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  "type": "article",
  "title": "Rivian के CEO बेबाक बातचीत में: R2 फेल हुआ तो कंपनी का क्या होगा, Cybertruck की नाकामी और China से मुकाबले की रणनीति",
  "summary": "Rivian के सीईओ RJ Scaringe ने अपनी नई R2 SUV पर लगे दांव, R1 की पुरानी ऑटोनॉमी तकनीक के बेकार होने, Cybertruck की नाकामी और China व BYD से मुकाबले पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि कंपनी का पूरा ढांचा R2 की कामयाबी पर टिका है।",
  "content": "घाटे का पहाड़, फिर भी बड़े सपने\nRivian के लिए सफर आसान नहीं रहा। कंपनी ने अकेले 2025 में $3.6 billion का घाटा उठाया और बीते आठ साल में करीब $25 billion फूंक डाले — इस दौरान उसने लगभग हर दूसरी शुद्ध EV कंपनी से ज़्यादा पैसा खर्च किया। 2021 में Rivian का IPO दुनिया का सबसे बड़ा और अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक था; कुछ ही दिनों में कंपनी की कीमत $100 billion पार कर गई थी। लेकिन शेयर $130 की ऊंचाई से गिरकर अब करीब $16 पर आ चुका है। 2021 में R1 के बाज़ार में आने के बाद से Rivian ने 175,000 गाड़ियां बेची हैं — इसी अवधि में Tesla ने 80 लाख (8 million) बेच डालीं।\n\nराहत की बात यह रही कि 2024 में Volkswagen Group ने सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर मिलकर विकसित करने के लिए एक बड़े संयुक्त उपक्रम में $5.8 billion तक देने का वादा किया। इस साल Uber ने भी 50,000 तक पूरी तरह ऑटोनॉमस रोबोटैक्सी बनाने और उतारने के लिए Rivian में $1.25 billion तक निवेश की घोषणा की।\n\nफिर भी असल इम्तिहान आगे है — कंपनी को अपनी नई R2 SUV को सिर्फ बेचना नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में बेचना है। इन्हीं मुद्दों पर सीईओ RJ Scaringe से लंबी और बेबाक बातचीत हुई, जिसकी शुरुआत हुई 2026 की सबसे चर्चित EV से।\n\nFerrari की Luce और EV में विकल्पों की कमी\nScaringe ने Ferrari की Luce की डिज़ाइन सोच की तारीफ की। उनके मुताबिक Jony Ive और Marc Newson जिस इरादे और बारीकी से डिज़ाइन करते हैं, उसमें उस कार का कोई भी फैसला बेमकसद नहीं है — इसलिए उसे एक अलग नज़रिए से देखना होगा। यह वैसी नहीं है जैसी लोग उम्मीद कर रहे थे।\n\nक्या वे इसे खरीदेंगे? उनके पास कोई Ferrari नहीं है, पर कार की कई चीज़ें उन्हें बेहद पसंद हैं। इंटीरियर के कुछ हिस्से शानदार हैं — हैप्टिक्स, स्विच और बटन जिस खूबसूरती से बनाए गए हैं, उन पर Jony की छाप साफ दिखती है।\n\nउनका कहना था कि EV में ज़्यादा विकल्पों का आना अच्छी बात है, क्योंकि खासकर अमेरिका में भारी खालीपन है। बाज़ार की करीब 50 से 60 फीसदी हिस्सेदारी सिर्फ दो गाड़ियों — Model 3 और Model Y — के पास है। ये काफी समय से सड़कों पर हैं, फिर भी बाकी सबसे ज़्यादा बिकती हैं। अगर सचमुच इलेक्ट्रिक की ओर बढ़ना है तो इन दो के अलावा कहीं ज़्यादा विकल्प चाहिए।\n\nCybertruck की नाकामी पर बेबाक राय\nक्या Cybertruck की नाकामी ने उन्हें चौंकाया? Scaringe का जवाब था — नहीं। कभी-कभी कोई कंपनी कुछ बेहद जोखिम भरा और जंगली दांव खेलती है, और Tesla ने यही किया। यह मास-मार्केट प्रोडक्ट साबित नहीं हुआ, लेकिन शुरू से ही साफ था कि होगा भी नहीं। इसके डिज़ाइन फैसलों और प्रोडक्ट समझौतों ने इसे बेहद नीश (niche) बना दिया। Cybertruck, Model 3 और Model Y का ठीक उलटा है — वे ऐसी गाड़ियां हैं जो किसी को दूर नहीं धकेलतीं। उन्होंने ऐसा प्रोडक्ट बनाने की हिम्मत की सराहना की, पर माना कि यह Tesla के लिए बेहद सीमित दायरे वाला ही रहेगा।\n\nPolestar की उलझन और Tesla का दबदबा\nPolestar की मुश्किलों पर उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने का खिलाड़ी बनने के लिए कीमत सही होनी चाहिए, तकनीक का एकीकरण मज़बूत होना चाहिए और पूरा पैकेज — एक्सीलरेशन, एफिशिएंसी, पैकेजिंग — व्यापक ग्राहकों को लुभाने वाला होना चाहिए। साथ ही एक अमूर्त पहलू भी है: डिज़ाइन इतना दिलचस्प हो कि लोगों को खींचे, पर इतना समावेशी भी हो कि बड़ी संख्या को भाए।\n\nScaringe के मुताबिक Polestar यही संतुलन नहीं बिठा पाई। कारें बढ़िया दिखती हैं, मसला डिज़ाइन का नहीं है; लेकिन कीमत, कंटेंट और फीचर्स का पूरा पैकेज ग्राहकों से उस तरह नहीं जुड़ पाया जैसी उम्मीद वे R2 से करते हैं या जैसे Model Y जुड़ी। उन्होंने जोड़ा कि अमेरिका में Tesla की इतनी बड़ी हिस्सेदारी किसी स्वस्थ बाज़ार की नहीं, बल्कि बुरी तरह उपेक्षित बाज़ार की निशानी है।\n\nR2 फेल हुआ तो क्या? पूरा ढांचा इसी पर टिका\nसबसे बड़ा सवाल — अगर R2 नाकाम रहा तो? Scaringe ने बताया कि Rivian सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और यहां तक कि अपना सिलिकॉन तक खुद बनाती है। मोटर, गियरबॉक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स — सब कुछ पूरी तरह इन-हाउस। अगर कंपनी सालाना 50,000 यूनिट तक सिमटी रहती, तो यह तरीका बेहद महंगा साबित होता।\n\nकंपनी के अपने सेल्स ठिकाने हैं, अपना सर्विस नेटवर्क है, जिसमें कई अरब डॉलर लगे हैं। पार्ट्स डिस्ट्रिब्यूशन और व्हीकल डिस्ट्रिब्यूशन उसके अपने हैं, देश भर में बड़ी पार्किंग और व्हीकल प्रेप सेंटर हैं — यह सब R2 को ध्यान में रखकर बनाया गया।\n\nउन्होंने साफ कहा कि R2 से पहले इतना पैसा खर्च करना कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना है। योजना एक बड़ी कंपनी बनने की है, और इसकी बुनियाद यही है कि R2 चले। अगर R2 फ्लॉप हुआ, तो कारोबार को पीछे हटकर पूरी तरह नए सिरे से ढालना पड़ेगा। 50,000 गाड़ियां बेचने के लिए 6,000 लोगों की इंजीनियरिंग टीम रखना और सिलिकॉन तक गहराई से वर्टिकल इंटीग्रेशन करना तब किसी तर्क पर खरा नहीं उतरेगा। यानी कंपनी का भविष्य, जैसा उन्होंने डिज़ाइन किया है, पूरी तरह R2 की कामयाबी पर निर्भर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अपना बहुत थोड़ा वक्त ही यह सोचने में लगाते हैं कि अगर चीज़ें योजना के मुताबिक न बढ़ीं तो क्या होगा — \"हम जीतने के लिए खेल रहे हैं।\"\n\nIllinois और Georgia के कारखाने\nएक राहत यह है कि Illinois के Normal प्लांट की क्षमता 155,000 यूनिट है। कंपनी ने अगली फैक्ट्री — Georgia में — का निर्माण शुरू कर दिया है, जो दो चरणों में बनेगी। पहले यह 200,000 यूनिट का था, पर प्रोडक्ट पर इतनी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखकर पहले चरण को बढ़ाने का फैसला हुआ। अब पहला चरण ही 300,000 यूनिट का होगा, जो R3 समेत अन्य वैरिएंट और Europe तक विस्तार को सहारा देगा।\n\nऑटोनॉमी: लाइसेंसिंग बनाम गाड़ियां बेचना\nRivian के पास अपना पूरा ऑटोनॉमी स्टैक है, जो VW सौदे का हिस्सा नहीं है। इसे दूसरी कंपनियों (OEMs) को लाइसेंस देना मुनाफे का सौदा हो सकता है। क्या यह गाड़ियां बेचने से भी अहम हो जाएगा? Scaringe ने कहा कि यह अपने आप में एक लक्ष्य है — चाहे R2 खूब बिके या न बिके, वे इसे आगे बढ़ाएंगे ही। R2 के बिना यह और भी अहम हो जाता है, पर उनका ध्यान जीतने पर है।\n\nR1 के पुराने ग्राहक नाराज़ क्यों\nR1 में दी गई पहली पीढ़ी (Gen 1) की ऑटोनॉमी अब बेकार हो चुकी है और शुरुआती ग्राहक नाराज़ हैं — उन्होंने $80K चुकाए ऐसी चीज़ के लिए जो अब ज़्यादा सक्षम नहीं रही। तो R2 खरीदने वाला ग्राहक कैसे भरोसा करे कि मौजूदा सॉफ्टवेयर भी अगला 'डेड-एंड' नहीं बनेगा?\n\nScaringe ने इतिहास बताया: R1 Gen 1 दिसंबर 2021 के आखिर में आई थी। इसका आर्किटेक्चर मिला-जुला था — कुछ अपने कैमरे, पर मुख्य रूप से Mobileye आधारित सिस्टम। लॉन्च के दौरान ही उन्हें अहसास हुआ कि यह गलत रास्ता है। एक बिल्कुल अलग तरीका उभर रहा था, जो अब LLMs की वजह से सबको समझ आ गया है — ट्रांसफॉर्मर्स से एन्कोडिंग कर इंसानी समझ जैसे जटिल मॉडल बनाना।\n\nइसलिए R1 लॉन्च के लगभग साथ ही कंपनी ने सब कुछ रीसेट कर दिया, क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि मौजूदा तकनीक स्केल नहीं करेगी। एक नई टीम बनी जिसने 'डेटा फ्लाईव्हील' के इर्द-गिर्द सिस्टम डिज़ाइन किया, जो जमा होते मीलों से सीखता है। यह 2024 के आखिर में Gen 2 के रूप में आया। शुरुआत में फीचर्स बस ठीक-ठाक थे — हाईवे लेन कीप तो था, पर डेटा कम था। जैसे-जैसे ज़्यादा Gen 2 गाड़ियां सड़कों पर आईं, डेटा फ्लाईव्हील घूमने लगा।\n\nR2 के साथ क्या मिलेगा: Gen 2.5\nScaringe ने माना कि R2 के साथ जो आ रहा है, वह दरअसल बीच का कदम है — आज की R1 से बेहतर, पर R2 की अंतिम तकनीक से कम। कंपनी इसे अंदरूनी तौर पर Gen 2.5 कहती है। आने वाली Gen 3 ऑटोनॉमी इन-हाउस सिलिकॉन पर चलेगी, जिसकी क्षमता प्रति चिप 800 ट्रिलियन ऑपरेशन प्रति सेकंड है। ऐसी दो चिप होंगी, यानी कुल 1,600 — मौजूदा Nvidia आधारित समाधान से 4 गुना ज़्यादा। साथ में बेहतर कैमरे और lidar भी।\n\nउन्होंने बताया कि यह बीच का कदम भी काफी सक्षम होगा। वही मॉडल चलेगा, जिसे वे LDM यानी large driving model कहते हैं, और यह आगे चलकर point-to-point सुपरवाइज़्ड तक पहुंचेगा — गाड़ी में बैठिए, पता टाइप कीजिए और वह कहीं भी ले जाएगी। लेकिन 'आंखें बंद' यानी बिना निगरानी वाला Level 3 और फिर Level 4 — लॉन्च वाली R2 इसके काबिल नहीं होगी, और कंपनी ने इस बारे में बहुत साफ-साफ बताया है।\n\nGen 2.5 खरीदें या Gen 3 का इंतज़ार करें?\nअगर पहली R2 गाड़ियां Gen 2 या 2.5 होंगी, तो लोग बेहतर कैमरे, lidar, नए इन-हाउस सिलिकॉन और Level 3 वाली Gen 3 R2 का इंतज़ार क्यों न करें? Scaringe ने iPhone की मिसाल दी: लोग iPhone 17 यह जानते हुए खरीदते हैं कि iPhone 18 आएगा; और 18 क्यों खरीदें जब 19 आना तय है? उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में Siri से बात हो सकती थी, पर वह बहुत अच्छी नहीं थी; 2018 में Alexa थी, वह भी खास नहीं थी। अब हम असली AI के दौर में हैं। ऑटोनॉमी समाज की तैयारी से कहीं तेज़ रफ्तार से विकसित होगी। उनके मुताबिक चुनौती यह है कि इतनी मेहनत के बावजूद ऑटोनॉमी अब भी लोगों के खरीदने का बड़ा मापदंड नहीं है — शायद सिर्फ 20 से 25 फीसदी ग्राहक ही इस पर सचमुच ध्यान देते हैं।\n\nबटन बनाम वॉइस कंट्रोल\nखरीदारी के फैसले में नॉब और बटन भी मायने रखते हैं। कंपनी के तकनीकी प्रमुख वॉइस कंट्रोल को भविष्य मानते हैं, जबकि Scaringe ने खुद Luce के बटनों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वॉइस पर सफर लंबा है — वे इसे लेकर उत्साहित हैं, पर यह UI की जगह नहीं लेगा। हां, स्विचगियर की जगह कुछ हद तक ले रहा है।\n\nउन्होंने समझाया कि एक गाड़ी बनाने में करीब 4 करोड़ (40 million) फैसले होते हैं, जिनमें ज़्यादातर पर ग्राहक कभी ध्यान नहीं देते; पर कुछ हज़ार ऐसे होते हैं जो सीधे ग्राहक से जुड़े होते हैं। कुछ फैसले ऐसे होंगे जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आएंगे — जैसे बहुत ज़्यादा मल्टी-टच पर ज़ोर देना। यह जानबूझकर लिया गया सैद्धांतिक फैसला है, ताकि गाड़ी में अपडेट करने की ऊंची गुंजाइश रहे और फीचर्स विकसित होते रहें। पर R2 में उन्होंने कुछ मैकेनिकल इंटरैक्शन भी रखा, जो फिर भी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड है — इसके लिए हैप्टिक व्हील बनाए गए।\n\nR2 के स्टीयरिंग व्हील पर 'Halo Wheels' की जोड़ी है, जो डिस्प्ले की सेटिंग्स में जाने पर दबाने और घुमाने पर हैप्टिक क्लिक देती है। Scaringe ने बताया कि इनमें फीडबैक तो है, पर भले ही क्लिक होता महसूस हो, असल में यह पूरा सॉफ्टवेयर है — इसलिए इसे समय के साथ बदला जा सकता है। उन्होंने माना कि कुछ ग्राहक अब भी ढेर सारे बटन पसंद करते हैं, और Luce ने मल्टी-टच व बटन को साथ लाने का दिलचस्प प्रयोग किया है, जो आगे चलकर इंटीरियर डिज़ाइन पर काफी असरदार साबित हो सकता है।\n\nखुश ग्राहक बनाम भरोसेमंद गाड़ी\nRivian की ग्राहक संतुष्टि बहुत ऊंची है, पर विडंबना यह कि विश्वसनीयता (reliability) रेटिंग बहुत कम। दोनों में से क्या चुनेंगे — भरोसेमंद कार या जुनूनी ग्राहक? Scaringe ने कहा कि बेशक वे जुड़े हुए ग्राहक चाहेंगे, पर असल लक्ष्य बेहद भरोसेमंद कार बनाना है। दिक्कत यह है कि वह डेटा एक लैगिंग इंडिकेटर है — यह 2021 से 2023 की R1 गाड़ियों पर आधारित है। उन्होंने Toyota की मिसाल दी: उसका स्कोर अमेरिका में लॉन्च हुई उसकी पहली तीन गाड़ियों को नहीं, बल्कि बीते कुछ सालों को दर्शाता है। उनका भरोसा है कि R2 विश्वसनीयता में बड़ा सुधार लाएगी।\n\nChina और BYD से मुकाबला\nXiaomi ने 2021 में कारें बनाने का ऐलान किया — उसी साल जब R1 लॉन्च हुई — और 2023 में अपनी पहली कार उतार दी, जो बेहद तेज़ रफ्तार है। Europe में लॉन्च के समय Rivian का सीधा सामना चीनी निर्माताओं से होगा। मुकाबला कैसे होगा? Scaringe ने कहा कि चीन में इन कंपनियों ने पूरी तरह पूंजी से लैस होकर शुरुआत की — Xiaomi पहले से ही बहुत कामयाब टेक कंपनी थी, मज़बूत कैश फ्लो के साथ। पर वे उनकी ताकत को कमतर नहीं आंकना चाहते। Rivian के पास Xiaomi की कुछ गाड़ियां हैं — बेहद प्रभावशाली। प्रोडक्ट अलग तरह से पोज़िशन है, यह मायने रखता है। वे Xiaomi की गाड़ियां इसलिए नहीं रखते कि आज उनसे भिड़ रहे हैं, बल्कि इसलिए कि Europe जाते समय अपने प्रोडक्ट में तकनीक के मोर्चे पर उनसे मुकाबला करना होगा।\n\nअहम बात यह कि उनका तकनीकी स्टैक पहले से ही चीनी कंपनियों से मुकाबले का अनुभव लेने लगा है। पहली तैनाती Volkswagen ID.1 में है, जो Rivian की तकनीक इस्तेमाल करेगी — यह $20,000 की कार है, Europe की सबसे सस्ती EV में से एक, जिसे BYD की सस्ती EV से मुकाबला करना है। इस संयुक्त उपक्रम ने उन्हें मजबूर किया कि Europe में उनकी तकनीक चीन के बराबर खड़ी हो। वे Volkswagen Group और उसके सब-ब्रांड Porsche, Audi वगैरह के साथ काम कर रहे हैं।\n\nलेकिन ये ब्रांड तो खुद मुकाबले में जूझ रहे हैं? Scaringe ने कहा कि यही उनके सौदे की बड़ी बुनियाद है। गौर करने लायक है कि Volkswagen के साथ उनका पहला प्रोडक्ट North America का नहीं है — यह वह कार है जिसे चीन से भिड़ना है, और वह भी पश्चिमी तकनीक से, चीनी तकनीक से नहीं। दिलचस्प यह कि Volkswagen, XPeng के साथ भी साझेदारी करता है, और ऐसे में सवाल उठता ही है कि उनका स्टैक उसके मुकाबले कहां ठहरता है — और इसी पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने माना कि जहां पश्चिम — North America और Europe — आज मुकाबला नहीं कर सकता, वह है लागत।\n\nऑटोनॉमी की कीमत: $2,500 कब तक?\nइसी संदर्भ में Rivian अपने ऑटोनॉमस फीचर्स के लिए $2,500 ले रहा है। जो चीज़ BYD जैसे दूसरे मुफ्त दे रहे हैं, उसके लिए इतनी रकम कब तक ली जा सकेगी? Scaringe ने ईमानदारी से कहा कि उन्हें नहीं पता। जब तक बहुत कम कंपनियों के पास ऑटोनॉमस क्षमता है, तब तक इस पर कुछ शुल्क या प्रीमियम बना रहेगा। जैसे ही पर्याप्त कंपनियां इसे विकसित कर लेंगी, कीमत काफी घट जाएगी। पर दोनों ही हालात में यह बेहद अहम है — जहां यह मुफ्त हो जाएगा, वहां यह गाड़ी बेचने की ज़रूरी शर्त बन जाएगा।\n\nउनका मानना है कि यह आगे चलकर खरीद कीमत में ही शामिल हो जाएगा। उन्होंने एयरबैग की याद दिलाई — एक ज़माने में वह एक ऑप्शन हुआ करता था, अब हर गाड़ी में है। यानी ऑटोनॉमस फीचर्स के साथ भी यही हो सकता है, पर इससे उनकी अहमियत कम नहीं होती। इंटरव्यू में जब कहा गया कि असल सवाल यही है कि $2,500 कब तक लिए जा सकेंगे, तो उन्होंने कहा — आज तो ले ही सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे 1991 में एयरबैग के लिए लिया जा सकता था। अगर ले सकते हैं तो लेना चाहिए, बशर्ते यह कारोबार और तकनीक खड़ी करने में मदद करे।\n\nR3 कब आएगी?\nआखिर में, R2 के अभी-अभी लॉन्च होने के बावजूद सबकी जिज्ञासा R3 को लेकर है। Georgia प्लांट अभी पूरी तरह फंडेड नहीं है — क्या इससे देरी होगी? Scaringe ने कहा कि R3 को लेकर सबका उत्साह देखकर अच्छा लगता है और यह शानदार गाड़ी होगी, पर R3 R2 के बाद ही आएगी; फिलहाल ध्यान R2 का उत्पादन बढ़ाने और डिलीवरी पर है। उन्होंने बताया कि Georgia फैक्ट्री पर तेज़ी से काम हो रहा है और 2028 के अंत तक लाइन पर R2 का उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। योजना के मुताबिक निर्माण के इस पहले चरण में Georgia में सालाना 300,000 Rivian गाड़ियां बनेंगी।",
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  "category": "ऑटो",
  "publishedAt": "2026-06-13",
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