी के अधिक मॉडल बाजार में मिलेंगे। • वाहन निर्माताओं पर: ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए हल्की गाड़ियों की भार सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम कर दी गई है। इससे कार निर्माताओं को भारी बैटरी, विशेष फ्यूल टैंक और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक फिट करने में सहूलियत मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ भारत द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल और E100 मानकों को तेजी से लागू करने के पीछे वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह हैं। सरकार घरेलू स्तर पर पैदा होने वाले वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देकर विदेशी निर्भरता खत्म करना चाहती है। • कच्चे तेल की बढ़ती लागत: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में जीवाश्म ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अनिवार्य हो गई है। • नियामक नियमों में बदलाव: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करके E100 ईंधन आधारित फ्लेक्स-फ्यूल कारों को औपचारिक कानूनी मंजूरी दी है। इस नीतिगत कदम के बिना कोई भी ऑटो कंपनी 100 प्रतिशत इथेनॉल मॉडल सड़क पर नहीं उतार सकती थी। • पूर्व सफल परीक्षण: इससे पहले इसी साल जून में मारुति सुजुकी ने वैगन आर का E20 से E100 तक चलने वाला मॉडल प्रदर्शित किया था। उस तकनीकी सफलता के बाद अब टोयोटा जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां भी अपने बड़े यात्री वाहनों को इथेनॉल मॉडल में ढाल रही हैं। सवाल-जवाब 1. टोयोटा अपनी 100 प्रतिशत इथेनॉल वाली इनोवा कब लॉन्च करने जा रही है? केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन इसी महीने इनोवा का E100 फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश करेगी। 2. E100 फ्यूल का क्या मतलब होता है? E100 का अर्थ 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल ईंधन है, जिसमें पेट्रोल का कोई मिश्रण नहीं होता। 3. क्या सामान्य पेट्रोल या E20 कार में E100 इथेनॉल डाला जा सकता है? नहीं, E20 या सामान्य पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां E85 या E100 ईंधन का उपयोग नहीं कर सकतीं, क्योंकि यह केवल विशेष प्रमाणित फ्लेक्स-फ्यूल कारों के लिए है। 4. भारत में पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार किस कंपनी ने पेश की थी? मारुति सुजुकी ने इसी साल जून में वैगन आर का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया था, जो E20 से E100 ईंधन पर चल सकता है। 5. वाहनों के वजन नियम में सरकार ने क्या बदलाव किया है? सरकार ने इन तकनीकी बदलावों से प्रभावित होने वाली हल्की पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के लिए अधिकतम वजन सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम कर दी है। 6. अगले साल तक देश में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री को लेकर क्या अनुमान जताया गया है? नितिन गडकरी के अनुसार, अगले साल तक देश में बिकने वाली कारों में से कम से कम 35 से 40 प्रतिशत कारें इलेक्ट्रिक होंगी। https://trendkia.com/auto/nitin-gadkari-ka-ailana-toyota-isi-mahine-pesha-karegi-puri-taraha-ithenola-se-chalane-vali-innova-55977 TrendKia — Har trend, sabse pehle.