रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चलाई नई Volga K50 SUV, जानिए क्यों है इतनी चर्चा में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में नई Volga K50 SUV का टेस्ट ड्राइव किया और इस पर ऑटोग्राफ दिया। यह ऐतिहासिक ब्रांड अब चीनी तकनीक के सहारे बाजार में वापस लौटा है। रूस की सड़कों पर हाल ही में उतरी एक नई एसयूवी इन दिनों जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। इस गाड़ी का आकर्षण सिर्फ इसका दमदार लुक या आधुनिक इंजन ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे की एक बड़ी राजनीतिक और औद्योगिक कहानी भी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद निजनी नोवगोरोड के एक ऑटोमोटिव प्लांट के दौरे के दौरान इस गाड़ी को चलाया। इस टेस्ट ड्राइव के बाद उन्होंने वाहन पर अपने हस्ताक्षर भी किए। राष्ट्रपति ने इस एसयूवी के राइड कम्फर्ट, बेहतरीन कंट्रोल्स और इसकी स्मूथनेस की जमकर सराहना की। उनके ऑटोग्राफ वाली इस विशेष गाड़ी को अब वोल्गा ब्रांड के ऐतिहासिक सफर के एक अहम हिस्से के तौर पर सहेजा जाएगा। हालांकि इस वाहन की पूरी कहानी सिर्फ पुतिन की सवारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार रूस के बदलते ऑटोमोबाइल बाजार और पड़ोसी देश चीन के साथ लगातार मजबूत होती साझेदारी से भी जुड़े हुए हैं। सोवियत संघ के दौर का ऐतिहासिक ब्रांड वोल्गा रूस का एक बेहद पुराना और ऐतिहासिक कार ब्रांड माना जाता है, जिसकी शुरुआत सोवियत संघ के समय में साल 1956 में हुई थी। इस ब्रांड की कारों का निर्माण गोर्की ऑटोमोबाइल प्लांट द्वारा किया जाता था। उस पुराने दौर में इस गाड़ी को सरकारी अधिकारियों, डॉक्टरों और समाज के रसूखदार तथा प्रभावशाली लोगों के बीच एक अलग और ऊंचा दर्जा हासिल था। इस कार का मालिक होना सीधे तौर पर किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और उसकी प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। हालांकि, समय बदला और साल 2000 के दशक की शुरुआत में देश में विदेशी वाहन निर्माता कंपनियों की मौजूदगी तेजी से बढ़ने लगी। इसके साथ ही इस प्रतिष्ठित ब्रांड की लोकप्रियता में गिरावट आने लगी और अंततः इसका उत्पादन रोक दिया गया। प्रतिबंधों के बाद रूसी बाजार में वापसी साल 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद कई पश्चिमी कंपनियों ने रूस से अपना सारा कारोबार समेट लिया था। इस सूची में जर्मनी की प्रमुख कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप भी शामिल थी। इस स्थिति ने देश के ऑटो सेक्टर के सामने पार्ट्स और आधुनिक तकनीक की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। इसके बाद रूस ने अपने पुराने और पारंपरिक ऑटो ब्रांड्स को दोबारा से खड़ा करने और उन्हें मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। इसी नीति के तहत वोल्गा ब्रांड की फिर से बाजार में वापसी हुई है। नई वोल्गा गाड़ियां निजनी नोवगोरोड के उसी ऑटोमोटिव क्लस्टर में तैयार की जा रही हैं, जहां पहले फॉक्सवैगन और स्कोडा की गाड़ियां बनाई जाती थीं। इस प्लांट की कुल सालाना उत्पादन क्षमता करीब 1.1 लाख कारों की बताई गई है। चीनी तकनीक के सहारे तैयार रूसी गाड़ी इस वाहन को भले ही पूरी तरह से एक रूसी ब्रांड के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इसकी तकनीक के पीछे चीन की एक बहुत बड़ी भूमिका है। यह कार मुख्य रूप से जीली के जिंग्यूएल प्लेटफॉर्म पर आधारित है। इस वाहन को रूस में ही असेंबल किया जा रहा है, लेकिन इसमें चीनी तकनीक और विभिन्न घटकों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब साफ है कि रूस अपने पुराने और ऐतिहासिक ब्रांड को वापस तो ला रहा है, लेकिन इसके लिए उसे चीनी ऑटो तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है। यही मुख्य वजह है कि यह गाड़ी रूस और चीन के बीच लगातार बढ़ती आर्थिक और तकनीकी साझेदारी का एक बेहतरीन उदाहरण बन गई है। खासियतों से भरपूर है नई एसयूवी वोल्गा के50 एक डी सेगमेंट की फ्लैगशिप क्रॉसओवर एसयूवी है, जो कई आधुनिक खूबियों से लैस है। इस गाड़ी की कुल लंबाई 4,770 मिलीमीटर है और इसका व्हीलबेस 2,845 मिलीमीटर का रखा गया है। वाहन को ताकत देने के लिए इसमें 2.0 लीटर का शक्तिशाली टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है। यह इंजन कुल 238 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत पैदा करने में सक्षम है। इसके अलावा कार में बेहतर ड्राइविंग अनुभव के लिए 8 स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और ऑल व्हील ड्राइव सिस्टम दिया गया है। इस गाड़ी की कीमत बाजार में करीब 4.2 मिलियन रूबल बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 42 लाख रुपये बैठती है। घरेलू उद्योग को पुनर्जीवित करने की रणनीति रूस इस नई एसयूवी को केवल एक नए वाहन के रूप में नहीं देख रहा है, बल्कि यह देश के घरेलू ऑटो उद्योग को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। पश्चिमी कंपनियों के अचानक बाहर हो जाने के बाद देश को अपने ऑटो सेक्टर के लिए बिल्कुल नए रास्ते तलाशने पड़े थे। ऐसे में पुराने रूसी ब्रांड की धमाकेदार वापसी और उसमें चीनी तकनीक का उपयोग एक साथ देखने को मिलता है। राष्ट्रपति का खुद इस गाड़ी को चलाना इस संदेश को और अधिक मजबूत करता है कि देश अपने घरेलू ऑटो सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही यह चीन पर बढ़ती तकनीकी निर्भरता और दोनों देशों के बीच गहरे होते कारोबारी रिश्तों की भी साफ झलक दिखाता है। इसका आप पर असर वोल्गा K50 एसयूवी के बाजार में आने और पुतिन द्वारा इसे बढ़ावा दिए जाने से वैश्विक ऑटो बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ रहा है। • भारत में: भारत के वाहन खरीदारों और ऑटो सेक्टर पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह रूस और चीन के बीच गहरे होते तकनीकी सहयोग को जरूर दर्शाता है। • रूस में: रूस के ऑटो उपभोक्ताओं के लिए यह पश्चिमी कंपनियों के जाने के बाद एक नया घरेलू विकल्प पेश करता है, हालांकि इसकी कीमत करीब 42 लाख रुपये (4.2 मिलियन रूबल) है। सवाल-जवाब 1. Volga K50 SUV का टेस्ट ड्राइव किसने किया? रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने निजनी नोवगोरोड प्लांट के दौरे के दौरान इस कार का टेस्ट ड्राइव किया। 2. Volga ब्रांड की शुरुआत कब हुई थी? Volga ब्रांड की शुरुआत सोवियत संघ के दौर में साल 1956 में हुई थी। 3. यह कार किस चीनी प्लेटफॉर्म पर आधारित है? Volga K50 कार चीन की ऑटो कंपनी Geely के Xingyue L प्लेटफॉर्म पर आधारित है। 4. Volga K50 की कीमत कितनी है? इस कार की कीमत लगभग 4.2 मिलियन रूबल है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 42 लाख रुपये बैठती है। 5. इस एसयूवी में कौन सा इंजन दिया गया है? इस कार में 2.0 लीटर का टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है जो 238 हॉर्सपावर की ताकत पैदा करता है। https://trendkia.com/auto/rusi-rashtrapati-vladimir-putin-ne-chalai-nai-volga-k50-suv-janie-kyon-hai-itani-charcha-men-24650 TrendKia — Har trend, sabse pehle.