पानी में फंसी गाड़ी को स्टार्ट करने की गलती से रिजेक्ट हो सकता है इंश्योरेंस क्लेम, जानें सही तरीका बाढ़ में डूबे वाहन को स्टार्ट करने की गलती करें तो कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है, लेकिन सही समय पर सबूत जुटाकर और 24-48 घंटे के भीतर सूचना देकर पूरा मुआवजा पाया जा सकता है। मानसून के मौसम में सड़कों पर पानी भर जाना और वाहनों का बाढ़ में डूब जाना हर साल की कहानी बन गई है, लेकिन असली सिरदर्द तब शुरू होता है जब इंश्योरेंस क्लेम पास कराने की बारी आती है। अगर आपकी कार या बाइक पानी में डूबी है तो सही समय पर सही कदम उठाकर आप पूरा मुआवजा पा सकते हैं, वरना क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बना रहता है। यहां सबसे पहले समझना जरूरी है कि थर्ड पार्टी बीमा सिर्फ दूसरे व्यक्ति या वाहन को हुए नुकसान की भरपाई करता है, आपकी अपनी गाड़ी को बाढ़ या जलभराव से हुए नुकसान का पैसा तभी मिलेगा जब आपने कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी ले रखी हो। कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में फ्लड और साइक्लोन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुआ नुकसान कवर होता है, और अगर आपने इंजन प्रोटेक्ट ऐड-ऑन भी लिया है तो हाइड्रोस्टैटिक लॉक जैसी दिक्कतों का खर्च भी बीमा कंपनी उठाती है। IRDAI के दिशानिर्देशों के मुताबिक कंपनियां ऐसे क्लेम को तेजी से निपटाने की कोशिश करती हैं, बशर्ते पॉलिसीधारक सही दस्तावेज और सही समय पर सूचना दे। वाहन डूबते ही सबसे पहले क्या करें पहला और सबसे जरूरी नियम यह है कि पानी में फंसी गाड़ी को स्टार्ट करने की गलती बिल्कुल न करें। इंजन में पानी घुस जाने पर हाइड्रोलिक लॉक बन सकता है, और यही वजह अक्सर क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह बनती है। संभव हो तो बैटरी का कनेक्शन खुद हटा दें, लेकिन वाहन को धक्का देकर या खींचकर खुद हिलाने की कोशिश न करें। इसके बजाय इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर टोइंग की व्यवस्था कराएं, ज्यादातर कंपनियां रोडसाइड असिस्टेंस के तहत यह सुविधा मुफ्त में देती हैं। यह नियम कार और दोपहिया दोनों पर बराबर लागू होता है। सबूत जुटाना क्यों जरूरी है गाड़ी को हाथ लगाने से पहले उसकी अच्छी तरह फोटो और वीडियो बना लें, चारों तरफ से, इंजन का हिस्सा, डैशबोर्ड, सीटें, पानी का स्तर कहां तक था और आसपास का नजारा, सब कुछ कैमरे में कैद करें। यही तस्वीरें बाद में क्लेम प्रोसेसिंग के दौरान सबसे मजबूत सबूत बनती हैं। पानी उतर जाने के बाद भी गाड़ी को साफ करने की जल्दबाजी न करें, कंपनी का सर्वेयर आकर निरीक्षण करे उससे पहले वाहन को छेड़ें नहीं। वाहन को सड़क किनारे या नीचे वाली जगह पर पार्क करने से बचें, जहां तक हो सके ऊंची और सुरक्षित जगह चुनें ताकि दोबारा नुकसान न हो। 24 से 48 घंटे के अंदर सूचना देना अनिवार्य घटना की सूचना बीमा कंपनी को 24 से 48 घंटे के भीतर देनी होती है, इसमें देरी करने पर क्लेम खारिज होने का खतरा बढ़ जाता है। सूचना कंपनी के हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल ऐप, वेबसाइट या फिर एजेंट के जरिए दी जा सकती है। इस दौरान पॉलिसी नंबर, वाहन की पूरी जानकारी, घटना कब और कहां हुई यह सब बताना जरूरी होता है। सूचना देने के बाद जो क्लेम रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है उसे संभालकर रखें, आगे की पूरी प्रक्रिया इसी नंबर से ट्रैक होती है। क्लेम फाइल करने के लिए ये दस्तावेज तैयार रखें क्लेम की प्रक्रिया शुरू करने से पहले कुछ दस्तावेज जुटाना जरूरी है, वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC सबसे पहले चाहिए होता है। अगर वाहन बाढ़ में बहकर गायब हो गया है तो पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराना अनिवार्य है। जिन वाहनों पर फाइनेंस चल रहा हो, उनके लिए फाइनेंसर से NOC लेना पड़ता है। बड़ी रकम के क्लेम में पैन कार्ड और आधार जैसे AML दस्तावेज भी मांगे जाते हैं। ये सभी दस्तावेज अपलोड करके ऑनलाइन क्लेम फाइल किया जा सकता है, और कई मामलों में गैरेज से लिया गया एस्टिमेट भी क्लेम को मजबूत बनाने में मदद करता है। सर्वेयर की जांच और नुकसान का आकलन सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी अपना सर्वेयर भेजती है, जो वाहन का फिजिकल निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करता है और अपनी रिपोर्ट तैयार करता है। सर्वेयर के पहुंचने से पहले किसी भी हाल में रिपेयर का काम शुरू न कराएं, वरना क्लेम प्रभावित हो सकता है। अगर रिपेयर पर आने वाला खर्च वाहन के IDV यानी इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू का 75% से ज्यादा निकलता है, तो उसे टोटल लॉस मान लिया जाता है और डिडक्टिबल घटाकर IDV के आधार पर भुगतान किया जाता है। कुछ नेटवर्क गैरेज में कैशलेस रिपेयर की सुविधा मिलती है, बाकी जगहों पर रिइंबर्समेंट के जरिए पैसा वापस मिलता है। यह नियम दोपहिया वाहनों पर भी उसी तरह लागू होता है। वाहन बह जाने या टोटल लॉस होने पर क्या होगा अगर वाहन बाढ़ में बहकर पूरी तरह गायब हो गया हो और मिल ही न रहा हो, तो सबसे पहले पुलिस में FIR दर्ज करानी होगी। इसके बाद पुलिस से नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट लेना होता है, जिसके आधार पर बीमा कंपनी IDV के हिसाब से क्लेम सेटल कर देती है। कई बार वाहन बाद में मिल भी जाता है, लेकिन अगर नुकसान बहुत ज्यादा हो तो उसे फिर भी टोटल लॉस ही माना जाता है। कितने दिन में मिलेगा पैसा और किन गलतियों से बचें सारे जरूरी दस्तावेज जमा हो जाने के बाद बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर क्लेम सेटल करना होता है, IRDAI के नियमों के तहत देरी होने पर पॉलिसीधारक को ब्याज तक मिल सकता है। अगर नेटवर्क गैरेज चुना जाए तो कैशलेस रिपेयर की प्रक्रिया कहीं ज्यादा आसान हो जाती है। सबसे ज्यादा क्लेम इसलिए रिजेक्ट होते हैं क्योंकि लोग सूचना देने में देरी करते हैं, गलत या अधूरे दस्तावेज जमा करते हैं या फिर पानी में फंसी गाड़ी को स्टार्ट करने की गलती कर बैठते हैं। मानसून शुरू होने से पहले ही अपनी पॉलिसी की शर्तें एक बार जरूर जांच लें और इंजन प्रोटेक्ट के साथ जीरो डेप्रिसिएशन ऐड-ऑन लेना बेहतर विकल्प है। सभी जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी फोन में सेव करके रखें, ताकि आपात स्थिति में समय बर्बाद न हो। थोड़ी सी सावधानी और सही प्रक्रिया अपनाकर बाढ़ जैसी मुश्किल घड़ी में भी वाहन मालिक को उसका पूरा हक मिल सकता है। इसका आप पर असर जिनकी कार या बाइक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी से बीमित है, उनके लिए यह जानकारी सीधे पैसे से जुड़ी है। • बाढ़ के मौसम में सही समय पर सही कदम उठाने से हजारों से लाखों रुपये तक का क्लेम बच सकता है, वरना पूरा नुकसान अपनी जेब से भरना पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. बाढ़ में फंसी गाड़ी को स्टार्ट क्यों नहीं करना चाहिए? इंजन में पानी घुसने से हाइड्रोलिक लॉक बन सकता है, जो क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह बनता है। 2. क्या थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से बाढ़ का नुकसान कवर होता है? नहीं, अपनी गाड़ी के नुकसान का पैसा सिर्फ कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में ही मिलता है। 3. इंश्योरेंस कंपनी को घटना की सूचना कितने समय के भीतर देनी चाहिए? घटना के 24 से 48 घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी है, देरी से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। 4. वाहन को टोटल लॉस कब माना जाता है? अगर रिपेयर का खर्च वाहन के IDV के 75% से ज्यादा हो जाए तो उसे टोटल लॉस माना जाता है। 5. वाहन बाढ़ में बहकर गायब हो जाए तो क्या करना चाहिए? पुलिस में FIR दर्ज कराकर नॉन-ट्रेसेबल सर्टिफिकेट लेना होता है, जिसके आधार पर IDV के अनुसार क्लेम सेटल होता है। 6. क्लेम फाइल करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? RC, जरूरत पड़ने पर FIR, फाइनेंस्ड वाहन के लिए फाइनेंसर का NOC और बड़े क्लेम के लिए पैन कार्ड-आधार जैसे AML दस्तावेज चाहिए होते हैं। 7. क्लेम का पैसा कितने दिनों में मिल जाता है? सभी दस्तावेज जमा करने के बाद IRDAI नियमों के तहत क्लेम 30 दिनों में सेटल होना चाहिए, देरी पर ब्याज भी मिल सकता है। 8. इंजन प्रोटेक्ट ऐड-ऑन का क्या फायदा है? यह हाइड्रोस्टैटिक लॉक जैसी समस्याओं से हुए इंजन के नुकसान को भी कवर करता है। https://trendkia.com/auto/pani-men-phnsi-gari-ko-starta-karane-ki-galati-se-rijekta-ho-sakata-hai-inshyorensa-klema-janen-sahi-tarika-8364 TrendKia — Har trend, sabse pehle.